प्रेमचंद बैरवा बायोग्राफी: इतिहास हमेशा उन्हीं नामों को नहीं याद रखता जो सबसे ज़्यादा बोले जाते हैं, बल्कि उन लोगों को याद रखता है जिनकी खामोशी में भी गहराई होती है।
कुछ जीवन ऐसे होते हैं जो भीड़ में रहते हुए भी अलग नज़र आते हैं , जहाँ हर चुप्पी के पीछे संघर्ष छिपा होता है और हर कदम के पीछे एक कहानी।
साधारण शुरुआत, असाधारण सोच और समय के साथ गहराती पहचान… यह सफ़र सहज नहीं था, लेकिन प्रभावशाली ज़रूर रहा।
यह कहानी है उस व्यक्ति की, जिसकी पहचान शब्दों से नहीं, कर्मों से बनी है। जी हाँ, हम बात कर रहे हैं प्रेमचंद बैरवा की।
ऐसे ही एक नेता हैं प्रेम चंद बैरवा, जो न केवल राजस्थान के उपमुख्यमंत्री हैं बल्कि हाशिए पर रहने वाले समुदायों के लिए एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व भी हैं।
उनका जीवन संघर्ष, दृढ़ता और जनता के प्रति अटूट समर्पण की कहानी है।
व्यक्तिगत जानकारी:
| पूरा नाम | प्रेम चंद बैरवा |
| आयु (2026 तक) | 57 वर्ष |
| जन्म तिथि | 31 अगस्त 1969 |
| जन्म स्थान | मौजमाबाद (दूदू), जिला जयपुर, राजस्थान |
| शिक्षा | Ph.D. |
| कॉलेज / विश्वविद्यालय | राजस्थान विश्वविद्यालय |
| वर्तमान पद | राजस्थान के उपमुख्यमंत्री |
| व्यवसाय | राजनीतिज्ञ, कृषि |
| राजनीतिक दल | भारतीय जनता पार्टी |
| वैवाहिक स्थिति | विवाहित |
| पिता का नाम | स्वर्गीय श्री रामचंद्र बैरवा |
| माता का नाम | स्वर्गीय श्रीमती सहरू देवी |
| पत्नी का नाम | श्रीमती नारायणी देवी |
| बच्चे | 1 बेटा और 3 बेटियाँ |
| स्थायी पता | मकान नंबर 19, श्रीनिवासपुरा वाया झाग, तहसील मौजमाबाद, जिला दूदू |
| वर्तमान पता | 384, सिविल लाइंस, जयपुर |
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा:
प्रेमचंद बैरवा का जन्म 31 अगस्त 1969 को राजस्थान के जयपुर जिले के श्रीनिवासपुरा गाँव में हुआ।
उनका पालन-पोषण एक दलित किसान परिवार में हुआ, जहाँ मेहनत और ईमानदारी जीवन का हिस्सा थीं। उनके पिता, रामचंद्र बैरवा, ने उन्हें अनुशासन, सत्यनिष्ठा और दूसरों की मदद करने के मूल्यों की शिक्षा दी।
बचपन से ही प्रेमचंद जिज्ञासु और सीखने के प्रति उत्सुक थे। गाँव की कठिन परिस्थितियों ने भी उनकी लगन और दृढ़ता को नहीं हिला पाया।
उन्होंने शिक्षा और व्यक्तिगत विकास को हमेशा प्राथमिकता दी। यही समर्पण और मेहनत उन्हें आगे चलकर एक सफल नेता और समाज सेवा करने वाला व्यक्तित्व बनाने में मददगार साबित हुई।
शिक्षा के क्षेत्र में यात्रा:
शुरुआती कदम: ज़मीन से जुड़ाव
प्रेमचंद बैरवा का जन्म जयपुर के दूदू क्षेत्र के एक छोटे से गाँव में हुआ। उस दौर में ग्रामीण इलाकों में पढ़ाई के संसाधन आज जैसे नहीं थे।
सादगी भरा बचपन: उनकी शुरुआती शिक्षा गाँव के सरकारी स्कूल में हुई।
मेहनत का जज्बा: उन्होंने बचपन से ही देख लिया था कि अगर व्यवस्था बदलनी है, तो खुद को शिक्षित करना सबसे पहला कदम है।
उच्च शिक्षा: “डॉक्टर” बनने का सफर
उनकी शैक्षिक यात्रा में सबसे खास मोड़ तब आया जब उन्होंने राजनीति शास्त्र (Political Science) में अपनी रुचि दिखाई।
ग्रेजुएशन और पोस्ट-ग्रेजुएशन: उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय से अपनी उच्च शिक्षा पूरी की।
पीएचडी (PhD): उन्होंने केवल एम.ए. करके पढ़ाई नहीं छोड़ी, बल्कि पीएचडी की उपाधि हासिल की। यही कारण है कि उनके नाम के आगे ‘डॉक्टर’ लगता है, जो उनकी विद्वता और धैर्य का प्रमाण है।
शिक्षा ने कैसे बदला नजरिया?
