Friday, March 13, 2026

मणिपुर में रेप पीड़िता की मौत, 32 महीनों तक झेला शारीरिक और मानसिक पीड़ा

मणिपुर में रेप पीड़िता की मौत: मणिपुर में जातीय हिंसा के शुरुआती दौर के दौरान सामूहिक बलात्कार की शिकार हुई,

कुकी जनजाति की एक युवती ने करीब 32 महीनों तक शारीरिक पीड़ा और मानसिक सदमे से जूझने के बाद गुवाहाटी के एक अस्पताल में अंतिम सांस ली।

यह घटना केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि उस न्याय व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है, जो पीड़ितों को समय पर इंसाफ नहीं दिला पाती।

पीड़िता की मां ने बताया कि घटना के बाद से ही उनकी बेटी का लगातार इलाज चल रहा था। शरीर में फैले संक्रमण और अन्य जटिलताओं के कारण उसे कई बार अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

इलाज के दौरान बढ़ती जटिलताएं

मणिपुर में रेप पीड़िता की मौत: मां के अनुसार, युवती की हालत पिछले कुछ महीनों से और ज्यादा बिगड़ने लगी थी। बार-बार अस्पताल जाना उसकी दिनचर्या बन गया था।

कुछ दिन पहले अचानक घर पर उसकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद परिजन उसे तुरंत गुवाहाटी के अस्पताल लेकर पहुंचे।

डॉक्टरों ने पूरी कोशिश की, लेकिन संक्रमण और शारीरिक कमजोरी के कारण उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।

परिवार का कहना है कि लंबे समय तक चले इलाज ने उसे शारीरिक रूप से तोड़ दिया था, लेकिन मानसिक आघात उससे कहीं ज्यादा गहरा था।

मानसिक सदमा और सामाजिक अलगाव

पीड़िता सिर्फ शारीरिक बीमारी से ही नहीं जूझ रही थी, बल्कि वह गहरे अवसाद का भी शिकार हो चुकी थी। घटना के बाद उसने खुद को समाज से अलग कर लिया था।

वह किसी से ज्यादा बात नहीं करती थी और अक्सर अकेले रहना पसंद करती थी। परिजनों का कहना है कि दर्दनाक यादें उसे चैन से जीने नहीं देती थीं।

हर दिन उसके लिए संघर्ष भरा होता था। मनोचिकित्सकीय इलाज के बावजूद वह मानसिक रूप से सामान्य नहीं हो पाई।

न्याय की इंतजार

कुकी महिला संघ और जनजातीय एकता समिति के प्रवक्ता ने कहा कि पीड़िता ने वर्षों तक हिंसा और अपमान सहा, लेकिन उसे अब तक न्याय नहीं मिला।

उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कब तक पीड़िताएं न्याय की उम्मीद में दम तोड़ती रहेंगी।

संगठनों का कहना है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होने के कारण ऐसी घटनाएं दोहराई जा रही हैं। अगर समय रहते न्याय मिलता तो शायद आज वह युवती जिंदा होती।

सैकड़ों लोग सड़कों पर उतरे

पीड़िता की मौत के बाद मणिपुर के कांगपोकपी और चुराचंदपुर जिलों में लोगों ने मोमबत्ती जलाकर श्रद्धांजलि दी। सैकड़ों लोग सड़कों पर उतरे और न्याय की मांग की।

इंडिजिनस ट्राइबल लीडर्स फोरम ने भी कैंडल मार्च निकालने का ऐलान किया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह सिर्फ एक लड़की की मौत नहीं,

बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है कि हिंसा और अन्याय के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठानी होगी।

सरकार और प्रशासन से सवाल

इस मामले ने राज्य और केंद्र सरकार की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

सामाजिक संगठनों का कहना है कि अगर समय पर सख्त कदम उठाए जाते तो शायद हालात इतने भयावह नहीं होते।

अब मांग की जा रही है कि इस मामले की दोबारा जांच हो और दोषियों को कड़ी सजा मिले।

युवती की मौत ने एक बार फिर साबित कर दिया कि हिंसा के घाव सिर्फ शरीर पर ही नहीं, आत्मा पर भी पड़ते हैं।

उसकी कहानी उन तमाम पीड़ित महिलाओं की आवाज है, जो आज भी न्याय की उम्मीद में जी रही हैं।

समाज और सरकार की जिम्मेदारी है कि ऐसी घटनाओं को दोहराने से रोका जाए और पीड़ितों को समय पर न्याय मिले,

ताकि किसी और जिंदगी को इस तरह बुझने से बचाया जा सके।

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Madhuri
Madhurihttps://reportbharathindi.com/
पत्रकारिता में 6 वर्षों का अनुभव है। पिछले 3 वर्षों से Report Bharat से जुड़ी हुई हैं। इससे पहले Raftaar Media में कंटेंट राइटर और वॉइस ओवर आर्टिस्ट के रूप में कार्य किया। Daily Hunt के साथ रिपोर्टर रहीं और ETV Bharat में एक वर्ष तक कंटेंट एडिटर के तौर पर काम किया। लाइफस्टाइल, इंटरनेशनल और एंटरटेनमेंट न्यूज पर मजबूत पकड़ है।
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