Saturday, March 14, 2026

नक्सलवाद के अंधकार से मुक्त होता भारत: जनजातीय समाज का भय से विकास तक का सफर

नक्सलवाद के अंधकार से मुक्त होता भारत: भारत आज उस ऐतिहासिक दौर में प्रवेश कर चुका है, जहाँ दशकों पुराना भय, हिंसा और वैचारिक उग्रवाद धीरे-धीरे दम तोड़ रहा है।

नक्सलवाद, जिसे कभी देश की आंतरिक सुरक्षा की सबसे बड़ी चुनौती माना जाता था, अब अपने अंतिम चरण में पहुँचता दिखाई दे रहा है।

यह केवल सुरक्षा बलों की जीत नहीं, बल्कि उस जनजातीय समाज की भी मुक्ति है, जिसे वर्षों तक हिंसा, भ्रम और डर के बीच जीने को मजबूर किया गया।

2014 के बाद बदला भारत का आत्मबोध

नक्सलवाद के अंधकार से मुक्त होता भारत: पिछले एक दशक में भारत ने केवल आर्थिक या सैन्य शक्ति ही नहीं बढ़ाई, बल्कि अपनी सांस्कृतिक और वैचारिक आत्मा को भी पुनः जागृत किया है।

2014 के बाद देश में एक ऐसा नेतृत्व उभरा, जिसने राष्ट्रवाद, संस्कृति और सुशासन को केंद्र में रखकर निर्णय लेने का साहस दिखाया।

इसी कालखंड में यह अनुभूति भी मजबूत हुई कि भारत की वास्तविक स्वतंत्रता मानसिक गुलामी से मुक्ति के साथ आई है।

अधूरी आज़ादी और नक्सलवाद का विष

नक्सलवाद के अंधकार से मुक्त होता भारत: 1947 के बाद मिली स्वतंत्रता के साथ देश को विभाजन की पीड़ा, आतंकवाद और नक्सलवाद जैसी समस्याएँ भी विरासत में मिलीं।

नक्सलवाद ने विशेष रूप से वनवासी और जनजातीय इलाकों में अपने पैर जमाए।

शिक्षा की जगह हथियार, संवाद की जगह हिंसा और विकास की जगह डर ने ले ली। जिन हाथों में किताबें होनी चाहिए थीं, उनमें बंदूकें थमा दी गईं।

सुशासन और निर्णायक नेतृत्व का प्रभाव

नक्सलवाद के अंधकार से मुक्त होता भारत: वर्तमान सरकार ने नक्सलवाद को केवल कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक घाव मानकर उसका इलाज किया।

स्वच्छ भारत, आत्मनिर्भर भारत, अनुच्छेद 370 की समाप्ति, CAA, नई भारतीय न्याय संहिता जैसे फैसलों ने यह स्पष्ट किया कि सरकार केवल सत्ता नहीं, बल्कि व्यवस्था परिवर्तन चाहती है।

इसी क्रम में नक्सलवाद मुक्त भारत का अभियान एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ।

जनजातीय समाज को मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास

नक्सलवाद के अंधकार से मुक्त होता भारत: नक्सलवाद के नाम पर सबसे अधिक पीड़ा वनवासी समाज ने झेली। वर्षों तक जल, जंगल और जमीन से वंचित इस समाज को अब अधिकार और सम्मान मिलने लगा है।

भगवान बिरसा मुंडा को राष्ट्रीय और वैश्विक पहचान देना इसी सोच का प्रतीक है। यह संदेश साफ है कि जनजातीय समाज भारत की आत्मा है, समस्या नहीं।

गृह मंत्री अमित शाह का नक्सलवाद मुक्त भारत संकल्प

नक्सलवाद के अंधकार से मुक्त होता भारत: गृह मंत्री अमित शाह द्वारा शुरू किया गया नक्सलवाद मुक्त भारत अभियान केवल एक सुरक्षा रणनीति नहीं, बल्कि सामाजिक पुनर्निर्माण का प्रयास है।

उन्होंने नक्सल प्रभावित इलाकों में जाकर न केवल सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया, बल्कि स्थानीय लोगों से सीधा संवाद कर उन्हें शिक्षा, रोजगार और विकास की मुख्यधारा से जोड़ा।

