Thursday, February 26, 2026

Holi 2026: होली खेलने के बाद क्यों आती है नींद, जानें कारण

Holi 2026: होली खुशियों, रंगों और मेल-मिलाप का त्योहार है। सुबह से ही उत्साह चरम पर होता है। गुलाल उड़ता है, ढोल बजते हैं, पकवानों की खुशबू घर-घर फैलती है।

लेकिन अक्सर रंग खेलने के बाद लोगों को सिर भारी लगना, ज्यादा भूख लगना, नींद आना या पूरे शरीर में थकान महसूस होना जैसी समस्याएं होती हैं।

कई लोग इसे रंगों का नशा कहकर टाल देते हैं, जबकि इसके पीछे वैज्ञानिक कारण छिपे हो सकते हैं। आइए समझते हैं कि ऐसा क्यों होता है और इससे कैसे बचा जा सकता है।

क्यों होता है रंग खेलने के बाद नशे जैसा एहसास?

होली के दौरान हम चेहरे, बालों और शरीर पर खूब रंग लगाते हैं। कई बार रंग मुंह, नाक, कान और त्वचा के रोमछिद्रों के जरिए शरीर में प्रवेश कर जाते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार बाजार में मिलने वाले कुछ कृत्रिम रंगों में लेड, मरकरी और कैडमियम जैसे भारी धातु (हेवी मेटल्स) पाए जा सकते हैं।

ये तत्व शरीर पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। इनके संपर्क में आने से सिर में भारीपन, चक्कर जैसा एहसास, अधिक भूख लगना और असामान्य नींद आना जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

इसके अलावा रंग खेलते समय दौड़ना, नाचना, पानी फेंकना जैसी शारीरिक गतिविधियां भी काफी ऊर्जा खर्च करती है। ऐसे में शरीर थकान का संकेत देता है, जिसे कई लोग नशा समझ लेते हैं।

मिलावटी रंगों के नुकसान | Side Effects of Chemical Holi Colors

विशेषज्ञों के अनुसार, मिलावट वाले और केमिकलयुक्त रंग त्वचा और स्वास्थ्य दोनों के लिए हानिकारक हो सकते हैं।

इनके कारण त्वचा में जलन, खुजली, रैशेज और एलर्जी हो सकती है। कई बार सिरदर्द या सिर में भारीपन भी महसूस होता है।

यदि रंगों के कण सांस के जरिए फेफड़ों में चले जाएं तो एलर्जी या सांस संबंधी समस्या हो सकती है।

लंबे समय तक हानिकारक रसायनों के संपर्क में रहना किडनी और लिवर पर भी असर डाल सकता है। इसलिए रंगों का चयन करते समय सावधानी बेहद जरूरी है।

होली के बाद सुस्ती के कारण

होली के दिन घंटों धूप में रहना, ज्यादा दौड़-भाग करना और पानी में खेलना शरीर से पसीने के रूप में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स (जैसे सोडियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम) की कमी कर देता है।

इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन के कारण मांसपेशियों में कमजोरी, सिरदर्द और थकान महसूस हो सकती है।

इसके अलावा त्योहार के दौरान देर रात तक जागना, पार्टी करना और नींद का पूरा न होना शरीर की जैविक घड़ी (सर्केडियन रिदम) को प्रभावित करता है।

जब शरीर को पर्याप्त आराम नहीं मिलता, तो अगले दिन सुस्ती और भारीपन महसूस होना स्वाभाविक है।

कैसे खेलें प्राकृतिक तरीके से होली? | Natural Holi Tips

स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए नेचुरल, हर्बल और ऑर्गेनिक रंगों का इस्तेमाल करना सबसे बेहतर विकल्प है।

टेसू (पलाश) के फूलों को उबालकर उसका पानी प्राकृतिक केसरिया रंग देता है। चुकंदर उबालकर गुलाबी रंग तैयार किया जा सकता है।

