Sunday, August 2, 2026

Sawan 2026: सोलह सोमवार व्रत की ऐसे करें शुरुआत, जानें पूजा विधि, प्रसाद और उद्यापन के खास नियम

Sawan 2026: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस पवित्र महीने में शिव भक्त सोमवार के दिन व्रत रखकर भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करते हैं। सावन के पहले सोमवार से ही सोलह सोमवार व्रत शुरू करने की परंपरा भी प्रचलित है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, लगातार 16 सोमवार तक श्रद्धा और नियम के साथ भगवान शिव की पूजा करने से भक्त को भोलेनाथ की कृपा प्राप्त होती है।

यह व्रत विशेष रूप से मनोकामना पूर्ति, अच्छे जीवनसाथी, सुखी वैवाहिक जीवन, संतान सुख और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना से रखा जाता है।

सोलह सोमवार व्रत रखने वाले भक्तों के लिए पूजा की विधि और कुछ नियमों का पालन करना भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

आइए जानते हैं सोलह सोमवार व्रत की शुरुआत कैसे करें, पूजा में क्या चढ़ाएं, प्रसाद कैसे बांटें और 16 व्रत पूरे होने के बाद उद्यापन किस तरह किया जाता है।

सोलह सोमवार व्रत में कैसे लें संकल्प?

सोलह सोमवार व्रत की शुरुआत संकल्प के साथ करने की धार्मिक परंपरा है।

व्रत रखने वाला व्यक्ति सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करे और भगवान शिव के सामने बैठकर व्रत का संकल्प ले।

संकल्प के दौरान हाथ में जल, अक्षत, फूल और बेलपत्र लेकर भगवान शिव का ध्यान करें। इ

सके बाद श्रद्धा के साथ लगातार 16 सोमवार व्रत रखने का संकल्प लिया जाता है।

भक्त भगवान शिव से व्रत को नियमपूर्वक पूरा करने की शक्ति देने और जाने-अनजाने हुई गलतियों के लिए क्षमा मांग सकता है।

सोलह सोमवार व्रत की पूजा विधि क्या है?

सोलह सोमवार के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। इसके बाद भगवान शिव का ध्यान करके पूजा की तैयारी करें।

यदि संभव हो तो शिव मंदिर जाकर शिवलिंग का जल और गंगाजल से अभिषेक करें।

इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से पंचामृत अभिषेक करने की परंपरा है।

अभिषेक के बाद शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, सफेद फूल, चंदन और मौसमी फल अर्पित किए जाते हैं।

इसके बाद धूप और दीपक जलाकर भगवान शिव की आराधना करें।

पूजा के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार मंत्र का जाप कर सकते हैं।

इसके अलावा शिव चालीसा, रुद्राष्टक या सोलह सोमवार व्रत की कथा का पाठ भी किया जाता है।

पूजा के अंत में भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें और प्रसाद वितरित करें।

सोलह सोमवार व्रत में प्रसाद से जुड़े नियम

सोलह सोमवार व्रत में प्रसाद को लेकर भी अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग परंपराएं देखने को मिलती हैं।

एक प्रचलित मान्यता के अनुसार, पूजा के बाद प्रसाद को तीन हिस्सों में बांटने की परंपरा है।

एक हिस्सा गाय को खिलाने, दूसरा परिवार के सदस्यों में बांटने और तीसरा हिस्सा स्वयं ग्रहण करने की मान्यता बताई जाती है।

व्रत रखने वाले व्यक्ति को अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार सात्विक आहार लेना चाहिए।

धार्मिक परंपराओं में व्रत के दौरान संयम रखने और भगवान शिव का सुबह तथा प्रदोष काल में स्मरण करने पर भी जोर दिया गया है।

16 सोमवार पूरे होने के बाद कब होता है उद्यापन?

सोलह सोमवार व्रत पूरे होने के बाद इसका उद्यापन किया जाता है। सामान्य धार्मिक परंपरा में 16 व्रत पूरे होने के बाद अगले सोमवार यानी 17वें सोमवार को उद्यापन करने की बात कही जाती है।

उद्यापन के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा की जाती है। इसके बाद हवन आदि धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। परंपरा के अनुसार ब्राह्मणों को भोजन कराया जाता है और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा देकर आशीर्वाद लिया जाता है।

हालांकि, उद्यापन की विधि और उसमें किए जाने वाले अनुष्ठान अलग-अलग परंपराओं और क्षेत्रों में अलग हो सकते हैं। इसलिए परिवार की परंपरा या स्थानीय पुरोहित की सलाह के अनुसार विधि अपनाना उचित माना जाता है।

सोलह सोमवार व्रत में किन चीजों का ध्यान रखें?

भगवान शिव की पूजा में कुछ वस्तुओं को अर्पित करने को लेकर धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। आमतौर पर शिव पूजा में केतकी का फूल, तुलसी दल, हल्दी और सिंदूर अर्पित नहीं करने की परंपरा बताई जाती है।

वहीं, बेलपत्र भगवान शिव को प्रिय माना जाता है। पूजा में बेलपत्र चढ़ाते समय साफ और ताजा पत्ते लेने की परंपरा है।

पूजा समाप्त होने के बाद भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें और प्रसाद को परिवार के सदस्यों तथा अन्य श्रद्धालुओं में बांटें।

सोलह सोमवार व्रत का क्या महत्व है?

धार्मिक मान्यताओं में सोलह सोमवार व्रत को भगवान शिव की भक्ति और साधना से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि श्रद्धा और नियम के साथ यह व्रत करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्त की मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

कई लोग यह व्रत विवाह, सुखी दांपत्य जीवन, संतान सुख, पारिवारिक शांति और समृद्धि की कामना से रखते हैं।

हालांकि, व्रत का वास्तविक उद्देश्य केवल मनोकामना पूर्ति नहीं बल्कि श्रद्धा, संयम और भगवान शिव के प्रति भक्ति भाव रखना भी माना जाता है।

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और प्रचलित परंपराओं पर आधारित है। अलग-अलग क्षेत्रों और संप्रदायों में पूजा-विधि तथा व्रत के नियम अलग हो सकते हैं।

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Karnika Pandey
Karnika Pandeyhttps://reportbharathindi.com/
“This is Karnika Pandey, a Senior Journalist with over 3 years of experience in the media industry. She covers politics, lifestyle, entertainment, and compelling life stories with clarity and depth. Known for sharp analysis and impactful storytelling, she brings credibility, balance, and a strong editorial voice to every piece she writes.”
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