Tuesday, March 3, 2026

Dog Bite Cases In India: आवारा कुत्तों का बढ़ता आतंक, लोगों की जान लेने पर उतर आए डॉग लवर्स

Dog Bite Cases In India: भारत में आवारा कुत्तों का आतंक दिन-ब-दिन खतरनाक होता जा रहा है।

बच्चों के नोच-नोचकर मारे जाने, बुजुर्गों पर हमले और रेबीज़ से मौत की घटनाएं अब अखबारों की रोज़ की हेडलाइन बन गई हैं।

पंजाब, केरल, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में कई मामलों ने आम जनता को झकझोर दिया है।

एक पांच साल के बच्चे की मौत, छह साल के मासूम को नोचने की घटना और कबड्डी खिलाड़ी की अनदेखी से हुई मौत, इन सबने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब कोई भी सुरक्षित नहीं है।

रेबीज़ और कुत्तों के काटने के मामलों में तेजी

Dog Bite Cases In India: 2023 में 30 लाख और 2024 में 37 लाख से अधिक कुत्तों के काटने के मामले दर्ज किए गए।

WHO के मुताबिक, विश्व में रेबीज़ से होने वाली मौतों में 36% भारत में होती हैं।

हालाँकि आधिकारिक रिकॉर्ड 2024 में सिर्फ़ 48 मौतें बताता है, लेकिन ज़मीनी हकीकत में यह आंकड़ा कहीं ज़्यादा हो सकता है।

Dog Bite Cases In India

कौन बन रहे हैं सबसे बड़े शिकार?

Dog Bite Cases In India: खेलते बच्चे, घर के पास टहलते बुज़ुर्ग, मजदूर और महिलाएं सबसे अधिक शिकार बनते हैं।

राजस्थान के अलवर, तेलंगाना, बेंगलुरु और नोएडा की घटनाएं दर्शाती हैं कि छोटे गाँवों से लेकर महानगरों तक कोई भी सुरक्षित नहीं है।

कई घटनाओं में कुत्तों ने शिकार का मांस तक खा लिया।

टीकों की भारी कमी, इलाज अधर में

Dog Bite Cases In India: भारत में रेबीज़ से बचाव के लिए जरूरी वैक्सीन और इम्युनोग्लोबुलिन की कमी लगातार बनी हुई है।

चंडीगढ़, कोझिकोड और अन्य शहरों में सरकारी अस्पतालों में हफ्तों तक टीके उपलब्ध नहीं रहे।

ग्रामीण इलाकों में स्थिति और भी बदतर है, जहाँ टीका केंद्र दूर होते हैं और जानकारी का अभाव मौत की वजह बनता है।

प्रशासनिक विफलता और कानूनी अड़चनें

Dog Bite Cases In India: पशु जन्म नियंत्रण (ABC) कार्यक्रम आधा-अधूरा और कागज़ों तक सीमित है।

नसबंदी का लक्ष्य अभी भी अधूरा है।

कुछ ठेकेदार तो आंकड़ों में हेराफेरी करते पाए गए हैं।

वहीं, कोर्ट में लंबित याचिकाएं और पशु प्रेमी संगठनों के हस्तक्षेप से प्रशासन की कार्रवाई सीमित रह जाती है।

“कुत्ता प्रेम” या लापरवाह रोमांटिसिज्म?

Dog Bite Cases In India: आवारा कुत्तों को रिहायशी कॉलोनियों में बेतरतीब तरीके से खाना खिलाना स्थिति को और बिगाड़ रहा है।

ऐसे इलाकों में कुत्ते आक्रामक होकर झुंड में हमला करते हैं।

कई आरडब्ल्यूए द्वारा बनाए गए फीडिंग ज़ोन को “कुत्ता प्रेमियों” द्वारा नकार दिया जाता है।

इससे इंसान और जानवरों के बीच संघर्ष और तीव्र हो जाता है।

पालतू जानवरों का परित्याग, समस्या को और गंभीर बनाता ट्रेंड

Dog Bite Cases In India: कोविड के दौरान लिए गए पालतू कुत्तों को बाद में छोड़ दिया गया।

न बिके पिल्ले और पालतू पशु भी सड़कों पर दिखाई देने लगे हैं।

खराब नियमन और पालतू दुकानें समस्या को बढ़ा रही हैं। लेकिन कानून के बावजूद पालन नाममात्र है।

अदालतें भी हो चुकी हैं सख्त

Dog Bite Cases In India: दिल्ली हाईकोर्ट तक ने टिप्पणी की कि “कुत्तों और बंदरों ने शहरों को कब्ज़ा कर लिया है।

बच्चे पार्कों में नहीं खेल पा रहे, यह स्थिति अस्वीकार्य है।”

यह दर्शाता है कि न्यायपालिका भी अब इस समस्या को गंभीरता से देख रही है।

समाधान की ज़रूरत, बहस की नहीं

  • नसबंदी अभियानों को ज़मीनी स्तर पर तेज़ किया जाए
  • एबीसी नियम 2023 का सख्ती से पालन
  • सभी अस्पतालों में टीकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए
  • रेबीज़ के काटने पर तत्काल मुफ्त और पूरी उपचार प्रक्रिया
  • अवैध फीडिंग पर सख्त जुर्माना और मुआवज़ा

परित्याग पर कठोर कानूनी कार्रवाई

पशु नियंत्रण पर निर्णयों में राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखे

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Muskaan Gupta
Muskaan Guptahttps://reportbharathindi.com/
मुस्कान डिजिटल जर्नलिस्ट / कंटेंट क्रिएटर मुस्कान एक डिजिटल जर्नलिस्ट और कंटेंट क्रिएटर हैं, जो न्यूज़ और करंट अफेयर्स की रिपोर्टिंग में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 2 साल का अनुभव है। इस दौरान उन्होंने राजनीति, सामाजिक मुद्दे, प्रशासन, क्राइम, धर्म, फैक्ट चेक और रिसर्च बेस्ड स्टोरीज़ पर लगातार काम किया है। मुस्कान ने जमीनी रिपोर्टिंग के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए प्रभावशाली कंटेंट तैयार किया है। उन्होंने दिल्ली विधानसभा चुनाव और अन्य राजनीतिक घटनाक्रमों की कवरेज की है और जनता की राय को प्राथमिकता देते हुए रिपोर्टिंग की है। वर्तमान में वह डिजिटल मीडिया के लिए न्यूज़ स्टोरीज़, वीडियो स्क्रिप्ट्स और विश्लेषणात्मक कंटेंट पर काम कर रही हैं। इसके साथ ही वे इंटरव्यू, फील्ड रिपोर्टिंग और सोशल मीडिया जर्नलिज़्म में भी दक्ष हैं। मुस्कान का फोकस तथ्यात्मक, प्रभावशाली और जनहित से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने लाने पर रहता है।
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