Tuesday, March 3, 2026

पुरुष इनफर्टिलिटी के कारण, भारत में 40% मामलों के लिए पुरुष खुद ही जिम्मेदार

पुरुष इनफर्टिलिटी के कारण: पिछले कुछ वर्षों में भारत में पुरुषों में इनफर्टिलिटी चिंताजनक गति से बढ़ रही है।

लंबे समय तक बांझपन को सिर्फ महिलाओं की समस्या माना जाता रहा, लेकिन अब आंकड़े बताते हैं कि देश में होने वाले कुल इनफर्टिलिटी मामलों में लगभग 40 प्रतिशत जिम्मेदारी पुरुषों की होती है।

महिलाओं से जुड़े कारण भी लगभग इतने ही पाए गए हैं। वहीं लगभग 10 प्रतिशत मामलों में समस्या दोनों पक्षों में मिलती है और 10 प्रतिशत मामले ऐसे हैं जिनकी वजह बिल्कुल साफ नहीं होती।

इस बढ़ते ट्रेंड का असर सीधा फैमिली प्लानिंग कर रहे युवा कपल्स पर दिख रहा है।

स्पर्म काउंट में गिरावट बने बड़ी वजह

पुरुष इनफर्टिलिटी के कारण: पुरुष इनफर्टिलिटी का सबसे प्रमुख कारण घटता हुआ स्पर्म काउंट, मोटिलिटी और मॉर्फोलॉजी है।

2022 की एक वर्ल्ड मेटा-एनालिसिस स्टडी के अनुसार 1973 से 2018 के बीच पुरुषों के स्पर्म कंसंट्रेशन में 51.6 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है।

इस चिंताजनक गिरावट के कारण वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने भी अपने मानक बदलते हुए अब 15 मिलियन स्पर्म प्रति मिलीलीटर को नॉर्मल सीमा की निचली हद माना है, जबकि इससे पहले यह सीमा 40 मिलियन प्रति मिलीलीटर मानी जाती थी।

यह बदलाव बताता है कि पुरुष प्रजनन क्षमता पिछले कई दशकों में लगातार कमजोर होती गई है।

एक्सपर्ट स्पर्म क्वालिटी को सबसे बड़ी चुनौती मानते हैं

पुरुष इनफर्टिलिटी के कारण: विशेषज्ञों का कहना है कि स्पर्म काउंट कम होना ही समस्या नहीं है, बल्कि स्पर्म की क्वालिटी का गिरना और भी बड़ी चुनौती बन चुका है।

उम्र बढ़ने के साथ पुरुषों में भी बायोलॉजिकल क्लॉक असर दिखाता है, जिससे स्पर्म डीएनए की गुणवत्ता में लगातार गिरावट होती है।

इससे भविष्य में जन्म लेने वाले बच्चे के स्वास्थ्य जोखिम भी बढ़ जाते हैं।

देर से पिता बनने की प्रवृत्ति, तनाव, अनियमित जीवनशैली, स्मोकिंग, शराब का सेवन, खराब खान-पान और लंबे कार्य-घंटे, ये सभी आदतें मिलकर स्पर्म को भारी नुकसान पहुंचाती हैं और फर्टिलिटी रेट को तेजी से गिराती हैं।

नई स्टडीज ने प्रदूषण और केमिकल एक्सपोजर को ठहराया जिम्मेदार

पुरुष इनफर्टिलिटी के कारण: हाल के अध्ययनों में यह पाया गया है कि एयर पॉल्यूशन, माइक्रोप्लास्टिक्स, नैनोप्लास्टिक्स और केमिकल एक्सपोजर पुरुषों की प्रजनन क्षमता के गिरने के बड़े कारण बन चुके हैं।

बीपीए, फ्थैलेट्स और कई पेस्टिसाइड्स जैसे केमिकल्स शरीर के प्राकृतिक हॉर्मोन संतुलन को बिगाड़ते हैं और टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम कर देते हैं, जिससे स्पर्म प्रोडक्शन प्रभावित होता है। PM2.5, हेवी मेटल्स और स्मोकिंग में मौजूद फ्री रेडिकल्स स्पर्म डीएनए को नुकसान पहुंचाते हैं।

एम्स की एक स्टडी में पुरुषों के बीच ऐजूस्पर्मिया यानी सैंपल में स्पर्म का बिल्कुल न मिलना और ओएटीएस सिंड्रोम यानी संख्या, गति या आकार का सामान्य से कम होना, पुरुष इनफर्टिलिटी के सबसे आम कारणों में गिने गए हैं।

कब करवानी चाहिए मेडिकल जांच?

