बजट से पहले का ट्रेलर: बजट 2026 से पहले सरकार ने देश की आर्थिक तस्वीर सामने रख दी है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार, 29 जनवरी 2026 को लोकसभा में आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 पेश किया।
यह दस्तावेज बजट से ठीक एक दिन पहले आता है और इसे सरकार का आर्थिक रिपोर्ट कार्ड माना जाता है।
इस सर्वे से यह साफ होता है कि बीते साल भारत की अर्थव्यवस्था किस स्थिति में रही और आने वाले समय में किस दिशा में आगे बढ़ने की तैयारी है।
कब पेश हुआ था भारत का पहला आर्थिक सर्वेक्षण?
भारत का पहला आर्थिक सर्वेक्षण वर्ष 1950-51 में केंद्रीय बजट के साथ पेश किया गया था। हालांकि, 1964 के बाद इसे बजट से अलग कर दिया गया।
तब से यह परंपरा बन गई कि आर्थिक सर्वे बजट से एक दिन पहले संसद में रखा जाएगा। इसका मकसद यह है कि सांसदों और आम जनता को बजट से पहले देश की आर्थिक स्थिति की पूरी जानकारी मिल सके, ताकि बजट को बेहतर तरीके से समझा जा सके।
डिजिटल दौर में आर्थिक सर्वे तक आसान पहुंच
आज के डिजिटल युग में आर्थिक सर्वे को पढ़ना और समझना बेहद आसान हो गया है। संसद में पेश होते ही इसकी पूरी कॉपी भारत सरकार की वेबसाइट indiabudget.gov.in पर पीडीएफ फॉर्मेट में उपलब्ध करा दी जाती है।
इसके अलावा संसद टीवी और दूरदर्शन के डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर इसकी पल-पल की जानकारी और विश्लेषण लाइव देखा जा सकता है।
क्यों इतना अहम है आर्थिक सर्वेक्षण?
आर्थिक सर्वे को बजट से पहले का ‘ट्रेलर’ कहा जाता है। यह बताता है कि पिछले एक साल में देश की आर्थिक सेहत कैसी रही, सरकार ने किन क्षेत्रों पर फोकस किया और आगे किन सेक्टर्स को प्राथमिकता मिल सकती है।
आर्थिक सर्वे दो भागों में पेश किया जाता है
| भाग (Part) | मुख्य फोकस क्षेत्र |
|---|---|
| पार्ट A | ग्रोथ, महंगाई, वैश्विक हालात और मैक्रो-इकोनॉमिक एनालिसिस |
| पार्ट B | रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और समावेशी विकास |
बजट सत्र की शुरुआत के साथ पीएम मोदी का संदेश
बजट सत्र की शुरुआत 28 जनवरी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण से हो चुकी है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह बजट सत्र भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम है।
उन्होंने इसे 21वीं सदी के दूसरे क्वार्टर का पहला बजट बताया और कहा कि यह बजट 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में मजबूत आधार तैयार करेगा।
पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि आजादी के 100 साल पूरे होने तक भारत को विकसित देश बनाने के लिए अगले 25 साल बेहद निर्णायक होंगे।
उनके मुताबिक, यह बजट उसी दीर्घकालिक लक्ष्य की नींव रखने वाला है, जिससे भारत की आर्थिक और वैश्विक भूमिका तय होगी।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के संबोधन की प्रमुख बातें
राष्ट्रपति ने अपने भाषण में कहा कि पिछले 11 वर्षों में भारत की आर्थिक नींव मजबूत हुई है। उन्होंने यूरोपीय यूनियन के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) का जिक्र करते हुए कहा कि इससे मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस सेक्टर और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
उन्होंने जीएसटी 2.0 सुधारों और इनकम टैक्स में राहत को मिडिल क्लास के लिए ऐतिहासिक कदम बताया।
FY27 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान
आर्थिक सर्वे के अनुसार, भारत की विकास दर के अनुमान निम्नलिखित हैं
| वित्त वर्ष (Financial Year) | GDP ग्रोथ का अनुमान |
|---|---|
| FY 2025-26 (चालू) | 7.4% |
| FY 2026-27 (अगला) | 6.8% – 7.2% |
सर्वे के मुताबिक, भारत की आर्थिक मजबूती का सबसे बड़ा आधार घरेलू डिमांड है। अच्छी फसल के चलते ग्रामीण इलाकों में खर्च बढ़ा है, वहीं शहरी क्षेत्रों में भी खपत में सुधार दिख रहा है।
वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की रणनीति
आर्थिक सर्वे में कहा गया है कि मौजूदा वैश्विक अनिश्चितता के दौर में भारत को घरेलू ग्रोथ, फाइनेंशियल स्टेबिलिटी और नकदी उपलब्धता पर ज्यादा ध्यान देना होगा।
यूरोप के साथ FTA और संभावित भारत-अमेरिका ट्रेड डील को भारत के लिए बड़ा अवसर बताया गया है।
सर्वे में माना गया है कि रुपया अपनी वास्तविक मजबूती के मुकाबले कम आंका गया है। हालांकि, रुपये में हल्की कमजोरी अमेरिकी टैरिफ के असर को संतुलित करने में मदद करती है।
साथ ही AI सेक्टर में अत्यधिक वैल्यूएशन को लेकर चेतावनी दी गई है कि अपेक्षित लाभ न मिलने पर इसमें तेज गिरावट आ सकती है।
बैंकिंग सेक्टर की मजबूत स्थिति
भारत का बैंकिंग सिस्टम इस समय मजबूत स्थिति में है। बैंकिंग सेक्टर के प्रमुख आंकड़े इस प्रकार हैं
| सूचकांक (Indicator) | स्थिति / डेटा |
|---|---|
| NPA (सितंबर 2025) | ऐतिहासिक निचले स्तर पर |
| CRAR (पूंजी पर्याप्तता अनुपात) | 17.2% |
| DIIs की हिस्सेदारी (Q2) | 18.3% (रिकॉर्ड हाई) |
| FIIs की हिस्सेदारी | 13 साल के निचले स्तर पर |
आर्थिक सर्वे का मानना है कि मौजूदा वैश्विक तनाव के बीच भारत के पास एक ऐतिहासिक अवसर है। मजबूत फंडामेंटल्स, स्थिर बैंकिंग सिस्टम और बढ़ती घरेलू मांग भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था में नेतृत्व की भूमिका निभाने का मौका दे सकती है।

