श्रीलंका इस समय शक्तिशाली चक्रवात ‘दित्वा’ के बाद आई भारी बाढ़ और भूस्खलन से गंभीर संकट में है।
पूर्वी तट पर लैंडफॉल के बाद हालात बिगड़ते चले गए। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार अब तक 47 लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग घायल हुए हैं।
वहीं 21 लोग अभी भी लापता हैं, जिनकी तलाश में बड़े पैमाने पर बचाव अभियान जारी है।
कैसे बना चक्रवात ‘दित्वा’?
चक्रवात ‘दित्वा’ 26 नवंबर को दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में कम दबाव के रूप में विकसित हुआ।
27 नवंबर तक यह एक पूर्ण चक्रवात में बदल गया और 28 नवंबर की सुबह श्रीलंका के पूर्वी तट से टकराया।
गर्म समुद्री सतह और कम हवा की कतरनी ने इसे बेहद तेज़ी से मजबूत बना दिया, जिसके चलते पूरे द्वीप में मूसलाधार बारिश और पहाड़ी क्षेत्रों में भीषण भूस्खलन हुआ।
अगले चरण में यह तूफान 28 से 30 नवंबर के बीच तमिलनाडु तट से टकरा सकता है।
सबसे ज़्यादा तबाही कहां हुई?
मध्य-पर्वतीय बादुल्ला और नुवारा एलिया इलाके सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं, जहां चाय बागानों के पास भारी भूस्खलन हुआ।
कई घर, सड़कें, खेत और रेल लाइनें बह गईं।
सरकारी एजेंसियों के अनुसार 17 जिलों में 5,893 से अधिक लोग (1,729 परिवार) प्रभावित हुए हैं।
कई जगह कीचड़, उखड़े पेड़ और मलबा रास्तों को जाम कर रहे हैं, जिससे राहत दलों को पहुंचने में दिक्कत हो रही है।
सरकारी कदम और राहत अभियान
हालात की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने कई स्कूल और सरकारी कार्यालय बंद कर दिए हैं।
रेल सेवाएं, सड़क यातायात और कुछ अंतरराष्ट्रीय उड़ानें बाधित या रद्द कर दी गई हैं।
नावों और हेलीकॉप्टरों की मदद से बाढ़ग्रस्त इलाकों में फंसे लोगों को निकाला जा रहा है।
केलानी नदी पर बड़ा बाढ़ खतरा
भारी बारिश के बाद केलानी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ता जा रहा है।
अगले 48 घंटों में इसके निचले इलाके, एहेलियागोडा, यतियानटोटा, रुवानवेला, देहियोविटा, सीतावाका, डोम्पे, पादुक्का, होमगामा, कडुवेला, बियागामा, कोलोनावा, केलानिया, वट्टाला और कोलंबो, में गंभीर बाढ़ का खतरा बताया जा रहा है।
आपदा से मिली सीख
इस घटना ने यह साफ कर दिया कि पहाड़ी और नदी किनारे बसे इलाकों में आपदा प्रबंधन, जल-निकासी सिस्टम, नदी बांधों की मजबूती और जंगलों की रक्षा बेहद महत्वपूर्ण है।
समय रहते चेतावनी देने वाली प्रणाली पर भी अधिक निवेश की ज़रूरत है।
आर्थिक चोट और श्रीलंका की पीड़ा
पहले से आर्थिक संकट झेल रहे श्रीलंका को यह आपदा और पीछे धकेल सकती है।
चाय और रबर उद्योग को भारी नुकसान हुआ है, जबकि सड़कें, पुल और बिजली व्यवस्था लगभग ठप हो चुकी हैं।
राष्ट्रपति ने इसे देश के इतिहास की सबसे भयानक प्राकृतिक आपदाओं में से एक बताया, लेकिन कहा “श्रीलंका का नागरिक हमेशा संकटों से उबरता आया है। हम फिर उठेंगे।”
भारत के लिए चेतावनी
फिलहाल चक्रवात ‘दित्वा’ श्रीलंका के त्रिंकोमाली क्षेत्र के पास सक्रिय है और उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ रहा है।
अब इसका असर तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश तक पहुंचने की संभावना है।
कन्याकुमारी, तूतीकोरिन, नागपट्टिनम, पुदुचेरी और चेन्नई में भारी बारिश व तेज हवाएं संभावित हैं।
भारत और श्रीलंका, दोनों देशों के तटीय इलाकों को सतर्क रहने की सलाह जारी है।