पुरुष इनफर्टिलिटी के कारण: एक्सपर्ट्स की सलाह है कि यदि कोई कपल एक साल तक प्रयास करने के बावजूद गर्भधारण नहीं कर पा रहा है, तो पुरुषों को भी तुरंत फर्टिलिटी से जुड़ी जांच करानी चाहिए।

सही रिपोर्टिंग के लिए दो से तीन दिन के अंतर पर तीन अलग-अलग सीमन एनालिसिस कराना जरूरी माना जाता है।

सामान्य स्थिति में 2 एमएल से अधिक सीमन वॉल्यूम, 20 मिलियन प्रति एमएल से अधिक स्पर्म काउंट, 50 प्रतिशत से अधिक मोटिलिटी और 30 प्रतिशत से अधिक नॉर्मल स्पर्म फॉर्म्स को स्वस्थ माना जाता है।

इन मानकों से कम परिणाम समस्या का संकेत हो सकता है।

इनफर्टिलिटी का इलाज कैसे होता है?

पुरुष इनफर्टिलिटी के कारण: यदि समस्या रिप्रोडक्टिव ट्रैक्ट में किसी ब्लॉकेज की है, तो इसे सर्जरी से ठीक किया जा सकता है।

वहीं कई जटिल मामलों में IUI और ICSI जैसी असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी बड़ी मदद साबित हो रही हैं।

इन तकनीकों की मदद से सिर्फ एक स्वस्थ स्पर्म के आधार पर भी पिता बनना संभव हो जाता है।

इलाज का चुनाव पूरी तरह समस्या की प्रकृति और मेडिकल रिपोर्ट्स पर निर्भर करता है।

DISCLAIMER: यह लेख शोध अध्ययनों और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। इसे मेडिकल सलाह के विकल्प के रूप में न लें। किसी भी तरह की दवा, उपचार या नई स्वास्थ्य गतिविधि शुरू करने से पहले डॉक्टर से परामर्श अवश्य करें।

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Muskaan Gupta
Muskaan Guptahttps://reportbharathindi.com/
मुस्कान डिजिटल जर्नलिस्ट / कंटेंट क्रिएटर मुस्कान एक डिजिटल जर्नलिस्ट और कंटेंट क्रिएटर हैं, जो न्यूज़ और करंट अफेयर्स की रिपोर्टिंग में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 2 साल का अनुभव है। इस दौरान उन्होंने राजनीति, सामाजिक मुद्दे, प्रशासन, क्राइम, धर्म, फैक्ट चेक और रिसर्च बेस्ड स्टोरीज़ पर लगातार काम किया है। मुस्कान ने जमीनी रिपोर्टिंग के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए प्रभावशाली कंटेंट तैयार किया है। उन्होंने दिल्ली विधानसभा चुनाव और अन्य राजनीतिक घटनाक्रमों की कवरेज की है और जनता की राय को प्राथमिकता देते हुए रिपोर्टिंग की है। वर्तमान में वह डिजिटल मीडिया के लिए न्यूज़ स्टोरीज़, वीडियो स्क्रिप्ट्स और विश्लेषणात्मक कंटेंट पर काम कर रही हैं। इसके साथ ही वे इंटरव्यू, फील्ड रिपोर्टिंग और सोशल मीडिया जर्नलिज़्म में भी दक्ष हैं। मुस्कान का फोकस तथ्यात्मक, प्रभावशाली और जनहित से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने लाने पर रहता है।
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