Tuesday, April 14, 2026

इज़राइल और लेबनान के बीच तीन दशक बाद सीधी वार्ता

इज़राइल और लेबनान

तीस से अधिक वर्षों के अंतराल के बाद इज़राइल और लेबनान के बीच मंगलवार को पहली बार सीधी राजनयिक वार्ता आयोजित की गई। यह बैठक वाशिंगटन डी.सी. स्थित अमेरिकी विदेश विभाग में हुई, जिसमें दोनों देशों के अमेरिका में तैनात राजदूत शामिल हुए।

इस वार्ता का उद्देश्य इज़राइल और ईरान समर्थित लेबनानी सशस्त्र संगठन हिज़्बुल्लाह के बीच चल रहे संघर्ष को सुलझाने के लिए भविष्य की बातचीत का ढांचा तैयार करना है। अधिकारियों के अनुसार यह वार्ता प्रारंभिक प्रकृति की है और इससे कोई बड़ी सफलता मिलने की उम्मीद नहीं है।

छह सप्ताह में दो हज़ार से अधिक मौतें

पिछले छह सप्ताहों में लेबनान में इज़राइली हमलों में दो हज़ार से अधिक लोग मारे गए हैं। यह आंकड़ा लेबनानी स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा जारी किया गया है। हिज़्बुल्लाह ने भी इज़राइल पर हमले किए हैं, जिनमें कम से कम बारह इज़राइली सैनिक और दो नागरिक मारे गए।

इज़राइल ने दक्षिणी लेबनान में सैन्य घुसपैठ की, जिसमें लेबनानी अधिकारियों के अनुसार चालीस हज़ार घर तबाह हो गए। इस आक्रमण में इज़राइली सेना ने हिज़्बुल्लाह के सदस्यों के साथ आम नागरिकों को भी निशाना बनाया।

नेतन्याहू और रक्षा मंत्री की लेबनान यात्रा

इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और रक्षा मंत्री इज़राइल काट्ज़ सप्ताहांत में लेबनान में तैनात अपनी सेना के पास पहुंचे। काट्ज़ ने वहां कहा कि इज़राइल इस खतरे को उसी तरह समाप्त करेगा जैसा उसने गाज़ा में किया था, और इसमें घरों को ध्वस्त करना भी शामिल है ताकि वे आतंकी ठिकाने न बन सकें।

युद्धविराम और निरस्त्रीकरण पर गतिरोध

लेबनान चाहता है कि पहले युद्धविराम हो, जबकि इज़राइल की शर्त है कि लेबनान पहले हिज़्बुल्लाह के निरस्त्रीकरण की दिशा में ठोस कदम उठाए। इज़राइल दक्षिणी लेबनान में दीर्घकालिक कब्जे की तैयारी में है ताकि हिज़्बुल्लाह को उसकी सीमा से दूर रखा जा सके।

दोनों देशों के बीच कोई औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं। यह वार्ता अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के अस्थायी युद्धविराम के बीच हो रही है। लेबनान में इज़राइल के हिज़्बुल्लाह पर हमले जारी रहने से यह नाज़ुक समझौता भी खतरे में है।

हिज़्बुल्लाह का विरोध

हिज़्बुल्लाह ने इस वार्ता का पुरज़ोर विरोध किया है और लेबनानी सरकार से इसे रद्द करने की मांग की है। संगठन के नेता नईम कासिम ने सोमवार को एक प्रसारित भाषण में इन वार्ताओं को निरर्थक बताया और कहा कि बिना आंतरिक सहमति के लेबनान को इस रास्ते पर ले जाने का किसी को अधिकार नहीं है।

इज़राइल और हिज़्बुल्लाह के बीच मंगलवार तक भी गोलाबारी जारी रही। इज़राइल ने सीमावर्ती गांवों पर हमले किए और कहा कि वह इन क्षेत्रों पर कब्जा कर एक “सुरक्षा क्षेत्र” बना रहा है ताकि हिज़्बुल्लाह की सीमापार रॉकेट दागने की क्षमता खत्म हो सके।

एक ही दिन में साढ़े तीन सौ मौतें

लेबनानी अधिकारियों के अनुसार पिछले छह सप्ताहों में दो हज़ार से अधिक लोग इज़राइली हमलों में मारे गए, जिनमें से पिछले सप्ताह एक ही दिन में साढ़े तीन सौ से अधिक लोगों की जान गई। मध्य बेरूत पर इज़राइल ने दस मिनट में सौ बार हमले किए।

हिज़्बुल्लाह उत्तरी इज़राइल पर रोज़ाना रॉकेट दाग रहा है और दक्षिणी लेबनान में घुसपैठ कर रही इज़राइली सेना का सामना कर रहा है।

हिज़्बुल्लाह के निरस्त्रीकरण पर इज़राइल की कड़ी शर्त

इज़राइल की स्पष्ट मांग है कि हिज़्बुल्लाह के निरस्त्रीकरण की ठोस योजना के बिना कोई समझौता संभव नहीं है। लेकिन इस मामले में लेबनानी सरकार का हिज़्बुल्लाह पर कितना प्रभाव है, यह अस्पष्ट बना हुआ है।

हिज़्बुल्लाह लेबनान की संसद में सीटें रखने वाला एक प्रमुख राजनीतिक दल भी है। साथ ही यह एक ऐसा सशस्त्र संगठन है जो लेबनानी सरकार से काफी हद तक स्वतंत्र रूप से काम करता है और ईरान से वित्तीय सहायता तथा निर्देश प्राप्त करता है।

इज़राइल पर भरोसे का संकट

इज़राइल लंबे समय से हिज़्बुल्लाह से हथियार छोड़ने की मांग करता रहा है, लेकिन संगठन ने उल्टा अपने शस्त्रागार को और मज़बूत किया है। लेबनान की जनता में इज़राइल की नीयत को लेकर गहरा अविश्वास है।

वर्ष 2024 में इज़राइल और लेबनान के बीच एक युद्धविराम हुआ था, जो इस साल दो मार्च तक लागू था। उस दौरान संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षकों ने उस समझौते के दस हज़ार से अधिक उल्लंघन दर्ज किए, जिनमें से लगभग सभी इज़राइल की ओर से हुए।

बेरूत में उम्मीदें धूमिल

मंगलवार को बेरूत में इन वार्ताओं को लेकर लोगों की उम्मीदें बेहद कम थीं। शहर के मध्य में एक ध्वस्त इमारत के मलबे के पास खड़े सैंतीस वर्षीय अली अब्बौद अपनी बहन के शव का इंतज़ार कर रहे थे। उनका कहना था कि इज़राइल और लेबनान के बीच कभी शांति नहीं होगी, और इस त्रासदी ने उनकी इस भावना को और पक्का कर दिया है।

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Mudit
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लेखक भारतीय ज्ञान परंपरा के अध्येता हैं। वे पिछले एक दशक से सार्वजनिक विमर्श पर लेखन कर रहे हैं। समाज, राजनीति, विचारधारा, शिक्षा, धर्म और इतिहास पर रिसर्च बेस्ड विश्लेषण में वे पारंगत हैं। वे 'द पैम्फलेट' में दो वर्ष कार्य कर चुके हैं। उनके शोधपरक लेख अनेक मौकों पर राष्ट्रीय विमर्श की दिशा में परिवर्तनकारी सिद्ध हुए हैं।
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