प्रेमचंद बैरवा बायोग्राफी: उनकी पढ़ाई ने उन्हें केवल किताबी ज्ञान नहीं दिया, बल्कि समाज के दलित और वंचित वर्गों की समस्याओं को गहराई से समझने की दृष्टि दी।
अनुशासन: एक शोधार्थी (Researcher) के रूप में उन्होंने सीखा कि किसी भी समस्या की जड़ तक कैसे पहुँचा जाता है।
युवाओं के लिए प्रेरणा: आज जब वे शिक्षा विभाग से जुड़े बड़े निर्णय लेते हैं, तो उनके पीछे उनका खुद का वह अनुभव होता है जब वे खुद एक छात्र के रूप में संघर्ष कर रहे थे।
“शिक्षा वो शेरनी का दूध है जो पियेगा वो दहाड़ेगा” बाबासाहेब अंबेडकर की इस बात को प्रेमचंद बैरवा ने अपने जीवन में उतारकर दिखाया है।
संपत्ति विवरण:
श्रेणी विवरण अनुमानित मूल्य
चल संपत्ति (Movable Assets) कैश, बैंक बैलेंस, ज्वेलरी और गाड़ियाँ ₹45 लाख से अधिक
अचल संपत्ति (Immovable Assets) खेती की जमीन, रिहायशी मकान और प्लॉट ₹4.5 करोड़ से अधिक
कुल संपत्ति (Total Assets) चल और अचल संपत्ति का योग ₹5 करोड़ से अधिक
वित्तीय देनदारियां (Liabilities) बैंक लोन या अन्य कर्ज ₹80 लाख से अधिक
मुख्य सफलताएं:
क्षेत्र मुख्य सफलतायें
- शिक्षा शिक्षा को भविष्य के लिए तैयार करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स और 3डी प्रिंटिंग की शुरुआत की गई।
- छात्रवृत्ति बेहतर और त्वरित विदेशी अध्ययन छात्रवृत्तियाँ
- छात्र कल्याण छात्रों की सुरक्षा के लिए कोचिंग सेंटर विनियमन कानून (2025) लाया गया।
- पारंपरिक स्वास्थ्य अजमेर में एक नए आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा विश्वविद्यालय की घोषणा की गई।
- स्वास्थ्य सेवादृष्टि समग्र स्वास्थ्य देखभाल के लिए आयुर्वेद को आधुनिक विज्ञान के साथ बढ़ावा दिया।
- सड़क सुरक्षा भारत की पहली 10 वर्षीय सड़क सुरक्षा कार्य योजना शुरू की गई
- सार्वजनिक परिवहन सुरक्षित यात्रा के लिए वाहन ट्रैकिंग सिस्टम शुरू किए गए।
- परिवहन नीति सार्वजनिक परिवहन को किफायती बनाए रखने के लिए काम किया।
विवाद:
विपक्षी दलों द्वारा लगाए गए आरोप:
प्रेमचंद बैरवा बायोग्राफी: प्रेम चंद बैरवा को कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) जैसी पार्टियों के आरोपों का सामना करना पड़ा है।
ये आरोप अक्सर नीतिगत निर्णयों के बजाय उनके व्यक्तिगत चरित्र को लक्षित करते थे।
सोशल मीडिया पर किए गए दावे:
कई विवाद सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित हुए, लेकिन विपक्षी दलों द्वारा इन दावों को प्रमाणित करने के लिए कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया है।
राजनीतिक प्रतिद्वंद्विताएँ:
कुछ विवाद राजनीतिक प्रतिस्पर्धा से उत्पन्न हुए, खासकर चुनावों के दौरान, जहां प्रतिद्वंद्वियों ने उनकी विश्वसनीयता या लोकप्रियता को चुनौती देने की कोशिश की।
जनता की धारणा को संभालना:
आरोपों के बावजूद, बैरवा ने शासन पर अपना ध्यान केंद्रित रखा है, और नागरिकों के बीच विश्वास बनाने के लिए पारदर्शिता और सार्वजनिक सेवा का उपयोग किया है।
जीवन से जुड़े कुछ रोचक तथ्य :
1 पहले दलित उपमुख्यमंत्री: वे राजस्थान के इतिहास में उपमुख्यमंत्री का पद संभालने वाले पहले दलित नेता हैं।
2 बकरी चराने से उपमुख्यमंत्री तक: डॉ. बैरवा का बचपन बेहद गरीबी में बीता। एक समय था जब वे अपनी पढ़ाई के साथ-साथ परिवार की मदद के लिए बकरियां चराते थे और दूसरों के खेतों में मजदूरी भी करते थे।
3 शिक्षा के प्रति जुनून: तमाम मुश्किलों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई नहीं छोड़ी। उन्होंने न केवल एम.ए. और एल.एल.बी. की, बल्कि राजनीति विज्ञान में पीएचडी (PhD) भी की। इसी कारण उनके नाम के आगे ‘डॉक्टर’ लगता है।
4 राजनीतिक शुरुआत: उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1995 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से एक छात्र नेता के रूप में की थी।
5 एलआईसी (LIC) एजेंट: राजनीति में पूरी तरह सक्रिय होने से पहले उन्होंने 3-4 साल तक एक एलआईसी एजेंट के रूप में भी काम किया था।
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