PM Viksit Bharat Rozgar Yojana: भारत में रोजगार सृजन को नई गति देने और पहली बार नौकरी करने वाले युवाओं को आर्थिक सहारा प्रदान करने के उद्देश्य से 1 अगस्त 2025 को पीएम विकसित भारत रोज़गार योजना की शुरुआत की गई।
₹99,446 करोड़ के बड़े परिव्यय के साथ यह योजना 2025 से 2027 तक लागू की गई है। इसका संचालन श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय द्वारा कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के माध्यम से किया जा रहा है।
यह योजना 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के राष्ट्रीय विज़न के अनुरूप है और समावेशी विकास, औपचारिक रोजगार तथा आर्थिक पुनरुद्धार को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
PM‑VBRY योजना का उद्देश्य
इस योजना का मुख्य उद्देश्य देश में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित करना है। सरकार का लक्ष्य दो वर्षों में 3.5 करोड़ से अधिक नए रोजगार अवसर पैदा करना है, जिनमें लगभग 1.92 करोड़ युवा ऐसे होंगे जो पहली बार नौकरी की दुनिया में प्रवेश करेंगे।
इसके माध्यम से कार्यबल को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है ताकि अधिक से अधिक कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिल सके।
योजना युवाओं को शुरुआती वित्तीय सहायता प्रदान कर उनके करियर की मजबूत शुरुआत सुनिश्चित करती है।
साथ ही, कंपनियों को नए कर्मचारियों की भर्ती के लिए आर्थिक प्रोत्साहन देकर रोजगार सृजन को बढ़ावा दिया जाता है।
योजना में बचत की आदत को प्रोत्साहित करने और विनिर्माण क्षेत्र को विशेष समर्थन देने का भी प्रावधान है, जिससे औद्योगिक विकास को गति मिल सके।
PM‑VBRY योजना के लिए योग्यता
PM Viksit Bharat Rozgar Yojana: इस योजना के अंतर्गत पात्रता को (कर्मचारियों और नियोक्ताओं के लिए) दो भागों में विभाजित किया गया है। कर्मचारियों के लिए आवश्यक है कि वे निजी क्षेत्र में पहली बार नियुक्त हुए हों और उनका EPFO में पंजीकरण हुआ हो।
उनका मासिक वेतन ₹1 लाख तक होना चाहिए और उनकी नियुक्ति 1 अगस्त 2025 से 31 जुलाई 2027 के बीच हुई हो।
वहीं नियोक्ताओं के लिए यह अनिवार्य है कि कंपनी EPFO में पंजीकृत हो तथा अतिरिक्त कर्मचारियों की नियुक्ति करे।
जिन कंपनियों में 50 से कम कर्मचारी हैं, उन्हें कम से कम दो नए कर्मचारी नियुक्त करने होंगे, जबकि 50 या उससे अधिक कर्मचारियों वाली कंपनियों को कम से कम पांच नए कर्मचारियों को नियुक्त करना होगा।
साथ ही, इन कर्मचारियों को कम से कम छह महीने तक कार्यरत रखना आवश्यक है।
योजना की मुख्य विशेषताएं
इस योजना को एक कर्मचारियों के लिए और दूसरा नियोक्ताओं के लिए दो भागों में लागू किया गया है। कर्मचारियों के अंतर्गत पात्र युवाओं को ₹15,000 तक की वित्तीय सहायता दी जाती है, जो उनके एक महीने के EPF वेतन के बराबर होती है।
यह राशि दो किश्तों में दी जाती है, पहली किश्त छह महीने लगातार कार्य करने के बाद और दूसरी किश्त 12 महीने बाद, जब कर्मचारी एक साधारण वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम पूरा कर लेता है।
दूसरी किश्त का एक भाग विशेष बचत खाते में जमा किया जाता है, जिससे युवाओं में बचत की आदत विकसित हो सके।
नियोक्ताओं के लिए सरकार प्रति नए कर्मचारी ₹3,000 प्रतिमाह तक की सहायता प्रदान करती है।
यह लाभ सामान्यतः दो वर्षों तक उपलब्ध रहता है, जबकि विनिर्माण क्षेत्र की कंपनियों को यह सहायता चार वर्षों तक मिल सकती है।
PM‑VBRY योजना की भुगतान प्रणाली
PM Viksit Bharat Rozgar Yojana: इस योजना के अंतर्गत भुगतान प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और सरल बनाया गया है। कर्मचारियों को उनकी प्रोत्साहन राशि सीधे उनके बैंक खाते में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से भेजी जाती है।
आधार ब्रिज भुगतान प्रणाली (ABPS) का उपयोग कर यह सुनिश्चित किया जाता है कि भुगतान सुरक्षित और समय पर हो।
वहीं नियोक्ताओं को दी जाने वाली राशि उनके पैन से जुड़े कंपनी बैंक खाते में सीधे हस्तांतरित की जाती है। इससे किसी प्रकार की मध्यस्थता या देरी की संभावना कम हो जाती है।
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जानें आवेदन प्रक्रिया
इस योजना की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि कर्मचारियों को अलग से आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होती।
जब कोई नया कर्मचारी किसी कंपनी में नियुक्त होता है और उसका EPFO खाता बनाया जाता है, तो प्रणाली स्वतः उसकी पात्रता की जांच कर लेती है।
यदि कर्मचारी पात्र पाया जाता है, तो राशि सीधे उसके बैंक खाते में भेज दी जाती है। इसके लिए केवल यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि कर्मचारी का आधार उसके बैंक खाते से जुड़ा हो।
नियोक्ताओं को लाभ प्राप्त करने के लिए EPFO में पंजीकरण कराना होता है और समय पर इलेक्ट्रॉनिक चालान सह रिटर्न (ECR) दाखिल करना होता है। इसके बाद प्रणाली स्वचालित रूप से प्रोत्साहन की गणना कर राशि हस्तांतरित कर देती है।
योजना का महत्व
प्रधानमंत्री विकसित भारत रोज़गार योजना भारत की आर्थिक संरचना को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
यह औपचारिक रोजगार को बढ़ावा देकर श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करती है और कार्यबल को संगठित क्षेत्र से जोड़ती है।
लाखों नए रोजगार सृजित कर यह योजना युवा बेरोजगारी की समस्या को कम करने में सहायक होगी। साथ ही, कंपनियों को विस्तार और अधिक उत्पादन के लिए प्रोत्साहित कर यह आर्थिक विकास को गति देती है।
बचत को बढ़ावा देने के माध्यम से यह युवाओं को वित्तीय रूप से सशक्त बनाने की दिशा में भी एक प्रभावी कदम है।
यह योजना केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत को आत्मनिर्भर, संगठित और आर्थिक रूप से मजबूत राष्ट्र बनाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जो विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में एक सशक्त आधार तैयार करती है।
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