ईरान में खामनेई की सत्ता खतरे में: ईरान इन दिनों गंभीर राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है।
देशभर में सरकार विरोधी प्रदर्शन तेज हो गए हैं और आम लोग सड़कों पर उतरकर सर्वोच्च नेता सैयद अली हुसैनी खामेनेई के नेतृत्व वाली इस्लामी सरकार के खिलाफ खुलकर आवाज बुलंद कर रहे हैं।
इन प्रदर्शनों की मुख्य वजह बढ़ती महंगाई, कमजोर होती अर्थव्यवस्था और सुरक्षा बलों द्वारा की जा रही सख्त तथा दमनकारी कार्रवाई बताई जा रही है।
हालात ऐसे बन चुके हैं कि जनता का आक्रोश अब खुलकर सामने आ रहा है।
तेहरान में इंटरनेट बंद
8 जनवरी की रात हालात और ज्यादा बिगड़ गए। राजधानी तेहरान समेत कई बड़े शहरों में विरोध प्रदर्शन अचानक तेज हो गए।
हालात को काबू में करने के लिए राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के नेतृत्व वाली सरकार ने इंटरनेट सेवाएं और अंतरराष्ट्रीय टेलीफोन कॉल अस्थायी रूप से बंद कर दीं।
सरकार का मानना था कि सोशल मीडिया और विदेशी संपर्कों के जरिए प्रदर्शनकारियों को संगठित किया जा रहा है, इसलिए इन सुविधाओं पर रोक लगाना जरूरी समझा गया।
42 लोगों की हुई मौत
ईरान की न्यायपालिका और सुरक्षा बलों के प्रमुखों ने भी कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने आजादी और ‘आजादी-आजादी’ के नारों के बीच प्रदर्शन कर रहे लोगों को सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था भंग करने वालों के खिलाफ कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।
इसी बीच हिंसक झड़पों में अब तक 42 लोगों की मौत की खबर सामने आई है, जिससे हालात की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
इन प्रदर्शनों को और हवा उस समय मिली, जब ईरान के पूर्व युवराज रजा पहलवी ने जनता से खुलकर सड़कों पर उतरने का आह्वान किया।
उन्होंने गुरुवार और शुक्रवार की रात स्थानीय समय के अनुसार ठीक 8 बजे विरोध प्रदर्शन करने की अपील की थी।
रजा पहलवी ईरान के आखिरी शाह मोहम्मद रजा पहलवी के बेटे हैं। उनके पिता 1979 की इस्लामी क्रांति से कुछ समय पहले देश छोड़कर भाग गए थे और तब से पहलवी परिवार निर्वासन में रह रहा है।
भीड़ ने लगाएं तानाशाह मुर्दाबाद के नारे
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक जैसे ही घड़ी में रात के 8 बजे, तेहरान के कई इलाकों में एक साथ नारेबाजी शुरू हो गई।
लोग अपने घरों की छतों से और सड़कों पर उतरकर सरकार विरोधी नारे लगाने लगे। इनमें कई प्रदर्शनकारी ऐसे भी थे, जो रजा पहलवी के आह्वान का पालन करते नजर आए।
भीड़ में “तानाशाह मुर्दाबाद” और “इस्लामी गणराज्य मुर्दाबाद” जैसे नारे गूंजते रहे।
कुछ लोगों ने यहां तक कहा कि “यह आखिरी लड़ाई है” और “पहलवी वापस लौटेगा”, जिससे यह साफ जाहिर होता है कि कुछ तबकों में अब भी राजशाही की वापसी को लेकर भावनाएं मौजूद हैं।
ईरान के लगभग हर बड़े शहर और कई ग्रामीण कस्बों में ये विरोध प्रदर्शन फैल चुके हैं। गुरुवार को भी हालात शांत नहीं हुए।
प्रदर्शनकारियों के समर्थन में कई बाजार और दुकानें बंद रहीं, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ। व्यापारियों का कहना है कि वे जनता के साथ हैं और सरकार की नीतियों से नाराज हैं।
अमेरिका स्थित मानवाधिकार कार्यकर्ता समाचार एजेंसी के अनुसार, अब तक इन प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा में कम से कम 42 लोगों की मौत हो चुकी है।
इसके अलावा करीब 2,270 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है। हिरासत में लिए गए लोगों के परिवारों में डर और चिंता का माहौल है।
कुल मिलाकर, ईरान में मौजूदा हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। जनता आर्थिक बदहाली और सरकारी दमन से परेशान होकर खुलकर विरोध कर रही है,
जबकि सरकार सख्ती के जरिए हालात पर काबू पाने की कोशिश कर रही है। आने वाले दिनों में यह आंदोलन किस दिशा में जाएगा, इस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।

