Sunday, August 2, 2026

84,084 करोड़ का ‘समुद्र मंथन’: समंदर से निकलेगा भारत का अपना तेल और गैस, कम होगी विदेशी निर्भरता

84,084 करोड़ का ‘समुद्र मंथन’: भारत की ऊर्जा निर्भरता का इतिहास दशकों से विदेशी तेल के टैंकरों और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों के झटकों से बंधा रहा है।

हर साल करीब 144 अरब डॉलर (लगभग ₹13 लाख करोड़) की भारी-भरकम रकम सिर्फ कच्चा तेल खरीदने में देश से बाहर चली जाती है।

लेकिन 31 जुलाई 2026 की शाम दिल्ली में हुई कैबिनेट बैठक ने इस पुरानी कहानी को बदलने की नींव रख दी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंजूर की गई ‘समुद्र मंथन’ (नेशनल ऑफशोर एक्सप्लोरेशन स्कीम) योजना सिर्फ एक सरकारी बजट आवंटन नहीं है, बल्कि भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का अब तक का सबसे बड़ा और जोखिम भरा दाँव है।

इस महत्वाकांक्षी मिशन के तहत सरकार ने 2030-31 तक के लिए ₹84,084 करोड़ का खाका तैयार किया है। योजना का सीधा लक्ष्य है।

अगले पाँच वर्षों में 60 बेहद गहरे और चुनौतीपूर्ण खोजी कुओं की खुदाई करना और विशाल समुद्री क्षेत्रों में सिस्मिक सर्वे पूरा करना।

दरअसल, पुराने कुओं का उत्पादन हर साल 6 से 7 प्रतिशत की दर से गिर रहा है और वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल ने देश को यह अहसास करा दिया है कि अपनी ऊर्जा की कुंजी अपने हाथ में होना ही असली संप्रभुता है।

कानून बदले, पाबंदियाँ हटीं: एक दशक का अदृश्य होमवर्क

84,084 करोड़ का ‘समुद्र मंथन’: यह महा-अभियान रातों-रात शुरू नहीं हुआ। पिछले दस वर्षों में सरकार ने चुपचाप उस ज़मीन को तैयार किया है जिस पर आज यह योजना खड़ी है।

पहले देश के एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक ज़ोन (EEZ) का एक बड़ा हिस्सा सुरक्षा और प्रशासनिक कारणों से ‘नो-गो एरिया’ बना हुआ था।

सरकार ने 99% से अधिक पाबंदियों को हटाकर 10 लाख वर्ग किलोमीटर से अधिक समुद्री क्षेत्र को पहली बार खोज के लिए खोल दिया।

इसके साथ ही पुराने पेचीदा नियमों को बदलकर सुगम ‘रेवेन्यू शेयरिंग कॉन्ट्रैक्ट’ और 2025 के नए ‘ऑयलफील्ड्स रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट’ कानून लागू किए गए, ताकि घरेलू और विदेशी दिग्गज बिना किसी कानूनी उलझन के निवेश कर सकें।

बजट का गणित और 4 बड़े आधार स्तंभ

84,084 करोड़ का ‘समुद्र मंथन’: समुद्र की गहराई में तेल खोजना एक अत्यधिक महँगा और जोखिम भरा खेल है, जहाँ एक गहरे कुएँ की खुदाई में ही औसतन ₹1,192 से ₹1,430 करोड़ का खर्च आता है।

इसी डर को दूर करने के लिए सरकार ने 60 कुओं की खुदाई लागत का 50% (या अधिकतम ₹675 करोड़ प्रति कुआँ) खुद वहन करने का ऐतिहासिक फैसला किया है।

इस पूरी योजना को चार हिस्सों में बाँटा गया है:

  • डेटा एकत्रीकरण एवं AI तकनीक (₹28,534 करोड़): 2D और 3D सिस्मिक सर्वे के साथ-साथ पुराने डेटा को प्रोसेस करने के लिए आधुनिक AI टूल्स का उपयोग।
  • खुदाई व इंफ्रास्ट्रक्चर (₹55,200 करोड़): 60 खोजी कुओं की ड्रिलिंग, साझा समुद्री इंफ्रास्ट्रक्चर हब और देश में ही उपकरण बनाने के लिए ‘मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन’ का निर्माण।
  • डिजिटल मॉनिटरिंग व सपोर्ट (₹300 करोड़): प्रोजेक्ट की पारदर्शी ट्रैकिंग, प्रशिक्षण और मीडिया आउटरीच।
  • मल्टी-क्लाइंट मॉडल: विदेशी सर्वेक्षण कंपनियों को अपने जोखिम पर डेटा जुटाने और बेचने की छूट, जिससे सरकारी खजाने पर शुरुआती बोझ न पड़े।
प्रमुख मद (Scheme Components)आवंटित बजट (₹ में)मुख्य उद्देश्य
सिस्मिक डेटा व AI विश्लेषण₹28,534 करोड़समुद्र तल का 2D/3D नक्शा तैयार करना
डीप-वॉटर ड्रिलिंग व हब₹55,200 करोड़60 खोजी कुएँ व इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट
निगरानी व प्रशिक्षण₹300 करोड़प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग और डिजिटल ट्रैकिंग
कुल बजट₹84,084 करोड़2030-31 तक पूर्ण निष्पादन

कहाँ छिपी है भारत की ‘काली दौलत’?