आँकड़े जो बदलाव की कहानी कहते हैं

नक्सलवाद के अंधकार से मुक्त होता भारत: गृह मंत्रालय के अनुसार, 2013 में जहाँ लगभग 126 जिले नक्सलवाद से प्रभावित थे, वहीं अब यह संख्या घटकर लगभग 10 रह गई है।

नक्सली हिंसा की घटनाओं में बीते एक दशक में करीब 60 प्रतिशत की कमी आई है। यह गिरावट बताती है कि रणनीति सही दिशा में आगे बढ़ रही है।

सरकार ने 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद के पूर्ण उन्मूलन का लक्ष्य तय किया है।

नक्सली नेतृत्व पर सीधा प्रहार

नक्सलवाद के अंधकार से मुक्त होता भारत: हाल के महीनों में सुरक्षा बलों ने नक्सली संगठनों की रीढ़ तोड़ने का काम किया है।

छत्तीसगढ़ और ओडिशा के जंगलों में मोदम बालकृष्ण, कट्टा रामचंद्र रेड्डी उर्फ उसेंडी, कादरी सत्यनारायण रेड्डी उर्फ कोसा और गणेश उइके जैसे शीर्ष नक्सली कमांडरों को मुठभेड़ों में ढेर किया गया।

इससे नक्सलियों की फील्ड कमांड, हथियार नेटवर्क और मनोबल तीनों पर गहरा आघात पड़ा।

विकास बनाम हिंसा की निर्णायक जीत

बीजापुर, नारायणपुर और अबूझमाड़ जैसे क्षेत्रों में चले अभियानों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब नक्सलवाद के लिए न तो सुरक्षित ठिकाने बचे हैं और न ही वैचारिक संरक्षण।

सरकार ने यह संदेश दे दिया है कि भारत की धरती पर हिंसा और डर की राजनीति के लिए कोई स्थान नहीं है।

भयमुक्त भारत की ओर विश्वासपूर्ण कदम

नक्सलवाद से मुक्ति किसी विचारधारा के खिलाफ अभियान नहीं, बल्कि हिंसा, अराजकता और निरंकुशता के खिलाफ सुशासन का संकल्प है।

आज वही जनजातीय समाज, जिसे कभी नक्सलियों का आधार माना जाता था, अब शिक्षा, रोजगार और विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।

आज भारत उस मोड़ पर खड़ा है, जहाँ नक्सलवाद इतिहास बनने की ओर है। मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति, सुरक्षा बलों का बलिदान और विकास आधारित दृष्टिकोण मिलकर एक भयमुक्त भारत की नींव रख रहे हैं।

यह विश्वास दृढ़ होता जा रहा है कि आने वाले समय में भारत न केवल नक्सलवाद मुक्त होगा, बल्कि एक अधिक सशक्त, समरस और सुरक्षित राष्ट्र के रूप में विश्व के सामने खड़ा होगा।

Personal Opinion

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Muskaan Gupta
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मुस्कान डिजिटल जर्नलिस्ट / कंटेंट क्रिएटर मुस्कान एक डिजिटल जर्नलिस्ट और कंटेंट क्रिएटर हैं, जो न्यूज़ और करंट अफेयर्स की रिपोर्टिंग में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 2 साल का अनुभव है। इस दौरान उन्होंने राजनीति, सामाजिक मुद्दे, प्रशासन, क्राइम, धर्म, फैक्ट चेक और रिसर्च बेस्ड स्टोरीज़ पर लगातार काम किया है। मुस्कान ने जमीनी रिपोर्टिंग के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए प्रभावशाली कंटेंट तैयार किया है। उन्होंने दिल्ली विधानसभा चुनाव और अन्य राजनीतिक घटनाक्रमों की कवरेज की है और जनता की राय को प्राथमिकता देते हुए रिपोर्टिंग की है। वर्तमान में वह डिजिटल मीडिया के लिए न्यूज़ स्टोरीज़, वीडियो स्क्रिप्ट्स और विश्लेषणात्मक कंटेंट पर काम कर रही हैं। इसके साथ ही वे इंटरव्यू, फील्ड रिपोर्टिंग और सोशल मीडिया जर्नलिज़्म में भी दक्ष हैं। मुस्कान का फोकस तथ्यात्मक, प्रभावशाली और जनहित से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने लाने पर रहता है।
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