Saturday, February 14, 2026

शुभांकर मिश्रा बायोग्राफी: इंजीनियरिंग से लेकर टेलीप्रॉम्प्टर और डिजिटल प्लेटफॉर्म तक का सफर

शुभांकर मिश्रा बायोग्राफी: भारतीय पत्रकारिता के तेज़ रफ़्तार गलियारों में, जहां खबरें सोशल मीडिया फीड की तरह बदलती हैं।

वहा शुभांकर मिश्रा एक ऐसा नाम बनकर उभरे हैं जिन्होंने पारंपरिक टीवी दर्शकों और आज की ‘डिजिटल जनरेशन’ दोनों की नब्ज पकड़ ली है।

जरा सोचिए, एक इंजीनियरिंग का छात्र जो सिर्फ एक फिल्म से प्रेरित होकर अपनी जमी-जमाई करियर को छोड़ देता है,

ताकि वह बाढ़ की विभीषिका और राजनीति के अखाड़े में खड़े होकर जनता की आवाज़ बन सके यह कहानी है शुभांकर मिश्रा की।

नेशनल न्यूज़ का प्रमुख चेहरा होने से लेकर 30 मिलियन से ज्यादा फॉलोअर्स वाले ‘डिजिटल किंग’ बनने तक का उनका सफर किसी मिसाल से कम नहीं है।

उन्होंने साबित कर दिया कि एक पत्रकार की असली पहचान किसी बड़े चैनल के लोगों से नहीं, बल्कि उसकी साख और जनता के भरोसे से होती है।

टेलीप्रॉम्प्टर की दुनिया से निकलकर खुद का डिजिटल साम्राज्य खड़ा करने वाले शुभांकर आज करोड़ों युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा हैं।

व्यक्तिगत जानकारी

विवरणजानकारी
नामशुभांकर मिश्रा
जन्म तिथि10 अप्रैल 1993
आयु (2026)32 वर्ष
जन्मस्थानगोंडा, उत्तर प्रदेश, भारत
पेशापत्रकार, एंकर, यूट्यूबर, डिजिटल क्रिएटर
प्रमुख चैनलTV9 Bharatvarsh, Aaj Tak, News24
पिताहरिहर मिश्रा
माताअनुपम मिश्रा (सरकारी विद्यालय की प्रधानाचार्य)
भाईसौरभ मिश्रा (बांसुरी वादक)
अनुमानित नेट वर्थ (2025)₹4–5 करोड़
वार्षिक आय₹25–30 लाख (अनुमानित)
धर्महिंदू
राष्ट्रीयताभारतीय

पारिवारिक पृष्ठभूमि और जड़ें

शुभांकर मिश्रा बायोग्राफी: शुभांकर मिश्रा का जन्म 10 अप्रैल, 1993 को उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक शहर गोंडा में हुआ।

उनकी परवरिश हिंदी भाषी परिवेश के मूल्यों में हुई,

जिसका असर बाद में उनकी रिपोर्टिंग और बोलने के अंदाज़ में साफ दिखा।

पिता: हरिहर मिश्रा (शुभांकर उन्हें सार्वजनिक सेवा और मीडिया में आने की प्रेरणा मानते हैं)

माता: अनुपम मिश्रा (गोंडा के एक प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापिका)

भाई: सौरभ मिश्रा (एक कुशल बांसुरी वादक)

शुरुआती जीवन और शिक्षा: ‘3 ईडियट्स’ वाला मोड़

शुभांकर का सफर किसी मीडिया स्कूल से शुरू नहीं हुआ था। अपने पिता के सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने तकनीकी रास्ता चुना।

स्कूली शिक्षा: सेंट जेवियर्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल, गोंडा।

कॉलेज: गलगोटिया यूनिवर्सिटी, ग्रेटर नोएडा से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री।

फिल्म ‘3 ईडियट्स’ की तरह शुभांकर को भी अहसास हुआ कि उनका मन मशीनों में नहीं, बल्कि कहानियों और लोगों के बीच रमता है।

उन्होंने पत्रकारिता की ओर रुख करने का फैसला लिया और महज ₹5,000 की शुरुआती सैलरी पर काम शुरू किया।

संघर्ष के दिन: ₹10,000 और ‘ग्रेवयार्ड शिफ्ट’

पिता से उधार: शुभांकर नोएडा आए तो उनकी जेब में पिता से लिए हुए सिर्फ ₹10,000 थे। उन्होंने बेहद साधारण कमरों में रहकर और सुख-सुविधाओं का त्याग कर उस राशि से अपना गुजारा किया।

शुरुआती चुनौतियां: 2015 में जब उन्होंने क्षेत्रीय न्यूज़ (इंडिया न्यूज़) से शुरुआत की, तो सैलरी इतनी कम थी कि किराया और खाने के पैसे जुटाना भी मुश्किल था।

वे अक्सर पैदल चलकर या लोकल बस से सफर कर के पैसे बचाते थे।

रातों की ड्यूटी: नए होने के नाते उन्हें प्राइम-टाइम नहीं मिलता था। उन्होंने महीनों ‘ग्रेवयार्ड शिफ्ट’ (आधी रात की ड्यूटी) की, जहां दुनिया के सोने पर वे जागकर खबरें तैयार करते थे।

अपनी भाषा और बोलने की शैली (Pitch & Delivery) सुधारने के लिए वे घंटों शीशे के सामने खड़े होकर अभ्यास करते थे।

करियर का सफर

शुभांकर का करियर न्यूज़ इंडस्ट्री में लगातार तरक्की की मिसाल रहा है:

2015 – 2017 (इंडिया न्यूज़): क्षेत्रीय बुलेटिन (हरियाणा, यूपी, राजस्थान) से शुरुआत।

