Friday, March 13, 2026

भारत की अंतरिक्ष निगरानी: तैयारियां तेज, बॉडीगार्ड सैटेलाइट्स तैनात होंगे

भारत की अंतरिक्ष निगरानी: भारत अब अपनी अंतरिक्ष सुरक्षा रणनीति में एक बड़ा कदम आगे बढ़ा रहा है।

रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में बदलती वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए हमारी सेना और अंतरिक्ष एजेंसियां अब एक नई दिशा की ओर आगे बढ़ने वाली हैं।

इस दिशा का मुख्य लक्ष्य अंतरिक्ष से सर्विलांस (निरीक्षण) और सुरक्षा को मजबूत करना है, ताकि देश की सीमाएं, रक्षा संरचनाएं और साइबर स्पेस अधिक सुरक्षित रहें।

ब्लूमबर्ग के सूत्रों के अनुसार, इस तैयारी को तब तेजी मिली जब 2024 के मध्य में एक पड़ोसी देश का सैटेलाइट इसरो के सैटेलाइट के सिर्फ 1 किलोमीटर पास से गुजर गया था।

क्या है बॉडीगार्ड सैटेलाइट

भारत की अंतरिक्ष निगरानी: बॉडीगार्ड सैटेलाइट भारत द्वारा अपने महत्वपूर्ण उपग्रहों को अंतरिक्ष में दुश्मन देशों के खतरों से बचाने के लिए विकसित किए जा रहे निगरानी उपग्रह हैं,

जो S-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली की तरह काम करते हैं। इनका लक्ष्य भारतीय अंतरिक्ष संपत्तियों की सुरक्षा करना है। ये 50 ऐसे सैटेलाइट्स की एक श्रृंखला का हिस्सा हैं, जिन्हें इसरो (ISRO) बना रहा है।

इन उपग्रहों का मुख्य काम होगा:

एक उपग्रह से दूसरे उपग्रह को डेटा भेजना, जिससे सूचना का आदान-प्रदान अधिक तेज और सुरक्षित होगा।

रक्षा बलों को किसी भी तरह की गतिविधि की वास्तविक समय (रियल टाइम) जानकारी उपलब्ध कराना।

सीमा पर प्रतिद्वंद्वी देशों की सैन्य या तकनीकी गतिविधियों पर निगरानी रखना।

इन उपग्रहों को इसलिए बॉडीगार्ड कहा गया है क्योंकि ये मानो अंतरिक्ष में भारत के सुरक्षा गार्ड की तरह काम करेंगे—हमेशा सतर्क और जागरूक।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद योजना को लागू करने में तेजी

7 से 10 मई 2025 के बीच ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने जैश-ए-मोहम्मद के खिलाफ भारी सैन्य कार्रवाई की थी।

इकोनॉमिक टाइम्स (ET) की रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान देसी सैटेलाइट्स और कुछ विदेशी कॉमर्शियल डेटा का इस्तेमाल किया गया, लेकिन रियल टाइम ट्रैकिंग में कई खामियां उजागर हुईं।

ET को एक अधिकारी ने बताया, “हमें अपने फैसलों की गति तेज करनी होगी। जितनी जल्दी हम 52 सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में स्थापित करेंगे, हमारी सुरक्षा उतनी ही मजबूत होगी।”

भारत की योजना

सरकार ने तय किया है कि 2029 तक 52 विशेष रक्षा सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजे जाएंगे। ये सभी सैटेलाइट अंतरिक्ष में भारत की आंख बनेंगे और पाकिस्तान-चीन बॉर्डर पर लगातार नजर रखेंगे।

तकनीकी विकास के तहत ISRO निजी भारतीय कंपनियों और स्टार्टअप्स के साथ मिलकर नई तकनीक, जैसे LiDAR (लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग) तकनीक विकसित कर रहा है, ताकि खतरों का तेजी से पता लगाया जा सके।

ये सैटेलाइट्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित होंगे।

36 हजार किलोमीटर की ऊंचाई पर ये आपस में कम्युनिकेट कर सकेंगे, जिससे पृथ्वी तक सिग्नल भेजने और मैसेज व तस्वीरें ट्रांसफर करने में आसानी होगी।

दुश्मनों के लिए चुनौती, भारत के लिए ताकत

समाचार के अनुसार, यह नई प्रणाली ऐसी तकनीकी तैयारियों पर आधारित है, जिससे विरोधी देश:

भारत की वास्तविक सैन्य क्षमता को भांप नहीं पाएंगे।

लक्ष्य निर्धारण और निर्णय क्षमता में बाधा नहीं डाल पाएंगे।

यह रणनीति समय की आवश्यकता है, क्योंकि आज के बदलते युद्ध और सीमा विवादों में सूचना की ताजगी और सटीकता जीवन और देश की सुरक्षा के लिए बेहद अहम होती है।

भारतीय वायुसेना की भूमिका और सोच

भारतीय वायुसेना प्रमुख (एयर चीफ मार्शल) ने इस कदम को देश की रक्षा की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण बताया है।

उनका मानना है कि भविष्य की युद्ध क्षमता तकनीक, जानकारी और वास्तविक समय डेटा पर निर्भर करेगी,

इसलिए समय रहते नई तकनीक को अपनाना जरूरी है।

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Madhuri
Madhurihttps://reportbharathindi.com/
पत्रकारिता में 6 वर्षों का अनुभव है। पिछले 3 वर्षों से Report Bharat से जुड़ी हुई हैं। इससे पहले Raftaar Media में कंटेंट राइटर और वॉइस ओवर आर्टिस्ट के रूप में कार्य किया। Daily Hunt के साथ रिपोर्टर रहीं और ETV Bharat में एक वर्ष तक कंटेंट एडिटर के तौर पर काम किया। लाइफस्टाइल, इंटरनेशनल और एंटरटेनमेंट न्यूज पर मजबूत पकड़ है।
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