मुगल शासन की “शानदार” छवि की असलियत आई सामने
कुछ दोगले इतिहासकार मुगलों के शासन को शानदार बताकर उसे सहिष्णुता और समृद्धि का प्रतीक दिखाते रहे हैं। पर इसी इतिहास के भीतर वह सामाजिक सच्चाई भी दर्ज है, जिसमें अनेक हिंदू परिवार जजिया कर और अन्य अत्याचारों से बचने के लिए मजबूर किए गए।

जजिया और दमन से बचाव की रणनीति, नाम बदले, आस्था नहीं
उस दौर में बहुत से हिंदुओं ने सुरक्षा के लिए केवल नाम मुस्लिम रख लिए, जैसे सलीम, इरफान और अन्य नाम, ताकि सत्ता की नजर में वे मुस्लिम माने जाएं। मगर उनका धार्मिक आचरण, पूजा पद्धति और देवी देवताओं की उपासना हिंदू परंपरा के भीतर ही चलती रही।
राजस्थान में एक परिवार का नामांतरण, एफिडेविट के साथ दर्ज तथ्य
राजस्थान में एक पूरे परिवार ने एफिडेविट देकर अपना नाम बदलवाया और प्रमाणित दस्तावेजों में कारण विस्तार से दर्ज कराया। परिवार ने स्पष्ट रूप से लिखा कि मुगल काल के जजिया कर के अत्याचार से बचने के लिए उनके पूर्वजों ने मुस्लिम नाम रखे थे, जबकि हिंदू धर्म का पालन जारी रहा।

चार प्रमाणित दस्तावेज, एक ही परिवार की संयुक्त प्रक्रिया
इस प्रकरण में केवल एक नहीं, बल्कि चार प्रमाणित दस्तावेज दाखिल किए गए हैं। ये सभी भारतीय गैर न्यायिक एक सौ रुपये के स्टाम्प पेपर पर राजस्थान में तैयार हैं और प्रत्येक पर सत्यापन, हस्ताक्षर तथा अटेस्टेशन के संकेत मौजूद हैं, जिससे प्रक्रिया का औपचारिक स्वरूप स्पष्ट होता है।

जोधपुर ओसियां क्षेत्र का विवरण, परिवार का परिचय दर्ज
दस्तावेजों में निवास खाबड़ा कला, तहसील ओसियां, जिला जोधपुर का उल्लेख आता है। पिता की आयु 31 वर्ष, जाति मिरासी और पारिवारिक परिचय के साथ माता पिता के नाम भी दर्ज हैं। इसी पृष्ठभूमि में समुदाय की परंपरागत धार्मिक गतिविधियों का भी उल्लेख किया गया।

मिरासी समुदाय की परंपरा और हिंदू उपासना का निरंतर संदर्भ
परिवार ने मिरासी समुदाय के मुख्य कार्य के रूप में देवी देवताओं का पूजन, भजन गायन और जागरण जैसी परंपराओं का उल्लेख किया है। इसी संदर्भ में यह भी दर्ज है कि नाम अरबी या पारसी शैली में होने के बावजूद उपासना और धार्मिक दिनचर्या हिंदू परंपरा के अनुरूप चलती रही।
जजिया से बचने का कारण, पहचान का भ्रम और सामाजिक दबाव
दस्तावेजी विवरण में यह कारण दर्ज किया गया कि जजिया नहीं दे पाने की स्थिति में परेशानी और दबाव बढ़ता था। इसी से बचने के लिए नाम बदले गए, ताकि जजिया वसूलने वाले अधिकारी उन्हें मुसलमान समझें और जजिया न वसूलें, तथा दमन से बचाव हो सके।
पिता, पत्नी और दो बच्चों के नाम बदले, उम्र सहित दर्ज विवरण
प्रक्रिया में पिता का नाम सलीम पुत्र पुष्कराज से देवेंद्रराज पुत्र पुष्कराज, पत्नी का नाम सहिदा पत्नी सलीम से गौरी कुमारी पत्नी देवेंद्रराज दर्ज किया गया। दो पुत्रों के नाम भी बदले गए, एक की आयु आठ वर्ष और दूसरे की आयु नौ वर्ष दर्ज है।