2017 – 2019 (ज़ी न्यूज़): एक तेज-तर्रार युवा एंकर के रूप में राष्ट्रीय पहचान मिली।

2019 – 2022 (टीवी9 भारतवर्ष): उस मुख्य टीम का हिस्सा रहे जिसने इस चैनल को टीआरपी की रेस में टॉप पर पहुंचाया।

2022 – 2024 (आज तक): देश के सबसे बड़े न्यूज़ चैनल में एक प्रमुख एंकर के रूप में करियर के शिखर पर पहुंचे।

2025 – वर्तमान (NDTV इंडिया): डिजिटल और लीगेसी मीडिया के मेल के साथ प्राइम-टाइम एंकर के रूप में टीवी पर वापसी।

डिजिटल क्रांति: ‘न्यूज़ बुक’ का जन्म

2023 में जब शुभांकर अपने टीवी करियर के चरम पर थे, तब उन्होंने ‘आज तक’ छोड़ने का चौंकाने वाला फैसला किया। उन्हें लगा कि स्टूडियो की चारदीवारी उन्हें असल जनता से दूर कर रही है।

न्यूज़बुक (NewsBook): उन्होंने अपना डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू किया ताकि आम आदमी तक खबरों को आसान भाषा में पहुंचाया जा सकें।

क्रिकेटबुक (CricketBook): खेल प्रेमियों के लिए एक समर्पित मंच।

धमाकेदार सफलता: आज इंस्टाग्राम पर उनके 11 मिलियन से ज्यादा फॉलोअर्स हैं और उनका कुल डिजिटल फुटप्रिंट 30 मिलियन को पार कर गया है।

आज तक छोड़ना और राम मंदिर का संदर्भ

शुभांकर ने 2024 की शुरुआत में ‘आज तक’ को अलविदा कहा। यह वही समय था जब राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा (जनवरी 2024) का कवरेज चरम पर था।

उन्होंने महसूस किया कि टीवी प्रसिद्धि तो देता है, लेकिन ‘डिजिटल युग’ आपको खुद का मालिक बनाता है। वे बिना किसी फिल्टर या ‘एजेंडा’ के सीधे अपनी ऑडियंस से बात करना चाहते थे।

प्राची पाराशर का साथ: लोकप्रिय एंकर प्राची पाराशर ने भी उसी समय टीवी की दुनिया से दूरी बनाई।

दोनों ने मिलकर अपना डिजिटल साम्राज्य खड़ा किया और साबित किया कि बड़े पत्रकारों को पहचान के लिए किसी बड़े चैनल के लोगो (Logo) की ज़रूरत नहीं है।

लेखन और सामाजिक सरोकार

शुभंकर सिर्फ बोलते नहीं, लिखते भी हैं। उनकी प्रमुख पुस्तकें हैं:

The Next Entrepreneur: स्टार्टअप की दुनिया में कदम रखने वाले युवाओं के लिए गाइड।

भारत के महान वैज्ञानिक: स्कूली बच्चों में वैज्ञानिक सोच जगाने के लिए।

घड़ी है बड़े काम की चीज़: बच्चों के लिए समय के महत्व पर आधारित किताब।

इसके अलावा, वे ‘कट-कथा’ (Kat-Katha) जैसे एनजीओ के साथ मिलकर रेड-लाइट एरिया की महिलाओं और बच्चों के पुनर्वास के लिए काम करते हैं।

असम बाढ़ और महामारी के दौरान उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग के जरिए मदद पहुँचाने में बड़ी भूमिका निभाई।

विवाद और चुनौतियां

सफलता के साथ चुनौतियां भी आती हैं। 2025 के अंत में, पुरी मंदिर को लेकर की गई कुछ टिप्पणियों के कारण उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ा।

हालांकि, एक ज़िम्मेदार पत्रकार की तरह उन्होंने भक्तों की भावनाओं का सम्मान करते हुए सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी।

रोचक तथ्य

गणित प्रेमी: पत्रकार होने के बावजूद उन्हें मैथ्स बहुत पसंद है और वे अपनी रिपोर्टिंग में डेटा का बखूबी इस्तेमाल करते हैं।

‘शांत’ पहचान: उन्होंने “A Common Man Doing Calm Se Kaam” का नारा अपनाया है, जो टीवी न्यूज़ के शोर-शराबे से बिल्कुल अलग है।

मनोविज्ञान: वे ‘पॉजिटिव साइकोलॉजी’ में सर्टिफाइड हैं, जो उन्हें मीडिया के तनावपूर्ण माहौल में शांत रहने में मदद करता है।

नेट वर्थ

2020 ₹50–60 लाख

2021 ₹70–80 लाख

2022 ₹1 करोड़+

2023 ₹1.5 करोड़+

2024 ₹2–2.5 करोड़

2025 ₹4–5 करोड़

यह भी पढ़ें:- प्राजक्ता कोली बायोग्राफी: यूट्यूब से उठी एक आवाज़, जो बन चुकी डिजिटल इंडिया की पहचान

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Madhuri
Madhurihttps://reportbharathindi.com/
पत्रकारिता में 6 वर्षों का अनुभव है। पिछले 3 वर्षों से Report Bharat से जुड़ी हुई हैं। इससे पहले Raftaar Media में कंटेंट राइटर और वॉइस ओवर आर्टिस्ट के रूप में कार्य किया। Daily Hunt के साथ रिपोर्टर रहीं और ETV Bharat में एक वर्ष तक कंटेंट एडिटर के तौर पर काम किया। लाइफस्टाइल, इंटरनेशनल और एंटरटेनमेंट न्यूज पर मजबूत पकड़ है।
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