Saturday, February 14, 2026

यूएई राष्ट्रपति की पाकिस्तान यात्रा पर बने दावे और जमीनी सच्चाई

हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति की पाकिस्तान यात्रा को लेकर इस्लामाबाद में बड़े स्तर पर राजनीतिक और कूटनीतिक उत्साह दिखाया गया। उनका विमान इस्लामाबाद के नूर खान एयरवेज पर उतरा, जिसके बाद पाकिस्तानी मीडिया और सोशल मीडिया पर इसे कूटनीतिक उपलब्धि के रूप में प्रचारित किया गया।

सोशल मीडिया प्रचार और अरबों डॉलर के दावे

पाकिस्तान के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर राष्ट्रपति की तस्वीरें साझा कर यह दावा किया गया कि यह दृश्य भारत के लिए असहज करने वाला है। साथ ही यह भी प्रचारित किया गया कि इस यात्रा के दौरान यूएई के साथ अरबों डॉलर के आर्थिक समझौते होने वाले हैं।

इस्लामाबाद की तैयारियां और प्रतीकात्मक प्रदर्शन

इस्लामाबाद को संयुक्त अरब अमीरात के झंडों से सजाया गया था और तमाम बैठकों के स्थल पहले से तय कर दिए गए थे। आधिकारिक स्तर पर यह संकेत दिया जा रहा था कि यह यात्रा पाकिस्तान की विदेश नीति के लिए एक बड़ी सफलता साबित होगी।

हकीकत में क्या हुआ

बाद में सामने आया कि यूएई के राष्ट्रपति इस्लामाबाद एयरपोर्ट टर्मिनल से बाहर ही नहीं आए। वे वहां से सीधे रहीम यार खान चले गए। न तो घोषित बैठकों का आयोजन हुआ और न ही किसी बड़े आर्थिक समझौते की आधिकारिक पुष्टि सामने आई।

रहीम यार खान में शिकार का मामला

रहीम यार खान में राष्ट्रपति के परिवार और उनके साथ आए लोगों द्वारा एक दुर्लभ पक्षी के शिकार की जानकारी सामने आई। इस पक्षी को सोन चिरैया, गोडावन या ग्रेट इंडियन बस्टर्ड कहा जाता है, जिसे पकाकर भोजन के रूप में उपयोग किए जाने की बात कही गई।

विलुप्ति की कगार पर खड़ा पक्षी

ग्रेट इंडियन बस्टर्ड दुनिया के सबसे दुर्लभ पक्षियों में शामिल है। यह गुजरात और राजस्थान का राज पक्षी है और इसके संरक्षण के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। यह पक्षी तेज उड़ान भरने में असमर्थ होता है, जमीन पर रहता है और वहीं अंडे देता है।

अरब देशों में समाप्त होती प्रजाति

कभी यह पक्षी अरब देशों में भी पाया जाता था, लेकिन वहां बड़े पैमाने पर इसके शिकार के कारण यह लगभग समाप्त हो चुका है। कुछ अरब क्षेत्रों में यह मान्यता प्रचलित है कि इस पक्षी का सेवन पुरुष शक्ति बढ़ाने में सहायक होता है।

अब सीमित क्षेत्रों तक सिमटी मौजूदगी

वर्तमान में यह पक्षी केवल सिंध डेल्टा, कच्छ और राजस्थान के कुछ सीमित इलाकों में ही पाया जाता है। शेष दुनिया से यह लगभग विलुप्त हो चुका है, जिससे इसके अस्तित्व पर गंभीर संकट बना हुआ है।

शिकार परमिट और आर्थिक लेनदेन

आरोप है कि पाकिस्तान द्वारा यूएई, सऊदी अरब और कतर के शाही परिवारों को इस पक्षी के शिकार के लिए करोड़ों डॉलर में परमिट दिए जाते हैं। इसी कारण इसकी संख्या लगातार घटती जा रही है और संरक्षण के प्रयास कमजोर पड़ते दिख रहे हैं।

मौसमी प्रवास और बढ़ता खतरा

मौसम परिवर्तन के दौरान जब यह पक्षी भारत के कच्छ और राजस्थान से सिंध डेल्टा के क्षेत्रों की ओर जाता है, तब पाकिस्तान में इसके शिकार की घटनाएं बढ़ जाती हैं। बताया जाता है कि इसी दौरान इसकी बड़ी आबादी खत्म हो जाती है, जिससे यह प्रजाति विलुप्ति के और करीब पहुंच रही है।

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Samudra
Samudra
लेखक 'भारतीय ज्ञान परंपरा' के अध्येता हैं। वे पिछले एक दशक से सार्वजनिक विमर्श पर विश्लेषणात्मक लेखन कर रहे हैं। सांस्कृतिक सन्दर्भ में समाज, राजनीति, विचारधारा, शिक्षा, धर्म और इतिहास के प्रमुख प्रश्नों के रिसर्च बेस्ड प्रस्तुतिकरण और समाधान में वे पारंगत हैं। वे 'द पैम्फलेट' में दो वर्ष कार्य कर चुके हैं। वे विषयों को उनके ऐतिहासिक आधार, वैचारिक पृष्ठभूमि और दीर्घकालीन प्रभाव के स्तर पर परखते हैं। इसी कारण उनके राष्ट्रवादी लेख पाठक को नई दृष्टि और वैचारिक स्पष्टता भी देते हैं। उनके शोधपरक लेख अनेक मौकों पर राष्ट्रीय विमर्श की दिशा में परिवर्तनकारी सिद्ध हुए हैं।
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