Friday, March 13, 2026

कांग्रेस के मंच से PM मोदी की दिवंगत मां को गाली, राहुल गांधी की राजनीति लोकतंत्र पर कलंक

दरभंगा में शर्मनाक घटना

दरभंगा की धरती पर कांग्रेस के मंच से राहुल गांधी के गुर्गे मोहम्मद नोशद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वर्गीय माता को लेकर अभद्र गालियां दी गईं। यह दृश्य लोकतंत्र के लिए कलंक बन गया।

देश के सर्वोच्च पद पर आसीन व्यक्ति के साथ इस स्तर की बदतमीजी ने पूरे समाज को स्तब्ध कर दिया।

गालीबाजों की कांग्रेस-राजद मानसिकता

जिन लोगों ने मंच से अपशब्द कहे, वे कांग्रेस और राजद की उसी राजनीति का चेहरा हैं, जो विपक्षी नेताओं को नीचा दिखाने के लिए किसी भी मर्यादा को तोड़ देती है।

राहुल गांधी और तेजस्वी यादव जैसी नेतृत्वहीन राजनीति ने समर्थकों को गालीबाज बना दिया है। राहुल गांधी अराजक, गालीबाजों, असामाजिक तत्वों के सरगना और मसीहा बन गए हैं।

राहुल गांधी की जुबान भी उतनी ही घटिया है जितनी उनके समर्थकों की। अपने से 20 साल बड़े पीएम को तू तड़ाक से बातें करना शहजादे अपना जन्मसिद्ध अधिकार मानते हैं। उनसे प्रेरणा पाकर उनके समर्थकों ने सारी हदें पार कर दी हैं।

प्रधानमंत्री के प्रति घृणा क्यों

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जनता के वोट से संवैधानिक तरीके से चुने गए हैं। उन्हें गालियां देना दरअसल देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को गाली देने जैसा है।

जिन्हें यह अधिकार है कि वे राहुल या तेजस्वी को वोट दें, वही अधिकार शेष जनता को मोदी को चुनने का भी है।

कांग्रेस और राजद के नेता संविधान की रक्षा का दावा करते हैं, लेकिन मंच से चुने हुए प्रधानमंत्री को गाली दिलवाना उनके असली चेहरे को सामने लाता है।

सत्ता से दस वर्ष बाहर रहने के बाद इन दलों की बौखलाहट अब लोकतंत्र को कलंकित करने में बदल गई है।

मिथिला की संस्कृति पर धब्बा

मंडन मिश्र और आदि शंकराचार्य की शास्त्रार्थ परंपरा वाली भूमि मिथिला, जहां सदैव तर्क और ज्ञान की संस्कृति रही, वहां अब कांग्रेस-राजद समर्थकों द्वारा गालीबाजी होना बेहद शर्मनाक है। यह क्षेत्र की पहचान और गौरव के साथ खिलवाड़ है।

भाजपा कार्यकर्ताओं की मजबूरी

भाजपा कार्यकर्ता अक्सर इसलिए पीछे हटते हैं क्योंकि उन्हें पता है कि पार्टी नेतृत्व उनकी रक्षा नहीं करेगा।

इसके विपरीत कांग्रेस और राजद के गुंडे प्रवृत्ति वाले समर्थकों को अपने नेताओं का पूरा संरक्षण मिलता है। यही कारण है कि वे मंचों से बेहिचक अपशब्द कहने की जुर्रत करते हैं।

अन्य नेताओं के उदाहरण

इतिहास गवाह है कि मुलायम सिंह यादव, मायावती, इंदिरा गांधी या ममता बनर्जी के खिलाफ सार्वजनिक मंच पर अपशब्द बोलने का साहस किसी ने नहीं किया।

लेकिन भाजपा की नरमी का फायदा उठाकर कांग्रेस और राजद के लोग नरेंद्र मोदी और उनकी मां तक को गाली देने लगे हैं।

गालियों की राजनीति का अंजाम

यह तय है कि गालियों से न तो चुनाव जीते जाते हैं और न ही जनता का दिल। बिहार की जनता कांग्रेस और राजद के जंगलराज को देख चुकी है।

यदि ऐसे गालीबाज फिर सत्ता में आए तो अमन-चैन छिन जाएगा। इसलिए जनता अब गलती नहीं दोहराएगी।

लोकतंत्र की असली ताकत

लोकतंत्र की ताकत सत्ता या कुर्सी में नहीं, बल्कि संगठन और जनता के विश्वास में होती है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपमान सहकर भी धैर्य दिखाया है।

लेकिन दरभंगा की यह घटना साफ करती है कि कांग्रेस और राजद जैसे दल लोकतंत्र नहीं, केवल गालीबाजी की राजनीति पर जिंदा हैं।

बिहार की जनता का संदेश

यह चुनाव दरभंगा की गालीबाज घटना को याद रखकर ही तय करेगा कि बिहार फिर से जंगलराज में लौटे या विकास की राह पर आगे बढ़े।

अबकी बार गालियों की राजनीति करने वालों को सत्ता से दूर रखना ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी जीत होगी।

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Samudra
Samudra
लेखक 'भारतीय ज्ञान परंपरा' के अध्येता हैं। वे पिछले एक दशक से सार्वजनिक विमर्श पर विश्लेषणात्मक लेखन कर रहे हैं। सांस्कृतिक सन्दर्भ में समाज, राजनीति, विचारधारा, शिक्षा, धर्म और इतिहास के प्रमुख प्रश्नों के रिसर्च बेस्ड प्रस्तुतिकरण और समाधान में वे पारंगत हैं। वे 'द पैम्फलेट' में दो वर्ष कार्य कर चुके हैं। वे विषयों को उनके ऐतिहासिक आधार, वैचारिक पृष्ठभूमि और दीर्घकालीन प्रभाव के स्तर पर परखते हैं। इसी कारण उनके राष्ट्रवादी लेख पाठक को नई दृष्टि और वैचारिक स्पष्टता भी देते हैं। उनके शोधपरक लेख अनेक मौकों पर राष्ट्रीय विमर्श की दिशा में परिवर्तनकारी सिद्ध हुए हैं।
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