विश्वगुरु बनने की राह पर भारत: दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के साथ-साथ भारत 2030 तक तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आत्मविश्वास से आगे बढ़ रहा है। इसका अनुमानित सकल घरेलू उत्पाद 7.3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर है।
वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में सकल घरेलू उत्पाद में 8.2 प्रतिशत की तेज वृद्धि दर्ज की गई है, जो पिछले छह तिमाहियों में सबसे ऊंचा आंकड़ा है।
यह वृद्धि न केवल पूर्वानुमानों से कई अधिक है, बल्कि पिछले वर्ष की समान तिमाही के 5.6 प्रतिशत से भी दोगुनी है।
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा जारी आंकड़ों से साफ है कि मैन्युफैक्चरिंग, सर्विसेज और निर्माण क्षेत्रों की मजबूत प्रदर्शन ने इस उछाल को संभव बनाया।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसे ‘सुधारों और राजकोषीय अनुशासन’ का परिणाम बताते हुए कहा कि भारत अब दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है।
जुलाई-सितंबर तिमाही में स्थिर मूल्यों पर जीडीपी 48.63 लाख करोड़ रुपये रही, जो एक साल पहले 44.94 लाख करोड़ रुपये थी। नॉमिनल जीडीपी 8.7% बढ़कर 85.25 लाख करोड़ रुपये हो गई है।
किस क्षेत्र में हुई कितनी वृद्धि?
विश्वगुरु बनने की राह पर भारत: प्राथमिक क्षेत्र
इसमें खेती-बाड़ी और खनन उद्योग शामिल हैं।
इस साल दूसरी तिमाही में इन क्षेत्रों ने सालाना आधार पर 3.1% की ग्रोथ दिखाई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 3.5% थी।
खेती-बाड़ी- वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में खेती ने 3.5% की सालाना ग्रोथ दर्ज की है।
पिछले साल, यानी वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में, यह ग्रोथ 4.1% थी।
खनन- खनन क्षेत्र में थोड़ी गिरावट आई। वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में यह 0.04% सिकुड़ा, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 0.4% सिकुड़ा था।
यानी गिरावट की तीव्रता दस गुना कम हो गई है और यह एक सकारात्मक संकेत है।
विश्वगुरु बनने की राह पर भारत: द्वितीयक क्षेत्र
इसमें मैन्युफैक्चरिंग और बिजली उद्योग आते हैं। इस साल दूसरी तिमाही में इस क्षेत्र ने सालाना आधार पर 8.1% की अच्छी ग्रोथ हासिल की।
पिछले साल इसी अवधि में यह ग्रोथ सिर्फ 4.0% थी।
मैन्युफैक्चरिंग- इस साल की दूसरी तिमाही में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने 9.1% की सालाना ग्रोथ दर्ज की।
पिछले साल इसी अवधि में यह ग्रोथ 2.2% थी।
विश्वगुरु बनने की राह पर भारत: तृतीयक क्षेत्र
इस क्षेत्र की ग्रोथ 9.2% रही। इसमें व्यापार, होटल, परिवहन, संचार और प्रसारण से जुड़ी सेवाएं शामिल हैं।
वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में इन सेवाओं ने सालाना आधार पर 7.4% की ग्रोथ दिखाई, जो पिछले साल की इसी अवधि के 6.1% से ज्यादा है।
इस साल का समुद्री उत्पाद 16.18%, मांस, डेयरी और पोल्ट्री उत्पाद 23.97%, अन्य अनाज 25.52%, काजू 28.32%, इलेक्ट्रॉनिक सामान 37.82% रहा।
GDP बढ़ने के प्रमुख कारण
विश्वगुरु बनने की राह पर भारत: सितंबर तिमाही में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक औसतन 4.1% बढ़ा, जबकि एक साल पहले यह 2.7% था। मैन्युफैक्चरिंग उत्पादन में 4.9% की बढ़ोतरी हुई, जो पिछले साल इसी अवधि में 3.3% थी।
बड़ी फैक्ट्रियों में उत्पादन बढ़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, फार्मा और मशीनरी जैसे क्षेत्रों में ऑर्डर तेज हुए। “मेक इन इंडिया”, PLI स्कीम और सरकारी समर्थन ने उद्योगों को मजबूती दी।
