Friday, February 20, 2026

हैदराबाद से बागलकोट तक सांप्रदायिक दंगे: शिवाजी जयंती जुलूस पर पत्थरबाजी, 8 गिरफ्तार, जानें क्या है ताजा स्थिति

हैदराबाद से बागलकोट तक सांप्रदायिक दंगे: देशभर में छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती का उत्साह उस वक्त फीका पड़ गया जब कर्नाटक और तेलंगाना के कुछ हिस्सों से हिंसा और तनाव की खबरें आईं।

बागलकोट में जुलूस पर हुए हमले में जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) तक घायल हो गए, वहीं हैदराबाद में भी स्थिति तनावपूर्ण बनी रही।

बागलकोट: पुलिस कप्तान पर हमला

कर्नाटक के बागलकोट में उत्सव का माहौल तब हिंसा में बदल गया जब पुराना शहर इलाके में स्थित एक धार्मिक स्थल के पास से गुजर रहे जुलूस पर अचानक पत्थरबाजी शुरू हो गई।

भीड़ ने न केवल पत्थर बरसाए, बल्कि सब्जी की गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया। सुरक्षा का नेतृत्व कर रहे SP सिद्धार्थ गोयल को सिर में चोट आई है। उनके साथ कई अन्य पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं।

पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 8 दंगाइयों को गिरफ्तार किया है। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 163 (पूर्व में धारा 144) लागू कर दी गई है।

हैदराबाद: संगीत और प्रतिमा पर छिड़ा विवाद

हैदराबाद से बागलकोट तक सांप्रदायिक दंगे: तेलंगाना की राजधानी भी इस तनाव से अछूती नहीं रही। हैदराबाद के दो अलग-अलग इलाकों में विवाद की स्थिति बनी:

जामा मस्जिद के पास से गुजर रहे जुलूस में तेज संगीत को लेकर विवाद हुआ। कवरेज कर रहे एक यूट्यूबर के साथ मारपीट की घटना भी सामने आई है।

यहां नगर निगम द्वारा शिवाजी महाराज की प्रतिमा को अवैध बताकर हटाए जाने के बाद हिंदू संगठनों ने सड़क पर उतरकर कड़ा विरोध दर्ज कराया।

कानूनी कार्रवाई जारी

दोनों राज्यों के गृह विभागों ने स्पष्ट किया है कि उपद्रवियों को बख्शा नहीं जाएगा। भड़काऊ पोस्ट और अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ IT सेल सक्रिय है।

वहीं, संवेदनशील इलाकों में ड्रोन और CCTV के जरिए निगरानी रखी जा रही है। इन घटनाओं ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हमारे त्यौहार आपसी संवाद के बजाय टकराव का जरिया बनते जा रहे हैं?

जब कानून के रक्षक ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता में भय का माहौल स्वाभाविक है। पत्थरबाजी जैसी प्रवृत्तियों पर केवल कानूनी कार्रवाई नहीं, बल्कि सामाजिक बहिष्कार और कड़े सुधारों की जरूरत है।

शिवाजी महाराज का व्यक्तित्व सर्वधर्म समभाव और वीरता का प्रतीक था। जयंती के अवसर पर हुई ये घटनाएं उनके आदर्शों के विपरीत हैं।

प्रशासन का डंडा और समाज का संयम ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने का एकमात्र रास्ता है।

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