हल्दी, बेसन और चंदन मिलाकर पीला रंग बनाया जा सकता है। मेंहदी पाउडर से हरा रंग तैयार किया जा सकता है।

ये प्राकृतिक रंग न सिर्फ त्वचा के लिए सुरक्षित होते हैं, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल भी होते हैं।

होली खेलने से पहले त्वचा और बालों की देखभाल | Skin Care Before Holi

रंग खेलने से पहले चेहरे पर मॉइस्चराइजर या वॉटरप्रूफ बेस लगाएं। शरीर पर सरसों, तिल या ऑलिव ऑयल लगाने से रंग त्वचा पर चिपकता नहीं और बाद में आसानी से निकल जाता है।

होठों पर लिप बाम लगाएं ताकि वे सूखने या फटने से बचें। बालों में तेल लगाकर जूड़ा या चोटी बना लें, जिससे रंग की पकड़ कम हो। नाखूनों पर नेल पॉलिश लगाने से रंगों के दाग से बचाव होता है।

होली के बाद कमजोरी दूर करने के उपाय | Post Holi Recovery Tips

होली के बाद सबसे जरूरी है शरीर में पानी और पोषक तत्वों की पूर्ति करना। खूब पानी पिएं ताकि डिहाइड्रेशन न हो। नारियल पानी, छाछ और नींबू पानी इलेक्ट्रोलाइट्स संतुलित करने में मददगार हैं।

तरबूज, केला, संतरा, सेब जैसे फल और पालक, चुकंदर, ब्रोकोली जैसी सब्जियां शरीर को जरूरी विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट देती हैं। दही, ड्राई फ्रूट्स और प्रोटीन से भरपूर भोजन ऊर्जा स्तर को तेजी से बढ़ाते हैं।

ग्रीन टी, अदरक-नींबू की चाय या हल्दी वाला दूध शरीर को आराम पहुंचाने और थकान दूर करने में सहायक हो सकते हैं। साथ ही पर्याप्त नींद लेना बेहद जरूरी है, ताकि शरीर पूरी तरह रिकवर कर सके।

होली का त्योहार खुशियों और उमंग का प्रतीक है, लेकिन स्वास्थ्य की अनदेखी करके त्योहार का आनंद अधूरा हो सकता है।

कृत्रिम और मिलावटी रंगों से बचें, प्राकृतिक विकल्प अपनाएं और खेलने के बाद शरीर को सही पोषण व आराम दें। सही सावधानियों के साथ मनाई गई होली न केवल यादगार होगी, बल्कि सेहत के लिए भी सुरक्षित रहेगी।

यह भी पढ़ें: होलिका दहन का ये है मुहूर्त्त, होली पर ऐसे करें पूजा, 2026 में इस दिन होली !

Holi: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Holi khelne ke baad nind kyu aati hai

होली के दौरान ज्यादा शारीरिक गतिविधि और डिहाइड्रेशन के कारण शरीर की ऊर्जा कम हो जाती है, जिससे नींद और थकान महसूस होती है।

Kya holi ke rango se nasha hota hai

कुछ केमिकल युक्त रंगों में भारी धातु हो सकती हैं, जो सिरदर्द और भारीपन का कारण बनती हैं। इसे लोग आम भाषा में “रंगों का नशा” कहते हैं।

Holi ke baad kamjori kese dur kare

पानी, नारियल पानी, फल, दही और प्रोटीन युक्त भोजन लें तथा पर्याप्त नींद लें।

Kya camical vale rang se cancer hota hai

लंबे समय तक हानिकारक रसायनों के संपर्क में रहना स्वास्थ्य के लिए जोखिम बढ़ा सकता है, इसलिए हमेशा हर्बल और ऑर्गेनिक रंगों का इस्तेमाल करें।

Holi ke baad skin ki dekhbhal kese kare

माइल्ड क्लींजर से नहाएं, मॉइस्चराइजर लगाएं और त्वचा को हाइड्रेट रखें। जरूरत पड़े तो त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लें।

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