सुप्रीम कोर्ट ने मेटा–वॉट्सऐप को लगायी फटकार: भारत में डेटा प्राइवेसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मेटा और वॉट्सऐप को फटकार लगायी है। मंगलवार, 3 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने वॉट्सऐप की प्राइवेसी पॉलिसी और डेटा शेयरिंग के तरीकों पर गहरी नाराज़गी जताते हुए साफ कहा कि भारतीय नागरिकों के मौलिक अधिकारों की कीमत पर किसी भी बहुराष्ट्रीय कंपनी को मुनाफ़ा कमाने की छूट नहीं दी जा सकती।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि भारत के करोड़ों यूज़र्स की मजबूरी और डिजिटल निर्भरता का फायदा उठाकर डेटा का व्यावसायिक इस्तेमाल करना संविधान के खिलाफ़ है।
‘बिहार के गाँव का आदमी तुम्हारी अंग्रेज़ी क्या समझेगा?’
सुप्रीम कोर्ट ने मेटा–वॉट्सऐप को लगायी फटकार: सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने वॉट्सऐप की प्राइवेसी पॉलिसी की भाषा पर तीखा सवाल उठाया। CJI सूर्यकांत ने मेटा के वकीलों से पूछा कि क्या बिहार या तमिलनाडु के किसी दूर-दराज़ गाँव में रहने वाला व्यक्ति आपकी इस जटिल कानूनी भाषा को समझ पाएगा।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि सड़क किनारे फल बेचने वाली महिला या घर में काम करने वाली बाई के लिए यह पॉलिसी समझना लगभग असंभव है।
कोर्ट ने टिप्पणी की कि पॉलिसी इतनी चालाक और उलझी हुई भाषा में लिखी गई है कि कई बार अदालत को भी उसे समझने में परेशानी होती है।
‘डेटा चोरी का एक सभ्य तरीका है’
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि करोड़ों भारतीयों का निजी डेटा इस तरह इकट्ठा करना और उसे व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल करना सीधे तौर पर निजी जानकारी की चोरी के समान है।
CJI सूर्यकांत ने सख्त लहजे में कहा कि वॉट्सऐप ने यूज़र्स की सहमति को केवल एक औपचारिकता बना दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस तरह की सहमति असली नहीं, बल्कि मजबूरी में ली गई स्वीकृति है, जिसे अदालत स्वीकार नहीं कर सकती।
‘Opt-out कोई विकल्प नहीं, यह एकाधिकार है’
सुप्रीम कोर्ट ने मेटा–वॉट्सऐप को लगायी फटकार: जब मेटा की ओर से यह दलील दी गई कि यूज़र्स को डेटा शेयरिंग से बाहर निकलने यानी Opt-out का विकल्प दिया गया है, तो सुप्रीम कोर्ट ने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया।
CJI ने कहा कि जब पूरा डिजिटल संचार एक ही प्लेटफॉर्म पर निर्भर हो जाए, तब यह कहना कि “ऐप छोड़ सकते हैं” एक मज़ाक है। कोर्ट ने माना कि वॉट्सऐप ने बाज़ार में एकाधिकार बना लिया है और अब उसी एकाधिकार का इस्तेमाल यूज़र्स को मजबूर करने के लिए किया जा रहा है।
‘आज मेटा ने खरीदा, कल कोई और खरीदेगा’
सुप्रीम कोर्ट ने कॉरपोरेट अधिग्रहण और डेटा ट्रांसफर पर भी गंभीर चिंता जताई। CJI सूर्यकांत ने कहा कि आज वॉट्सऐप मेटा के पास है, कल मेटा को कोई और कंपनी खरीद सकती है और यूज़र्स का डेटा बिना उनकी जानकारी के एक हाथ से दूसरे हाथ में चला जाएगा।
कोर्ट ने कहा कि यह प्रक्रिया भारत के संविधानवाद और नागरिकों के प्राइवेसी अधिकार का मज़ाक उड़ाने के बराबर है।
बिहेवियरल डेटा और विज्ञापन उद्योग की सच्चाई
सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने कहा कि कोर्ट यह समझना चाहता है कि लोगों के व्यवहार, रुचियों और डिजिटल आदतों का विश्लेषण कर डेटा को कैसे व्यावसायिक रूप से इस्तेमाल किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि आज डेटा का हर छोटा हिस्सा कीमती है और मेटा इसी बिहेवियरल डेटा के ज़रिए ऑनलाइन विज्ञापन बाज़ार में अपनी पकड़ मज़बूत कर रहा है।
CJI का निजी अनुभव, ‘5 मिनट में दवाओं के विज्ञापन क्यों दिखने लगे?’
इस बहस के दौरान CJI सूर्यकांत ने अपना निजी अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि जैसे ही उन्होंने वॉट्सऐप पर किसी डॉक्टर से तबीयत को लेकर बातचीत की, कुछ ही मिनटों में उसी बीमारी और दवाओं से जुड़े विज्ञापन ईमेल और यूट्यूब पर दिखने लगे।
CJI ने सवाल उठाया कि यह सब किस आधार पर हो रहा है और क्या यह यूज़र्स की निजी बातचीत की निगरानी का संकेत नहीं है।
‘संविधान नहीं मानते तो भारत से निकल जाइए’
सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त शब्दों में कहा कि भारत कोई ऐसा देश नहीं है जहाँ कॉरपोरेट कंपनियाँ कानून और संविधान को दरकिनार कर बिज़नेस कर सकें।
कोर्ट ने कहा कि अगर मेटा भारतीय कानून और नागरिकों की प्राइवेसी का सम्मान नहीं कर सकती, तो उसे भारत में कारोबार करने का कोई अधिकार नहीं है।
हलफनामा दाखिल करने के आदेश, IT मंत्रालय भी पक्षकार
सुप्रीम कोर्ट ने मेटा और वॉट्सऐप को निर्देश दिया कि वे 9 फरवरी 2026 तक अपना पक्ष रखते हुए हलफनामा दाखिल करें।
साथ ही, इस मामले में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को भी पक्षकार बनाया गया है।
CCI के 213.14 करोड़ के जुर्माने से जुड़ा मामला
यह पूरा मामला भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) द्वारा वॉट्सऐप पर लगाए गए 213.14 करोड़ रुपये के जुर्माने से जुड़ा है।
CCI ने यह जुर्माना वॉट्सऐप की एकाधिकारवादी नीति और प्राइवेसी पॉलिसी के दुरुपयोग के कारण लगाया था।
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