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Waqf Law: वक्फ संशोधन कानून को लेकर देश में सियासत का बाजार गर्म है। मुस्लिम आक्रांताओं द्वारा मस्जिदों संचालन के लिए दिए गए दो गांवों से शुरू हुआ भारत में वक्फ संपत्ति का रिवाज आज 9.4 लाख एकड़ तक पहुंच गया है। आज भारत में वक्फ के पास 8.7 लाख से ज्यादा संपत्तियाँ हैं। दुनिया के किसी भी देश, यहाँ तक कि मुस्लिमों मुल्कों में भी वक्फ के पास इतनी संपत्तियाँ नहीं हैं।
Waqf Law: भारत में वक्फ की औपचारिक शुरुआत का श्रेय इस्लामी आक्रांता मोहम्मद गोरी को दिया जाता है। गोरी अफगानिस्तान के घोर प्रांत से आया एक तुर्की शासक था, जिसने 12वीं सदी के अंत में भारत पर कई हमले किए। 1175 में उसने मुल्तान के इस्माइली शासक को हराया था। गोरी ने सन 1185 में मुल्तान की जामा मस्जिद के लिए दो गाँव दान में दिए। इन गाँवों का मैनेजमेंट शेख-अल-इस्लाम को सौंपा गया।
Waqf Law: कानून का ड्राफ्ट बनाया जिन्ना ने, नेहरू ने बनाया एक्स
Waqf Law: मुगलकाल में भी मस्जिद-मकबरों-दरगाहों को इस्लामी शासक बड़ी-बड़ी संपत्तियाँ देते रहे। अंग्रेज जब आए तो उन्होंने इस पर नियंत्रण करने की कोशिश की, लेकिन मुस्लिमों के विरोध के बाद उन्होंने इसे कानूनी रूप से दे दिया। इस कानून का ड्राफ्ट पाकिस्तान के जन्मदाता मोहम्मद अली जिन्ना ने तैयार किया था। भारत जब आजाद हुआ तो भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इसे जारी रखा।

Waqf Law: मुस्लिम तुष्टिकरण हवा देते हुए पहली सन 1954 में देश के पंडित नेहरू ने वक्फ एक्ट बनाया। इससे वक्फ बोर्ड नाम की एक संस्था बनी। इस कानून के तहत कॉन्ग्रेस की सरकार ने बँटवारे के बाद भारत से पाकिस्तान गए मुस्लिमों की जमीनें एवं संपत्तियाँ वक्फ बोर्डों को दे दीं। इस कानून के लागू होने के एक साल बाद यानी सन 1955 में इसमें संशोधन करके हर राज्य में वक्फ बोर्ड बनाए जाने की बात कही गई।
आज देश के 32 राज्यों में है वक्फ बोर्ड
Waqf Law: परिणाम ये हुआ है कि आज देश के करीब 32 राज्यों में वक्फ बोर्ड हैं। उत्तर प्रदेश और बिहार समेत कई राज्यों में शिया और सुन्नी मुस्लिमों के लिए अलग-अलग वक्फ बोर्ड हैं। ये बनाए तो गए थे वक्फ की संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन, देखरेख और उनका प्रबंधन करने के लिए, लेकिन ये बोर्ड आज सरकारी जमीनों-इमारतों के साथ-साथ हिंदुओं के पूरे-के-पूरे गाँवों तक पर दावा किए जाने लगे। सन 1964 में एक संशोधन पारित किया गया था।
इसके तहत केंद्रीय वक्फ परिषद की स्थापना की गई। इसका उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के केंद्रीकरण को बढ़ावा देना शामिल था। यह भारत सरकार का एक वैधानिक निकाय है। यह केन्द्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन आता है। इसका काम केंद्र सरकार को सलाह देना है।
यहां कांग्रेस ने मुस्लिम तुष्टिकरण की नई परिभाषा लिखी
Waqf Law: शाहबानो और मंडल-कमंडल के बीच बाबरी ढाँचा गिरने के बाद तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने मुस्लिम तुष्टिकरण की नई परिभाषा लिखी। प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हाराव की सरकार ने दो बड़े विवादित कानून बनाए। इनमें से एक पूजा स्थल अधिनियम और दूसरा वक्फ बोर्ड 1995 शामिल है। वक्फ बोर्ड 1995 में तत्कालीन कॉन्ग्रेस सरकार ने वक्फ बोर्ड को बेहद ताकतवर बना दिया।
इस एक्ट की धारा 3(R) में कहा गया कि अगर किसी संपत्ति को मुस्लिम कानून के मुताबिक पवित्र, मजहबी या परोपकारी मान लिया जाए तो वह वक्फ की संपत्ति हो जाएगी। इसमें ये कहा गया है कि यदि वक्फ बोर्ड को लगता है कि कोई भी जमीन किसी मुस्लिम की है तो वह उसे वक्फ संपत्ति घोषित कर सकता है। इसके लिए वक्फ बोर्ड को कोई कागजात पेश करने की जरूरत नहीं होगी।
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