राम मंदिर: 25 नवंबर 2025 का दिन अयोध्या ही नहीं, बल्कि पूरे भारत के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण और ऐतिहासिक बनने जा रहा है। राम जन्मभूमि पर स्थित भव्य राम मंदिर में इस दिन मुख्य शिखर पर पवित्र भगवा ध्वज फहराया जाएगा।
धार्मिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय महत्व से जुड़ा यह आयोजन इतना विशिष्ट है कि अयोध्या और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा एजेंसियों ने हाई अलर्ट घोषित किया है।
नौ शिखरों वाले इस दिव्य मंदिर के मुख्य शिखर पर लहराने वाली यह भगवा पताका करोड़ों रामभक्तों के लिए आस्था, सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय चेतना का एक अद्भुत प्रतीक होगी।
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुसार यह दिन विवाह पंचमी के पावन पर्व पर पड़ रहा है, जिसे भगवान राम और माता सीता के दिव्य विवाह की स्मृति में मनाया जाता है।
इसी शुभ संयोग पर मंदिर निर्माण की प्रक्रिया के “पूर्णता संकेत” के रूप में ध्वजारोहण किया जा रहा है।
रामलला की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024 को कूर्म द्वादशी के शुभ मुहूर्त में हुई थी, जिसमें सूर्य तिलक सहित सभी वैदिक अनुष्ठान सम्पन्न किए गए थे।
ध्वजारोहण इस आध्यात्मिक यात्रा का एक और महत्वपूर्ण अध्याय बनने जा रहा है।
राम मंदिर: राम-सीता विवाह पंचमी का पावन पर्व
विवाह पंचमी हिंदू परंपरा में वह तिथि है जब भगवान राम और माता सीता का विवाह मिथिला में संपन्न हुआ था।
इसी कारण यह दिन अयोध्या में विशेष पूजन, राम-सीता विवाह मंचन और वैदिक अनुष्ठानों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के अनुसार 24 नवंबर की रात से दर्शन बंद कर दिए जाएंगे, ताकि 25 नवंबर को सभी अनुष्ठान शांति और पूर्णता के साथ सम्पन्न किए जा सकें। पूजा के बाद ही सामान्य दर्शन पुनः आरंभ होंगे।
सूर्य चिह्न वाली भव्य भगवा पताका
इस समारोह का केंद्र वह विशाल भगवा ध्वज है, जो मंदिर की शान और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक बनेगा।
यह ध्वज 21 फीट लंबा है और सूर्यवंश की परंपरा को दर्शाते हुए गेरुआ रंग में निर्मित है। बीच में स्वर्णिम सूर्य का चिह्न धर्म, ऊर्जा, ज्ञान और सत्य का प्रतिनिधित्व करता है।
इसे उच्च गुणवत्ता वाले विशेष वस्त्र से बनाया गया है ताकि तेज हवा और मौसम की परिस्थितियों में भी इसकी पवित्रता बनी रहे।
ध्वज मंदिर के मुख्य शिखर पर लगभग 190 फीट की ऊंचाई पर फहराया जाएगा।
ध्वजदंड 401 फुट ऊँचा स्टेनलेस स्टील का स्तंभ है, जिसे विश्व का सबसे ऊँचा मंदिर ध्वजस्तंभ माना जा रहा है।
इसमें 360-डिग्री रोटेटिंग मैकेनिज्म लगाया गया है ताकि ध्वज हर दिशा में स्वतंत्रता से लहरा सके।
शुभ मुहूर्त और वैदिक अनुष्ठान
ध्वजारोहण का शुभ मुहूर्त 11:58 से 1:00 बजे तक निर्धारित है।
अयोध्या, काशी और दक्षिण भारत के 108 विद्वान आचार्यों द्वारा 21 से 25 नवंबर तक पांच दिनों का वैदिक यज्ञ और पूजा सम्पन्न की जा रही है,
जिसका मार्गदर्शन काशी के विख्यात विद्वान गणेश्वर शास्त्री कर रहे हैं।
अतिथियों के लिए सेवकपुरम, रामसेवकपुरम और तीर्थ क्षेत्र पुरम में लगभग 1,600 कमरों की व्यवस्था की गई है।
25 नवंबर को सुबह विवाह पंचमी पूजा और विशेष भोग के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं ध्वज फहराएंगे।
इसके बाद दोपहर 2 बजे कार्यक्रम का समापन और अतिथियों का प्रस्थान होगा। सभी आमंत्रितों के लिए महाभोज भी निर्धारित है।
प्रमुख अतिथि और ऐतिहासिक भागीदारी
इस पावन क्षण के साक्षी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी होंगे, जो लगभग चार घंटे तक अयोध्या में रहेंगे।
विशेष अतिथियों में मोहन भागवत, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और ट्रस्ट के सभी सदस्य शामिल होंगे।
हजारों श्रद्धालु भी इस दिव्य आयोजन का हिस्सा बनेंगे।
भव्य सज्जा और सुरक्षा व्यवस्था
निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा के अनुसार रक्षा मंत्रालय के विशेषज्ञों ने सभी तकनीकी पहलुओं की जांच की है।
17 और 18 नवंबर को मॉक ड्रिल भी सफलतापूर्वक पूरी हुई। अयोध्या शहर को भगवा ध्वजों, फूलों, रंग-बिरंगी रोशनियों और मंदिर-थीम वाली सजावट से सुसज्जित किया गया है।
पूरे परिसर, 14 छोटे मंदिरों और रामायण-आधारित आध्यात्मिक लाइब्रेरी को सुंदर रूप से संवारा गया है।
रेलवे द्वारा 900 विशेष ट्रेनों, हेलीकॉप्टर सेवा और विशेष वाहनों के माध्यम से सुरक्षा और परिवहन की व्यापक व्यवस्था की गई है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिए हैं कि कोई भी व्यवस्था में चूक नहीं होनी चाहिए।
राम राज्य का संदेश
यह भगवा ध्वज केवल एक प्रतीक नहीं बल्कि अयोध्या की उस दिव्य यात्रा का परिणाम है, जिसके लिए लाखों लोगों ने त्याग और आस्था दिखाई।
यह वही राम राज्य का संदेश है जहाँ सत्य, न्याय और समानता सर्वोपरि हैं।
जब यह ध्वज शिखर पर लहराएगा, पुष्पवर्षा और “जय श्री राम” के स्वर से अयोध्या का आकाश गूँज उठेगा।

