खालिस्तानियों ने भारतीय दूतावास में की घुसपैठ: खालिस्तानी तत्वों ने क्रोएशिया की राजधानी ज़ाग्रेब स्थित भारतीय दूतावास में घुसपैठ कर भारत का राष्ट्रीय ध्वज उतार दिया और उसकी जगह खालिस्तानी झंडा फहरा दिया।
आधी रात को अंजाम दी गई इस घटना में दूतावास परिसर और चारदीवारी को निशाना बनाया गया।
दीवारों और साइनबोर्ड पर स्प्रे पेंट से “खालिस्तान जिंदाबाद, हिंदुस्तान मुर्दाबाद” जैसे भड़काऊ नारे लिखे गए।
इसके साथ ही “26/01” भी अंकित किया गया, जिसे भारत के गणतंत्र दिवस पर संभावित हमले की धमकी के रूप में देखा जा रहा है।
40 साल में पहली बड़ी घटना
खालिस्तानियों ने भारतीय दूतावास में की घुसपैठ: तस्वीरों और वीडियो फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि अंधेरे का फायदा उठाकर भारतीय तिरंगे को उतारा गया और खालिस्तानी ध्वज लगाया गया।
क्रोएशिया में पिछले 40 वर्षों से अधिक समय में किसी भारतीय राजनयिक मिशन के खिलाफ इस तरह की यह पहली गंभीर घटना बताई जा रही है।
इसने न केवल दूतावासों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यूरोप में सक्रिय खालिस्तानी नेटवर्क को लेकर भी नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।
SFJ ने ली जिम्मेदारी, पन्नू का भड़काऊ बयान
इस घटना की जिम्मेदारी भारत में प्रतिबंधित खालिस्तान समर्थक संगठन सिख्स फॉर जस्टिस (SFJ) ने ली है।
संगठन के प्रमुख और भारत द्वारा आतंकवादी घोषित गुरपतवंत सिंह पन्नू ने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो संदेश में इसे “26-26 लक्ष्य” अभियान का हिस्सा बताया।
पन्नू ने दावा किया कि यह यूरोपीय धरती से सिखों के तथाकथित आत्मनिर्णय का “राजनीतिक संदेश” है।
उसने 1984 के ऑपरेशन ब्लूस्टार का उल्लेख करते हुए भड़काऊ बयान दिए और कहा कि भविष्य में “पंजाब को भारतीय कब्जे से मुक्त कराने” के बाद
भारतीय दूतावासों को “खालिस्तान के लोकतांत्रिक गणराज्य” के दूतावासों में बदला जाएगा।
भारत का कड़ा रुख और कूटनीतिक कार्रवाई
भारत के विदेश मंत्रालय ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। मंत्रालय ने इसे भारत विरोधी तत्वों द्वारा किया गया अवैध और निंदनीय कृत्य बताया।
नई दिल्ली और ज़ाग्रेब दोनों स्थानों पर क्रोएशियाई अधिकारियों के समक्ष यह मामला जोरदार तरीके से उठाया गया है।
भारत ने दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
भारतीय दूतावास ने भी कहा है कि इस तरह की घटनाएं इन तत्वों के इरादों को उजागर करती हैं और वैश्विक कानून प्रवर्तन एजेंसियों को इस पर गंभीर ध्यान देना चाहिए।
यूरोप में बढ़ती खालिस्तानी गतिविधियां
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना इस बात का संकेत है कि खालिस्तानी संगठन अब उन देशों में भी अपनी गतिविधियां बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं,
जहां पहले उनकी मौजूदगी के स्पष्ट संकेत नहीं थे। यह घटनाक्रम ऐसे समय पर सामने आया है जब भारत यूरोपीय देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत कर रहा है।
यूरोपीय संघ के साथ संभावित ऐतिहासिक व्यापार समझौते और सुरक्षा व रक्षा सहयोग की दिशा में बातचीत चल रही है।
कूटनीतिक और सुरक्षा चुनौती
क्रोएशिया के यूरोपीय संघ और नाटो का सदस्य होने के कारण इस घटना का महत्व और बढ़ जाता है।
ज़ाग्रेब स्थित भारतीय दूतावास पर हमला केवल एक इमारत पर किया गया हमला नहीं है, बल्कि यह भारत की संप्रभुता और कूटनीतिक प्रतिष्ठा को चुनौती देने की कोशिश है।
इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत विरोधी नेटवर्क के खिलाफ सख्त और समन्वित कार्रवाई की जरूरत को एक बार फिर रेखांकित कर दिया है।

