उत्तर प्रदेश में अवैध निर्माण पर सख्ती: उत्तर प्रदेश में अवैध कब्जों के खिलाफ प्रशासन की कार्रवाई लगातार जारी है। राज्य सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत एक बार फिर बुलडोजर चला है। इस बार कार्रवाई का केंद्र बने संभल और मैनपुरी जिले, जहाँ सरकारी जमीन पर किए जा रहे अवैध निर्माणों पर प्रशासन ने सख्त कदम उठाए।
संभल में चला बुलडोजर, 285 वर्ग मीटर जमीन कराई गई खाली
उत्तर प्रदेश में अवैध निर्माण पर सख्ती: संभल जिले की चंदौसी तहसील के नरौली क्षेत्र में गुरुवार (12 फरवरी 2026) को प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की। मोहल्ला बंजारी कुआँ में राजस्व विभाग की टीम भारी पुलिस बल और पीएसी के साथ पहुँची और करीब 285 वर्ग मीटर सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया।
राजस्व अभिलेखों के अनुसार, जिस जमीन पर ‘दारुल उलूम’ नामक मदरसा और आसपास 8 से 10 मकान बने थे, वह भूमि खाद के गड्ढों और सार्वजनिक मार्ग के लिए आरक्षित थी। प्रशासन का कहना है कि यह निर्माण पूरी तरह अवैध था। बुलडोजर की कार्रवाई में मदरसे के साथ-साथ आसपास बने अवैध मकानों को भी ध्वस्त कर दिया गया।
दो बार नोटिस के बाद की गई कार्रवाई
उत्तर प्रदेश में अवैध निर्माण पर सख्ती: एसडीएम आशुतोष तिवारी के अनुसार, कब्जाधारकों को पहले दो बार नोटिस जारी कर स्वयं अतिक्रमण हटाने का अवसर दिया गया था। निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्रवाई न होने पर प्रशासन को मजबूरन बुलडोजर चलाना पड़ा।
कार्रवाई के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए पाँच थानों की पुलिस बल मौके पर तैनात रही। पूरा क्षेत्र कुछ समय के लिए पुलिस छावनी में तब्दील हो गया।
हालाँकि, नरौली पंचायत अध्यक्ष बिट्टन मलिक ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें किसी प्रकार का नोटिस नहीं मिला और संबंधित मदरसा एक धार्मिक शिक्षण संस्थान के रूप में संचालित हो रहा था।
मैनपुरी में भी प्रशासन सख्त, मस्जिद निर्माण रुकवाया
इसी तरह मैनपुरी जिले में भी प्रशासन ने सार्वजनिक भूमि पर हो रहे निर्माण को लेकर तत्परता दिखाई। यहाँ कुछ लोगों द्वारा सरकारी जमीन पर मस्जिद का निर्माण कराया जा रहा था। ग्रामीणों की शिकायत मिलने के बाद अधिकारी मौके पर पहुँचे और निर्माण कार्य को तत्काल प्रभाव से रुकवा दिया।
फिलहाल प्रशासन भूमि के पुराने रिकॉर्ड और कागजातों की गहन जांच कर रहा है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि जमीन पर किसका अधिकार है। अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि बिना वैध अनुमति किसी भी सार्वजनिक भूमि पर निर्माण कार्य स्वीकार नहीं किया जाएगा।
‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर सरकार सख्त
उत्तर प्रदेश में अवैध निर्माण पर सख्ती: इन दोनों घटनाओं ने स्पष्ट संकेत दिया है कि राज्य सरकार अवैध कब्जों और अतिक्रमण के मामलों में कोई ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। प्रशासन का कहना है कि चाहे मामला किसी भी संस्था या व्यक्ति से जुड़ा हो, सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उत्तर प्रदेश में चल रही यह कार्रवाई न सिर्फ जमीनों को मुक्त कराने का प्रयास है, बल्कि कानून के समान अनुपालन का संदेश भी देती है। आने वाले समय में ऐसे और मामलों में प्रशासन की सख्ती देखने को मिल सकती है।

