ड्रीम एक्ट 2025: अमेरिकी सीनेट में डेमोक्रेट सीनेटर डिक डर्बिन और रिपब्लिकन सीनेटर लिसा मुरकोवस्की ने एक बार फिर “ड्रीम एक्ट 2025” पेश किया है।
यह बिल उन हजारों युवाओं के लिए उम्मीद की नई किरण लेकर आया है जो बचपन में अपने माता-पिता के साथ अमेरिका पहुंचे थे, लेकिन कानूनी दस्तावेज़ों की कमी के कारण वयस्क होने पर अनिश्चित भविष्य का सामना कर रहे हैं।
इस नए प्रस्ताव में पहली बार उन बच्चों को भी शामिल किया गया है जो बिना कागज़ों के अमेरिका आए थे और 21 साल की उम्र पूरी होते ही डिपोर्टेशन के खतरे से जूझते हैं। इन युवाओं को आमतौर पर “ड्रीमर्स” कहा जाता है।
ड्रीम एक्ट 2025: नए प्रावधानों में बड़ा विस्तार
पहले के ड्रीम एक्ट में सिर्फ वे बच्चे शामिल थे जो कानूनी वीज़ा पर अमेरिका आए थे, लेकिन ड्रीम एक्ट 2025 इस दायरे को काफी बढ़ा देता है।
नए बिल के अनुसार वे बच्चे लाभ ले सकेंगे जो 18 साल की उम्र से पहले अमेरिका आए हों। कम से कम चार वर्षों से अमेरिका में रह रहे हों।
शिक्षा पूरी कर चुके हों और किसी भी प्रकार के अपराध में शामिल न हों। इसी के साथ ही टैक्स रिकॉर्ड में कोई समस्या न रख रहे हों।
ये सभी पात्रता शर्तें पूरी करने पर युवाओं को 21 साल की उम्र में आठ साल का कंडीशनल परमानेंट रेजिडेंस दिया जाएगा।
यह अवधि पूरी होने पर उन्हें स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) प्राप्त करने का रास्ता खुल सकता है।
एज-आउट होने वाले बच्चों के लिए बड़ी राहत
अमेरिका में ग्रीन कार्ड की अत्यधिक लंबी प्रतीक्षा पंक्ति, खासकर भारत और चीन जैसे देशों के लिए, कई परिवारों को गंभीर संकट में डाल चुकी है।
भारतीय परिवारों के लिए यह मुद्दा और भी बड़ा है क्योंकि देश-विशिष्ट कोटा होने के कारण हजारों बच्चे वर्षों तक लाइन में फंसे रहते हैं।
जैसे ही वे 21 साल के होते हैं, वे अपने माता-पिता के वीज़ा पर “लीगल डिपेंडेंट” नहीं माने जाते। इस स्थिति को “एज-आउट” कहा जाता है।
इस एज-आउट प्रक्रिया में बच्चे अचानक अवैध स्थिति में आ जाते हैं और किसी भी समय डिटेन या डिपोर्ट किए जा सकते हैं।
मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, आने वाले वर्षों में लगभग एक लाख भारतीय बच्चे इस जोखिम का सामना कर सकते हैं। ऐसे में ड्रीम एक्ट 2025 भारतीय समुदाय के लिए बेहद महत्वपूर्ण कदम है।
ड्रीम एक्ट 2025
यह बिल न सिर्फ ड्रीमर्स को सुरक्षा प्रदान करता है, बल्कि उन्हें समाज में योगदान करने का अवसर भी देता है।
कई युवा अमेरिकी स्कूलों में पढ़ाई पूरी कर चुके हैं, कॉलेज में जा रहे हैं या पेशेवर जीवन शुरू कर चुके हैं, लेकिन अनिश्चित कानूनी स्थिति उनके करियर को सीमित कर देती है।
कंडीशनल परमानेंट रेजिडेंस मिलने से वे न केवल सुरक्षित महसूस करेंगे, बल्कि शिक्षा, नौकरी और अन्य अवसरों में भी आगे बढ़ पाएंगे।
भारतीय-अमेरिकी समुदाय लंबे समय से ऐसे समाधान की प्रतीक्षा कर रहा था जो बच्चों को उम्र के आधार पर अवैध स्थिति में जाने से रोक सके।
ड्रीम एक्ट 2025 इस दिशा में एक बड़ा कदम है। अगर यह कांग्रेस के दोनों सदनों से पास होकर कानून बनता है, तो हजारों भारतीय परिवार राहत की सांस ले सकेंगे।

