पश्चिम बंगाल की राजनीति में हाल के घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया है। विधानसभा चुनाव में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाने के बाद सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को एक और बड़ा झटका तब लगा,
जब उसके तीन राज्यसभा सांसदों ने जून महीने में पार्टी और संसद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। अब इन खाली हुई तीनों सीटों पर निर्वाचन आयोग ने उपचुनाव की घोषणा कर दी है।
आयोग के कार्यक्रम के अनुसार 24 जुलाई को मतदान होगा और उसी दिन मतगणना के बाद परिणाम भी घोषित किए जाएंगे।
सुखेंदु शेखर रॉय ने लगाए गंभीर आरोप
टीएमसी छोड़ने वालों में सबसे पहला नाम ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले सुखेंदु शेखर रॉय का था।
उन्होंने 8 जून को राज्यसभा की सदस्यता और पार्टी दोनों से इस्तीफा देकर राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी थी।
अपने इस्तीफे में रॉय ने पार्टी नेतृत्व पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि टीएमसी में भ्रष्टाचार बढ़ा है,
महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मामलों पर पार्टी की प्रतिक्रिया संतोषजनक नहीं रही और ईमानदारी से काम करने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं की अनदेखी की जा रही है।
उन्होंने अपने पत्र में आरजी कर मेडिकल कॉलेज से जुड़े चर्चित मामले का भी उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे मुद्दों पर पार्टी का रुख उन्हें निराश करने वाला रहा।
रॉय का कहना था कि पार्टी में योग्य और समर्पित लोगों की जगह विवादित चेहरों को अधिक महत्व दिया जा रहा है।
सुष्मिता देव का इस्तीफा और बीजेपी में जाने की चर्चा
सुखेंदु शेखर रॉय के इस्तीफे के दो दिन बाद, 10 जून को टीएमसी को दूसरा बड़ा झटका लगा, जब राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने भी पार्टी छोड़ने का फैसला किया।
इस्तीफा देने के तुरंत बाद उनकी मुलाकात दिल्ली में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा से हुई।
इस मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई कि सुष्मिता देव भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो सकती हैं।
हालांकि उस समय उन्होंने अपने अगले राजनीतिक कदम को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की थी।
कांग्रेस से टीएमसी तक का राजनीतिक सफर
सुष्मिता देव का राजनीतिक जीवन कांग्रेस से शुरू हुआ था। वह असम के सिलचर की रहने वाली हैं और 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर पहली बार सांसद चुनी गई थीं।
पार्टी ने उन्हें बाद में अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी सौंपी थी।
वह पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता संतोष मोहन देव की बेटी हैं। वर्ष 2021 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया था।
इसके बाद ममता बनर्जी ने उन्हें राज्यसभा भेजकर राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका दी थी।
प्रकाश चिक बराइक ने भी छोड़ी पार्टी
टीएमसी छोड़ने वाले तीसरे राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बराइक रहे। उन्होंने 11 जून को अपने पद से इस्तीफा दिया।
हालांकि उनके इस्तीफे की सबसे खास बात यह रही कि उन्होंने न तो पार्टी नेतृत्व पर कोई सार्वजनिक आरोप लगाया और न ही अपने पत्र में किसी तरह की राजनीतिक नाराजगी जाहिर की।
उनका इस्तीफा अपेक्षाकृत शांत तरीके से हुआ, लेकिन लगातार तीन सांसदों के इस्तीफे ने यह संकेत जरूर दिया कि पार्टी के भीतर असंतोष की स्थिति बनी हुई है।
राज्यसभा में टीएमसी की स्थिति
इन तीन इस्तीफों से पहले राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस के कुल 13 सदस्य थे। तीन सीटें खाली होने के बाद पार्टी की संख्या घटकर 10 रह गई है।
हालांकि टीएमसी अभी भी राज्यसभा में प्रमुख विपक्षी दलों में शामिल है, लेकिन लगातार हुए इस्तीफों ने पार्टी की राजनीतिक छवि और संगठनात्मक मजबूती पर सवाल खड़े किए हैं।
अब सभी की नजर 24 जुलाई को होने वाले उपचुनाव पर टिकी है। पश्चिम बंगाल विधानसभा में टीएमसी के बहुमत को देखते हुए इन सीटों पर उसके उम्मीदवारों की जीत की संभावना मजबूत मानी जा रही है।
फिर भी यह चुनाव केवल रिक्त सीटों को भरने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि ममता बनर्जी के नेतृत्व और पार्टी की एकजुटता की भी अहम परीक्षा माना जा रहा है।
विपक्ष भी इस पूरे घटनाक्रम को टीएमसी के भीतर बढ़ती असंतुष्टि के संकेत के रूप में पेश कर रहा है, जिससे आगामी राजनीतिक समीकरणों पर इसका असर पड़ सकता है।

