रॉबर्ट मॉरिस
गेटवे चर्च के संस्थापक पर गंभीर आरोप
अमेरिका के प्रसिद्ध गेटवे चर्च के संस्थापक पास्टर रॉबर्ट मॉरिस को 1980 के दशक में 12 वर्षीय बच्ची के साथ यौन शोषण के मामले में दोषी ठहराया गया है।
गेटवे चर्च अमेरिका के शीर्ष मेगा-चर्चों में शामिल है और इसकी साप्ताहिक उपस्थिति 25,000 से अधिक बताई जाती है।
मेगा-चर्च की शुरुआत और व्यापक प्रभाव
पास्टर मॉरिस ने वर्ष 2000 में गेटवे चर्च की स्थापना की थी, जिसकी पहचान आगे चलकर लगभग एक लाख सक्रिय सदस्यों वाले बहु-स्थानिक मेगा-चर्च के रूप में बनी।
इस चर्च ने वर्षों में विशाल वित्तीय संसाधन, व्यापक अनुयायी आधार और राष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव हासिल किया।
ट्रंप के आध्यात्मिक गुरु की भूमिका
मॉरिस वर्ष 2016 में तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आध्यात्मिक सलाहकार नियुक्त किए गए थे। ट्रंप धर्म के मामलों में इस पादरी से सलाह लेते थे।
उन्हें ट्रंप की इवांजेलिकल एडवाइजरी कमेटी में शामिल किया गया था। उनकी धार्मिक गतिविधियाँ और राजनीतिक संपर्क उन्हें अमेरिकी दक्षिणपंथी ईसाई समुदाय में प्रमुख चेहरा बनाते रहे।
1982 में इवांजलिकल एसोसिएशन में नियुक्ति
रॉबर्ट मॉरिस को 1982 में ‘जेम्स रॉबिसन इवांजेलिकल एसोसिएशन’ द्वारा ट्रेनिंग देकर ‘ट्रैवलिंग इवांजलिस्ट’ नियुक्त किया गया था।
यह पद चर्च द्वारा वेतन, यात्रा-भत्ता और आवास सुविधा के साथ दिया जाता है। ऐसे प्रचारक विभिन्न राज्यों में परिवारों के घरों में रहकर धार्मिक कार्यक्रम संचालित करते हैं।
क्लेमिशायर परिवार के साथ रहते समय हुआ शोषण
इसी प्रक्रिया के तहत मॉरिस ओक्लाहोमा के क्लेमिशायर परिवार के साथ रहने भेजे गए थे। उसी दौरान उन्होंने 12 वर्षीय सिंडी क्लेमिशायर के साथ यौन शोषण शुरू किया।
यह कथित शोषण लगभग चार वर्षों तक जारी रहा और पीड़िता ने इस अवधि को मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न का समय बताया।
संस्था द्वारा शिकायत दबाने के आरोप
पीड़िता ने 1987 में अपने माता-पिता और चर्च नेतृत्व को घटना की जानकारी दी थी, लेकिन तत्कालीन धार्मिक संस्था ने किसी भी कानून प्रवर्तन एजेंसी को सूचित नहीं किया।
मॉरिस को केवल ‘‘लंबी छुट्टी’’ पर भेजा गया और बाद में वे पुनः धर्म-प्रचार में लौट आए।
पीड़िता की पुनः सार्वजनिक शिकायत
वर्ष 2024 में सिंडी क्लेमिशायर ने सार्वजनिक रूप से आरोप दोहराए, जिसके बाद गेटवे चर्च ने घोषणा की कि मॉरिस अपने पद से हट रहे हैं।
मॉरिस ने उस समय इसे ‘‘मोरल फेलियर’’ कहा था, जिसे पीड़िता ने अदालत में गलत शब्द बताते हुए कहा कि ‘‘12 वर्ष के बच्चे की सहमति की धारणा ही असंभव’’ है।
अभियोजन और अदालत की कार्रवाई
ओक्लाहोमा अटॉर्नी जनरल कार्यालय ने 2024 में जांच शुरू की। इसके बाद मॉरिस पर ‘लेव्ड ऑर इंडीसेंट एक्ट्स विथ अ चाइल्ड’ जैसे गंभीर आरोप लगाए गए।
उन्होंने अदालत में इन अपराधों को स्वीकार किया। सुनवाई के दौरान पीड़िता और उसका परिवार अदालत में उपस्थित रहे।
सजा का निर्धारण और कानूनी दायित्व
अदालत ने पास्टर मॉरिस को 10 वर्ष की सजा सुनाई, जिसमें केवल छह माह की अवधि जेल में बिताई जानी है। शेष अवधि पैरोल पर गुजरेगी।
उन्हें ‘‘सेक्स ऑफेंडर’’ के रूप में अनिवार्य पंजीकरण कराना होगा तथा पीड़िता को 2.5 लाख डॉलर क्षतिपूर्ति के रूप में देने का आदेश दिया गया।
अदालत में गिरफ्तारी और परिवार की उपस्थिति
अमेरिकी न्याय विभाग के दस्तावेज़ों के अनुसार, सुनवाई के बाद मॉरिस को वहीं अदालत परिसर में हिरासत में लिया गया।
इस दौरान उनकी पत्नी, वयस्क बच्चे और अन्य पारिवारिक सदस्य भी अदालत में मौजूद थे। NBC और CBS की रिपोर्टों में अदालत कार्यवाही का विस्तृत उल्लेख दर्ज है।
गेटवे चर्च पर उठे सवाल
यह मामला सामने आने के बाद गेटवे चर्च और अन्य इवांजेलिकल संगठनों की आंतरिक प्रक्रियाओं पर सवाल उठे हैं, विशेषतः उन मामलों में जहाँ धार्मिक पदाधिकारी परिवारों में रहकर प्रचार कार्य करते हैं।
संस्था द्वारा पूर्व शिकायत को दबाने के आरोप भी व्यापक रूप से उठाए जा रहे हैं।
अमेरिकी धार्मिक ढाँचे में जवाबदेही की बहस
यह प्रकरण अमेरिका के मेगा-चर्च तंत्र, धार्मिक नेतृत्व में जवाबदेही, और बड़े धार्मिक संगठनों द्वारा कर्मचारियों की सुरक्षा-परीक्षा प्रक्रियाओं पर नए सिरे से चर्चा का कारण बना है।
अभियोजन पक्ष का कहना है कि इस प्रकार के अपराधों में संस्थागत पारदर्शिता की अत्यधिक आवश्यकता है।

