Saturday, February 14, 2026

सऊदी अरब ने 56000 पाकिस्तानी भिखारियों को निकाला देश से बाहर

सऊदी अरब देशों में पाकिस्तानियों पर सख्ती

पाकिस्तान लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंच पर नकारात्मक गतिविधियों के कारण चर्चा में रहा है। आतंकवाद के अलावा संगठित भीख मांगने और आपराधिक नेटवर्क ने उसकी छवि को और नुकसान पहुंचाया है। अब अरब देशों ने इस प्रवृत्ति पर निर्णायक कार्रवाई शुरू कर दी है।

सऊदी अरब ने हजारों पाकिस्तानियों को निकाला

सऊदी अरब ने संगठित भीख मांगने के आरोपों में अब तक 56,000 पाकिस्तानी नागरिकों को देश से बाहर कर दिया है। केवल इसी वर्ष लगभग 24,000 पाकिस्तानियों को इसी कारण निष्कासित किया गया। सऊदी प्रशासन ने इसे सामाजिक व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बताया है।

यूएई में वीजा प्रतिबंध और निगरानी

संयुक्त अरब अमीरात ने भी पाकिस्तानी नागरिकों पर कड़े वीजा प्रतिबंध लागू कर दिए हैं। दुबई प्रशासन ने आपराधिक गतिविधियों और भीख मांगने के मामलों में करीब 6,000 पाकिस्तानियों को वापस भेजा है। इसके बाद पाकिस्तानी यात्रियों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।

अन्य देशों में भी कार्रवाई

यह समस्या केवल खाड़ी देशों तक सीमित नहीं रही है। अजरबैजान ने लगभग 2,500 पाकिस्तानी भिखारियों को निष्कासित किया है। अफ्रीका और यूरोप की यात्राओं से जुड़े मामलों में भी संगठित भीख मांगने और अवैध गतिविधियों के संकेत सामने आए हैं।

FIA की कार्रवाई और आंकड़े

पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी ने हवाई अड्डों पर 66,154 यात्रियों को उतारा है। यह कार्रवाई संगठित भीख मांगने वाले गिरोहों और अवैध प्रवासन पर रोक लगाने के लिए की गई। एजेंसी लगातार संदिग्ध यात्राओं की जांच कर रही है।

पाकिस्तान की छवि पर सवाल

FIA के डायरेक्टर जनरल रिफत मुख्तार ने कहा कि ऐसे नेटवर्क पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को गंभीर नुकसान पहुंचा रहे हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि टूरिस्ट वीजा का दुरुपयोग कंबोडिया और थाईलैंड जैसे देशों की यात्रा में भी किया गया है।

अंतरराष्ट्रीय दबाव और भविष्य

अरब देशों की सख्ती के बाद पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ता जा रहा है। संगठित भीख मांगने और आपराधिक गतिविधियों के चलते अब कई देश पाकिस्तानी नागरिकों को लेकर सतर्क हो चुके हैं, जिससे पाकिस्तान की वैश्विक स्थिति पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।

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Samudra
Samudra
लेखक 'भारतीय ज्ञान परंपरा' के अध्येता हैं। वे पिछले एक दशक से सार्वजनिक विमर्श पर विश्लेषणात्मक लेखन कर रहे हैं। सांस्कृतिक सन्दर्भ में समाज, राजनीति, विचारधारा, शिक्षा, धर्म और इतिहास के प्रमुख प्रश्नों के रिसर्च बेस्ड प्रस्तुतिकरण और समाधान में वे पारंगत हैं। वे 'द पैम्फलेट' में दो वर्ष कार्य कर चुके हैं। वे विषयों को उनके ऐतिहासिक आधार, वैचारिक पृष्ठभूमि और दीर्घकालीन प्रभाव के स्तर पर परखते हैं। इसी कारण उनके राष्ट्रवादी लेख पाठक को नई दृष्टि और वैचारिक स्पष्टता भी देते हैं। उनके शोधपरक लेख अनेक मौकों पर राष्ट्रीय विमर्श की दिशा में परिवर्तनकारी सिद्ध हुए हैं।
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