सरकारी पूंजीगत व्यय सितंबर तिमाही में 31% बढ़ा। हालांकि यह पिछली तिमाही के 52% के उछाल से कम है, लेकिन पिछले साल के 10% ग्रोथ से काफी बेहतर है।
फाइनेंस, इंश्योरेंस, रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में तेजी हुई। IT एवं डिजिटल सेवाओं में निरंतर वृद्धि, प्रोफेशनल और बिजनेस सेवाओं की मांग बढ़ी।
देश की GDP में सेवा क्षेत्र का योगदान सबसे अधिक रहा। भारतीय परिवारों ने पिछली तिमाही में अधिक खर्च किया।
बाज़ार में मांग बढ़ी, त्योहारी सीजन और बढ़ती आय ने खपत को बढ़ावा दिया। इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़े, ऑटो, और रिटेल सेक्टर में अच्छी बिक्री हुई।
सरकार ने इन्फ्रास्ट्रक्चर पर बड़े पैमाने पर निवेश किया। हाईवे निर्माण, रेलवे आधुनिकीकरण, मेट्रो प्रोजेक्ट, स्मार्ट सिटी और ग्रामीण सड़कों के निर्माण, इस तरह हर सेक्टर में काम बढ़ने से रोजगार भी बढ़े।
माल निर्यात में 8.8% की बढ़ोतरी हुई, जो पिछले साल इसी अवधि में 7% की गिरावट से उलट है। अमेरिका में आयात शुल्क लगने से पहले निर्यात की जल्दी हुई शिपमेंट ने इसमें मदद की। घरेलू खपत, जो अर्थव्यवस्था का लगभग 60% हिस्सा है, जुलाई-सितंबर तिमाही में मजबूत हुई।
पिछले वर्षों में किए गए कई सुधार अब परिणाम देने लगे। टैक्स सिस्टम का सरलीकरण, उद्योगों के लिए इज ऑफ डूइंग बिजनेस, विदेशी निवेश की प्रक्रिया आसान, डिजिटल अर्थव्यवस्था का विस्तार इन सुधारों से निवेशकों का विश्वास बढ़ा है।
GDP वृद्धि से भारत को फायदा?
विश्वगुरु बनने की राह पर भारत: उद्योग, निर्माण और सेवाओं में काम बढ़ने से नौकरी के अवसर भी बढ़ेंगे।
लोगों की आय और खर्च करने की क्षमता बढ़ेगी, यह अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत है।
8% से अधिक ग्रोथ देने वाला भारत अकेला बड़ा देश है। यह निवेशकों को आकर्षित करता है और भारत की छवि को मजबूत करता है।
सरकारी खर्च जारी रहने से गांवों और शहरों दोनों में विकास तेज होगा। जिससे बुनियादी ढांचा और विकसित होगा।
स्थिर और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था में निवेशक हमेशा रुचि दिखाते हैं, जिससे विदेशी निवेश में वृद्धि होने की संभावना है।
चार ट्रिलियन डॉलर पार होगी अर्थव्यवस्था
विश्वगुरु बनने की राह पर भारत: मुख्य आर्थिक सलाहकार, वी. अनंत नागेश्वरन ने बताया है कि भारत की अर्थव्यवस्था इस चालू वित्त वर्ष के दौरान 4 ट्रिलियन डॉलर को पार कर गयी।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दुनिया में भू-राजनीतिक स्थिति अनिश्चित बनी हुई है, ऐसे में भारत की आर्थिक वृद्धि वैश्विक मंच पर उसकी स्थिति और प्रभाव बनाए रखने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
फिलहाल, भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, जिसका सकल घरेलू उत्पाद 4 ट्रिलियन डॉलर से अधिक है।
पीएम मोदी बोले
विश्वगुरु बनने की राह पर भारत: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि 2025-26 की दूसरी तिमाही में 8.2 फीसदी जीडीपी ग्रोथ बहुत उत्साहजनक है।
उन्होंने कहा कि सरकार सुधारों को आगे बढ़ाना जारी रखेगी और सभी के लिए जीवन को आसान बनाना सुनिश्चित करेगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘यह हमारी विकास-समर्थक नीतियों और सुधारों का असर दिखाता है।
यह हमारे लोगों की कड़ी मेहनत और उद्यमशीलता को भी दर्शाता है।
हमारी सरकार हर नागरिक के लिए सुधारों को आगे बढ़ाना और ‘Ease of Living’ को मजबूत करना जारी रखेगी।’
भारतीय अर्थव्यवस्था न सिर्फ मजबूत हो रही है बल्कि वैश्विक स्तर पर भी तेजी से उभर रही है।
यह वृद्धि दर्शाती है कि सरकार की नीतियाँ, उद्योगों की गतिविधियाँ, डिजिटल क्रांति और लोगों का बढ़ता खर्च सब मिलकर भारत को तेज विकास के रास्ते पर ले जा रहे हैं।

