ईरान इजरायल युद्ध 2026: ईरान और इजरायल के बीच जारी ‘शैडो वॉर’ अब तक के सबसे खतरनाक मोड़ पर पहुँच चुकी है। हालिया रिपोर्ट्स में जो खुलासे हुए हैं, वे किसी हॉलीवुड की जासूसी थ्रिलर फिल्म से कम नहीं हैं।
इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद ने जिस तरह से ईरान की सुरक्षा व्यवस्था में सेंध लगाई, उसने पूरी दुनिया के रक्षा विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है।
तेहरान का ट्रैफिक सिस्टम बना इजरायल की आंखें
ईरान इजरायल युद्ध 2026: इजरायल की रणनीति की शुरुआत ईरान की राजधानी तेहरान की सड़कों से हुई। रिपोर्ट के अनुसार, मोसाद ने तेहरान के ट्रैफिक कैमरा नेटवर्क को पूरी तरह हैक कर लिया था। इजरायली हैकर्स ने डेटा को एनक्रिप्ट कर सीधे अपने सर्वर से जोड़ दिया था।
इसका नतीजा यह हुआ कि खामेनेई का काफिला कब निकला, किस रास्ते पर है और उनके बॉडीगार्ड्स की पोजीशन क्या है, इसकी लाइव फीड तेल अवीव में बैठे अधिकारियों को मिल रही थी।
फोन नेटवर्क में सेंध
ईरान इजरायल युद्ध 2026: सिर्फ कैमरे ही नहीं, इजरायल ने ईरान के मोबाइल फोन इंफ्रास्ट्रक्चर में भी गहरी पैठ बना ली थी। खामेनेई के करीबी अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों के फोन ट्रैक किए जा रहे थे।
इससे इजरायल को यह तक पता चल गया कि कौन से अधिकारी किस समय मीटिंग के लिए जुटने वाले हैं। ईरान की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली जगहों की जानकारी डिजिटल तरीके से चोरी कर ली गई थी।
रात के बजाय सुबह का चुनाव
आमतौर पर ऐसे बड़े सैन्य ऑपरेशन रात के अंधेरे में किए जाते हैं, लेकिन इजरायल ने मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल करने के लिए सुबह 6 बजे का समय चुना। जब तेहरान के सुरक्षा घेरे को लगा कि रात का खतरा टल गया है, ठीक उसी वक्त इजरायली फाइटर जेट्स ने हमला बोला।
महज 60 सेकंड के भीतर तीन सटीक मिसाइल हमले किए गए, जिन्होंने पूरे कंपाउंड को मलबे में तब्दील कर दिया।
अमेरिका का साथ और जासूसों का जाल
इस पूरे ऑपरेशन में इजरायल को अमेरिकी इंटेलिजेंस का भी भरपूर साथ मिला। रिपोर्ट की मानें तो जमीन पर मौजूद एक ‘ह्यूमन इंटेलिजेंस’ (जासूस) ने जैसे ही सिग्नल दिया, वैसे ही अमेरिका और इजरायल ने इस कोऑर्डिनेटेड हमले को अंजाम दे दिया।
मोसाद की तैयारी इतनी पुख्ता थी कि उन्हें टॉप कमांडो के निजी वाहनों की पार्किंग तक की सटीक लोकेशन मालूम थी।
मोसाद ने इस ऑपरेशन के लिए उन्हीं तकनीकों का इस्तेमाल किया जो पहले हिजबुल्लाह के खिलाफ ‘पेजर अटैक’ में देखी गई थीं, जैसे फर्जी यूट्यूब विज्ञापन और शेल कंपनियों के जरिए सप्लाई चेन में घुसपैठ करना।
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