84,084 करोड़ का ‘समुद्र मंथन’: ‘समुद्र मंथन’ की सुइयाँ भारत के पूर्वी और पश्चिमी तटों के उन चार प्रमुख नदी बेसिनों पर टिकी हैं, जहाँ सदियों से नदियाँ अपने साथ मिट्टी और तलछट बहाकर जमा करती रही हैं:

  1. कृष्णा गोदावरी (KG) बेसिन: आंध्र प्रदेश तट के पास स्थित यह इलाका पहले से ही गैस उत्पादन का गढ़ है। अब आधुनिक सिस्मिक तकनीक से इसके और गहरे, अनछुए परतों की तलाशी ली जाएगी।
  2. महानदी बेसिन: ओडिशा तट के पास समुद्र में 8 किलोमीटर नीचे तेल-गैस के मजबूत संकेत मिले हैं, जिसे देश का सबसे बड़ा अनछुआ ‘डीप-वॉटर’ संभावित क्षेत्र माना जा रहा है।
  3. बंगाल पूर्णिया बेसिन: पश्चिम बंगाल तट पर 10 किलोमीटर मोटी तलछट की परत मौजूद है, जो प्राचीन हाइड्रोकार्बन भंडारों की मौजूदगी की सबसे प्रबल गवाह है।
  4. कावेरी बेसिन: तमिलनाडु तट के पास समुद्र में 8 किलोमीटर गहराई में जुरासिक युग की कार्बोनेट चट्टानों के भीतर छिपे भंडारों की उम्मीद है।

इन चार नदी बेसिनों के अलावा अंडमान सागर इस मिशन का नया ‘हॉटस्पॉट’ बनकर उभरा है।

अंडमान की भूगर्भीय संरचना म्यांमार और इंडोनेशिया के समृद्ध तेल-गैस क्षेत्रों जैसी है। 5 जून 2026 को ही पेट्रोलियम मंत्रालय ने अंडमान के ‘श्री विजयपुरम-3’ कुएँ (355 मीटर गहरा समुद्र, 1900 मीटर नीचे ड्रिलिंग) में दबाव के साथ प्राकृतिक गैस मिलने की पुष्टि की है।

इससे पहले 2025 में ‘श्री विजयपुरम-2’ में 87% शुद्ध मीथेन मिल चुकी है।

तटों से दूर, राजस्थान के जैसलमेर (डांडेवाला) में भी 950 मीटर की कम गहराई पर 75 मिलियन क्यूबिक मीटर गैस भंडार की नई खोज ने उत्साह को दोगुना कर दिया है।

ONGC का ₹1.5 लाख करोड़ का मेगा-प्लान और अंतिम लक्ष्य

84,084 करोड़ का ‘समुद्र मंथन’: इन शुरुआती सफलताओं को देखते हुए ONGC ने ब्राजील की पेट्रोब्रास, फ्रांस की टोटल-एनर्जीज़ और अमेरिका की एक्सॉन-मोबिल जैसी वैश्विक कंपनियों के साथ मिलकर ₹1.5 लाख करोड़ का विशाल निवेश टेंडर जारी कर दिया है।

एडवांस्ड सिस्मिक जहाजों, सुपरकंप्यूटरों और ध्वनि तरंगों (Sound Waves) की मदद से समुद्र की अतल गहराइयों के पारदर्शी नक्शे बनाए जा रहे हैं।

यदि यह पाँच साल का ‘समुद्र मंथन’ अपने तय लक्ष्यों को हासिल कर लेता है, तो भारत का सालाना तेल-गैस उत्पादन 62 मिलियन मीट्रिक टन से बढ़कर 80 मिलियन मीट्रिक टन पहुँच जाएगा।

देश के हाइड्रोकार्बन भंडार में 600 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक की बढ़ोतरी होगी, जिससे हर साल लगभग ₹1 लाख करोड़ की विदेशी मुद्रा की बचत होगी।

यह योजना केवल तेल निकालने का अभियान नहीं है, बल्कि यह भारत को वैश्विक ऊर्जा बाजार में लाचार खरीदार के बजाय एक आत्मनिर्भर और शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में स्थापित करने का महा-संकल्प है।

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Muskaan Gupta
Muskaan Guptahttps://reportbharathindi.com/
मुस्कान डिजिटल जर्नलिस्ट / कंटेंट क्रिएटर मुस्कान एक डिजिटल जर्नलिस्ट और कंटेंट क्रिएटर हैं, जो न्यूज़ और करंट अफेयर्स की रिपोर्टिंग में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 2 साल का अनुभव है। इस दौरान उन्होंने राजनीति, सामाजिक मुद्दे, प्रशासन, क्राइम, धर्म, फैक्ट चेक और रिसर्च बेस्ड स्टोरीज़ पर लगातार काम किया है। मुस्कान ने जमीनी रिपोर्टिंग के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए प्रभावशाली कंटेंट तैयार किया है। उन्होंने दिल्ली विधानसभा चुनाव और अन्य राजनीतिक घटनाक्रमों की कवरेज की है और जनता की राय को प्राथमिकता देते हुए रिपोर्टिंग की है। वर्तमान में वह डिजिटल मीडिया के लिए न्यूज़ स्टोरीज़, वीडियो स्क्रिप्ट्स और विश्लेषणात्मक कंटेंट पर काम कर रही हैं। इसके साथ ही वे इंटरव्यू, फील्ड रिपोर्टिंग और सोशल मीडिया जर्नलिज़्म में भी दक्ष हैं। मुस्कान का फोकस तथ्यात्मक, प्रभावशाली और जनहित से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने लाने पर रहता है।
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