Saturday, August 1, 2026

Kulgam Terror Attack: नाम पूछकर हिंदू मजदूरों को मारी गोलियां, पहलगाम जैसा खौफनाक पैटर्न फिर लौटा

Kulgam Terror Attack: जम्मू-कश्मीर की खूबसूरत वादियों में एक बार फिर आतंकवाद ने अपना खौफनाक चेहरा दिखाया है। दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में आतंकियों ने ईंट-भट्ठे पर काम करने वाले दो प्रवासी मजदूरों को उनकी पहचान पूछने के बाद बेहद करीब से गोली मार दी।

इस हमले में छत्तीसगढ़ के दोनों श्रमिकों की जान चली गई। इस दुखद घटना से पूरे इलाके में भय और तनाव का माहौल पैदा हो गया। साथ ही, इसने पिछले वर्ष हुए पहलगाम आतंकी हमले की दर्दनाक यादों को भी एक बार फिर ताजा कर दिया।

शुरुआती जांच में इस हमले के पीछे लश्कर-ए-तैयबा के मुखौटा संगठन द रजिस्टेंस फ्रंट (TRF) का हाथ सामने आया है।

नाम पूछा और फिर बरसा दी गोलियां

Kulgam Terror Attack: जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार रात करीब 8:15 बजे दो हथियारबंद आतंकी कुलगाम के केलम क्षेत्र में स्थित एक ईंट-भट्ठे पर पहुंचे, जहां कई प्रवासी श्रमिक काम कर रहे थे।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आतंकियों ने सबसे पहले वहां मौजूद मजदूरों से उनका नाम और पहचान पूछी।

पहचान सुनिश्चित करने के बाद उन्होंने दो हिंदू मजदूरों को बाकी लोगों से अलग किया और बेहद करीब से उन पर गोलियां चला दीं।

अचानक हुए हमले से मौके पर अफरा-तफरी मच गई। गोलियां लगते ही दोनों मजदूर जमीन पर गिर पड़े। उन्हें मृत समझकर आतंकी मौके से फरार हो गए।

दोनों घायलों को अस्पताल ले जाया गया

Kulgam Terror Attack: हमले के तुरंत बाद साथी मजदूरों और स्थानीय लोगों ने दोनों घायलों को अनंतनाग स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज (GMC) अस्पताल पहुंचाया।

डॉक्टरों ने 24 वर्षीय दीपक रातरे, पुत्र उमा शंकर, को अस्पताल पहुंचते ही मृत घोषित कर दिया। वहीं 28 वर्षीय भूपेंद्र, पुत्र दशरथ, की हालत बेहद गंभीर थी।

उसे बेहतर इलाज के लिए श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SKIMS) रेफर किया गया, लेकिन देर रात उसने भी दम तोड़ दिया। बताया गया कि दीपक के सीने में और भूपेंद्र के पेट में गोलियां लगी थीं।

पहलगाम हमले जैसा पैटर्न

Kulgam Terror Attack: इस घटना ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता इसलिए और बढ़ा दी है क्योंकि हमला ठीक उसी पैटर्न पर किया गया जैसा 2025 के पहलगाम आतंकी हमले में देखने को मिला था।

हमलावरों द्वारा पहले लोगों की पहचान की पुष्टि करना, फिर उन्हें धार्मिक आधार पर अलग करना और उसके बाद नजदीक से गोली चलाना इस बात की ओर संकेत करता है कि हमले का उद्देश्य केवल लोगों की हत्या करना नहीं था।

इस तरह की कार्रवाई का मकसद समाज में धार्मिक तनाव पैदा करना और घाटी में भय तथा असुरक्षा का माहौल फैलाना भी माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की टारगेट किलिंग आतंकियों की सुनियोजित रणनीति का हिस्सा हो सकती है।

TRF ने ली हमले की जिम्मेदारी

Kulgam Terror Attack: हमले के कुछ ही समय बाद लश्कर-ए-तैयबा के सहयोगी संगठन द रजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने इस आतंकी वारदात की जिम्मेदारी लेने का दावा किया।

बताया जा रहा है कि संगठन ने आने वाले दिनों में इसी तरह के और हमले करने की धमकी भी दी है। सुरक्षा एजेंसियां इस दावे की जांच कर रही हैं और आतंकियों के नेटवर्क की पहचान में जुटी हुई हैं।

सुरक्षाबलों का बड़ा ऑपरेशन शुरू

Kulgam Terror Attack: घटना की जानकारी मिलते ही जम्मू-कश्मीर पुलिस, सेना और अन्य सुरक्षा बलों की टीमें तुरंत घटनास्थल पर पहुंचीं गई।

पूरे इलाके की घेराबंदी कर बड़े स्तर पर तलाशी अभियान शुरू किया गया। संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है और इलाके से निकलने वाले सभी रास्तों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

जांच एजेंसियों को संदेह है कि इस हमले में एक स्थानीय और एक विदेशी आतंकी शामिल था। मोहम्मद लतीफ नामक संदिग्ध आतंकी की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

नौ दिन में दूसरा बड़ा टारगेट अटैक

Kulgam Terror Attack: कश्मीर घाटी में हाल के दिनों में यह दूसरा बड़ा लक्षित आतंकी हमला है। इससे पहले 22 जुलाई को अनंतनाग के लाल चौक इलाके में श्री अमरनाथ यात्रा ड्यूटी पर तैनात एक पुलिसकर्मी की आतंकियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। लगातार हो रहे इन हमलों ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

उपराज्यपाल ने लिया हालात का जायजा

Kulgam Terror Attack: जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने घटना के तुरंत बाद पुलिस महानिदेशक नलिन प्रभात और अन्य वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों से बातचीत की।

उन्होंने पूरे मामले की विस्तृत जानकारी ली और आतंकियों को जल्द से जल्द पकड़ने के निर्देश दिए। साथ ही सुरक्षा बलों को हर आवश्यक कार्रवाई करने के लिए कहा गया ताकि इस तरह की घटनाओं को बार-बार होने से रोका जा सके।

राजनीतिक दलों ने की कड़ी निंदा

Kulgam Terror Attack: इस आतंकी हमले की विभिन्न राजनीतिक दलों ने भी कड़े शब्दों में निंदा की है। जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (JKPCC) के मुख्य प्रवक्ता रविंदर शर्मा ने कहा कि निर्दोष लोगों की हत्या किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार नहीं की जा सकती।

उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि ऐसे नापाक मंसूबों को हर हाल में विफल किया जाना चाहिए।

घाटी में फिर गहराया डर का माहौल

Kulgam Terror Attack: कुलगाम की यह घटना केवल दो मजदूरों की हत्या भर नहीं है, बल्कि यह उस चुनौती की याद दिलाती है जिससे जम्मू-कश्मीर लंबे समय से जूझ रहा है।

प्रवासी मजदूर, जो अपने परिवार का पेट पालने के लिए सैकड़ों किलोमीटर दूर आकर मेहनत करते हैं, यदि उनकी पहचान के आधार पर उन्हें निशाना बनाया जाए तो यह पूरे समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

सुरक्षा एजेंसियों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती न केवल हमलावरों को जल्द गिरफ्तार करना है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि घाटी में काम करने वाले आम नागरिक और प्रवासी श्रमिक खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें।

कुलगाम की यह दर्दनाक घटना एक बार फिर यह संदेश देती है कि आतंकवाद के खिलाफ सतर्कता, सख्त सुरक्षा व्यवस्था और तेज कार्रवाई पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गई है।

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