Wednesday, January 14, 2026

चंडीगढ़ में नये राजनीतिक तूफान की आहट: अनुच्छेद 240 के दायरे में लाने के फैसले पर पंजाब में बवाल क्यों?

चंडीगढ़ में नये राजनीतिक तूफान की आहट: केंद्र सरकार संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2025 संसद में पेश करने जा रही है, जिसका प्रमुख उद्देश्य चंडीगढ़ को संविधान के अनुच्छेद 240 के तहत उन केंद्र शासित प्रदेशों की श्रेणी में शामिल करना है, जहां राष्ट्रपति सीधे नियम बनाते हैं।

उन नियमों का प्रभाव संसद के कानून जैसा होता है।

अगर यह संशोधन पारित हो गया, तो चंडीगढ़ का प्रशासनिक मॉडल पूरी तरह बदल जाएगा और उसका नियंत्रण तकरीबन संपूर्ण रूप से केंद्र सरकार के हाथ में आ जाएगा।

यह विधेयक 1 दिसंबर से शुरू होने वाले शीतकालीन सत्र में आने की संभावना है।

अनुच्छेद 240 क्या कहता है?

चंडीगढ़ में नये राजनीतिक तूफान की आहट: अनुच्छेद 240 उन केंद्र शासित प्रदेशों पर लागू होता है जहां या तो विधानसभा नहीं होती या वह किसी कारण से निलंबित रहती है।

वर्तमान में यह प्रावधान अंडमान–निकोबार, दमन–दीव, दादरा–नगर हवेली, लक्षद्वीप और विशेष अवस्था में पुडुचेरी पर लागू है।

इसी श्रेणी में चंडीगढ़ को लाने का प्रस्ताव पंजाब के लिए बेहद संवेदनशील मसला बन गया है, क्योंकि इसका अर्थ है कि शहर पर केंद्र सरकार का सीधा और व्यापक नियंत्रण स्थापित हो जाएगा।

इसे पंजाब से दूर करने की साज़िश”

चंडीगढ़ में नये राजनीतिक तूफान की आहट: केंद्र के इस प्रस्ताव ने पंजाब की राजनीति में हड़कंप मचा दिया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इसे “पंजाब के अधिकारों पर हमला” बताया और कहा कि चंडीगढ़ ऐतिहासिक रूप से पंजाब का हिस्सा रहा है, जिसे केंद्र धकेलकर दूर करना चाहता है।

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह कदम संघीय ढांचे को कमजोर करता है और पंजाब की पहचान पर सीधा प्रहार है।

कांग्रेस बोली, अनुचित और दूरगामी प्रभाव वाला कदम’

चंडीगढ़ में नये राजनीतिक तूफान की आहट: पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वारिंग ने विधेयक का विरोध करने का ऐलान किया।

उन्होंने कहा कि यह फैसला पूरी तरह असंगत है और इससे पंजाब की राजनीतिक व प्रशासनिक स्थिति पर दीर्घकालिक नकारात्मक असर पड़ेगा।

उन्होंने भाजपा नेताओं से भी मांग की कि वे चंडीगढ़ पर अपने रुख को स्पष्ट करें।

अकाली दल का आरोप: “1970 का समझौता कुचला जा रहा है”

चंडीगढ़ में नये राजनीतिक तूफान की आहट: शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह कदम 1970 के उस समझौते के खिलाफ है जिसमें चंडीगढ़ को पंजाब को सौंपने की सहमति बनी थी।

उन्होंने यह भी कहा कि राजीव–लोंगोवाल समझौता पहले ही आज तक लागू नहीं हो पाया, और अब नया संशोधन पंजाब को और कमजोर कर देगा।

अकाली दल ने इस मुद्दे पर आपात बैठक बुलाकर अपनी विरोध रणनीति तय कर ली है।

प्रवासी पंजाबी संगठनों की चिंता, ‘संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन’

चंडीगढ़ में नये राजनीतिक तूफान की आहट: नॉर्थ अमेरिकन पंजाबी एसोसिएशन और विदेशों में बसे कई पंजाबी संगठनों ने भी चिंता जताई है।

उनका कहना है कि केंद्र का यह कदम पंजाब के संवैधानिक अधिकारों और ऐतिहासिक दावे को कमजोर करता है।

इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई है।

चंडीगढ़ का वर्तमान प्रशासन: किसके पास है नियंत्रण?

चंडीगढ़ में नये राजनीतिक तूफान की आहट: इस समय चंडीगढ़ का प्रशासन पंजाब के राज्यपाल के हाथों में है, जिन्हें 1 जून 1984 से शहर का प्रशासक नियुक्त किया गया है।

2016 में केंद्र ने अलग प्रशासक की नियुक्ति का प्रयास किया था, लेकिन पंजाब के सभी दलों के विरोध के चलते निर्णय वापस लेना पड़ा था।

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Muskaan Gupta
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मुस्कान डिजिटल जर्नलिस्ट / कंटेंट क्रिएटर मुस्कान एक डिजिटल जर्नलिस्ट और कंटेंट क्रिएटर हैं, जो न्यूज़ और करंट अफेयर्स की रिपोर्टिंग में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 2 साल का अनुभव है। इस दौरान उन्होंने राजनीति, सामाजिक मुद्दे, प्रशासन, क्राइम, धर्म, फैक्ट चेक और रिसर्च बेस्ड स्टोरीज़ पर लगातार काम किया है। मुस्कान ने जमीनी रिपोर्टिंग के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए प्रभावशाली कंटेंट तैयार किया है। उन्होंने दिल्ली विधानसभा चुनाव और अन्य राजनीतिक घटनाक्रमों की कवरेज की है और जनता की राय को प्राथमिकता देते हुए रिपोर्टिंग की है। वर्तमान में वह डिजिटल मीडिया के लिए न्यूज़ स्टोरीज़, वीडियो स्क्रिप्ट्स और विश्लेषणात्मक कंटेंट पर काम कर रही हैं। इसके साथ ही वे इंटरव्यू, फील्ड रिपोर्टिंग और सोशल मीडिया जर्नलिज़्म में भी दक्ष हैं। मुस्कान का फोकस तथ्यात्मक, प्रभावशाली और जनहित से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने लाने पर रहता है।
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