Tuesday, August 4, 2026
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Mudit

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लेखक भारतीय ज्ञान परंपरा के अध्येता हैं। वे पिछले एक दशक से सार्वजनिक विमर्श पर लेखन कर रहे हैं। समाज, राजनीति, विचारधारा, शिक्षा, धर्म और इतिहास पर रिसर्च बेस्ड विश्लेषण में वे पारंगत हैं। वे 'द पैम्फलेट' में दो वर्ष कार्य कर चुके हैं। उनके शोधपरक लेख अनेक मौकों पर राष्ट्रीय विमर्श की दिशा में परिवर्तनकारी सिद्ध हुए हैं।

मोहन भागवत को क्यों करनी पड़ रही जेन-ज़ी से बात? क्या शाखा पड़ी कमजोर!

मोहन भागवत आखिर ऐसी कवायद की आवश्यकता क्यों पड़ रही है, यह मूल प्रश्न है। संघ प्रमुख मोहन भागवत अपने दौरों में शाखा स्थलों पर...

राममंदिर में चढ़ावा नहीं हुआ चोरी! असल में क्या है मामला?

राममंदिर चढ़ावा मामला राममंदिर के चढ़ावे से जुड़ी रकम के कथित गबन को लेकर विपक्ष लगातार भाजपा, विश्व हिंदू परिषद और संघ को घेर रहा...

CJP आंदोलन का अध्ययन युवाओं के लिए क्यों आवश्यक

CJP राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह श्री अतुल लिमये ने युवाओं से CJP आंदोलन का अध्ययन करने का आग्रह किया है। उनके अनुसार, यह...

हर्ष दुबे: छात्रों की सशक्त आवाज बने हर्ष दुबे ने लाई क्रांति

हर्ष दुबे की कहानी हर्ष दुबे अब तक चार बार नीट परीक्षा दे चुके हैं। पहले प्रयास में कुछ अंकों से चयन चूक गए। दूसरा...

‘रामायण’ ट्रेलर हुआ ब्रह्म मुहूर्त में रिलीज़, चर्चा में आस्था, अपेक्षाएँ और सिनेमाई चुनौती

रामायण ब्रह्म मुहूर्त में किसी फिल्म का ट्रेलर जारी करना केवल प्रचार रणनीति नहीं माना जाता। जब विषय रामायण जैसा हो, तो यह करोड़ों लोगों...

छात्र राजनीति की वापसी से निकलेंगे संघर्षशील नेता ?

छात्र राजनीति का उभार जंतर मंतर पर छात्रों, विशेषकर छात्राओं के एक वर्ग द्वारा अभद्र भाषा, गालियों और आपत्तिजनक नारों ने पूरे आंदोलन के वातावरण...

ज्योतिष सम्मेलन: गिरते स्तर के टूट रहे रिकॉर्ड! पैसों के बदले अवार्ड का धंधा?

ज्योतिष सम्मेलन: ज्ञान के स्थान पर व्यावसायिक आयोजन? देशभर में इन दिनों ज्योतिष सम्मेलनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इनमें से अनेक आयोजन...

जेन Z की परवरिश की खुली पोल? अभद्रता और बदतमीजी ही बनी पहचान?

जेन Z पीढ़ी की चिंताजनक तस्वीर दिल्ली में सामने आए हालिया घटनाक्रम ने देश की आधुनिक पीढ़ी के व्यवहार, भाषा और सामाजिक समझ पर गंभीर...

बचपन हो रहा लंबा, बदलती परवरिश से बच्चों का धीमा विकास

लंबा होता बचपन कम उम्र में शुरू हो जाती थीं जिम्मेदारियां बहुत पुरानी बात नहीं है। कुछ दशक पहले तक समाज में तेरह या चौदह वर्ष...
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