Tuesday, January 13, 2026
- Advertisement -spot_img

AUTHOR NAME

Mudit

312 POSTS
0 COMMENTS
लेखक 'भारतीय ज्ञान परंपरा' के अध्येता हैं और 9 वर्षों से भारतीय इतिहास, धर्म, संस्कृति, शिक्षा एवं राजनीति पर गंभीर लेखन कर रहे हैं।

स्वामी विवेकानंद की हिन्दुओं के लिए भविष्यवाणी

आधुनिक व्यवस्थित राष्ट्रीय दर्शन का आदि स्रोत हैं स्वामी विवेकानंद। इन्हीं के अनुगामी श्रीअरविन्द, श्रीसावरकर, महामना मालवीय, श्रीगुरुजी गोलवलकर से लेकर नरेन्द्र मोदी तक...

डॉलर का दबदबा घटने की आहट से बौखलाए ट्रंप, नहीं झुक रहा भारत

डॉलर वर्तमान विश्व व्यवस्था में अमेरिका का बदलता स्वरूप और भारत की रणनीतिक स्वायत्तता आज की वैश्विक भू-राजनीति एक ऐसे निर्णायक मोड़ पर खड़ी है जहाँ...

सीआईए का नैरेटिव वारफेयर और हमारे ‘बौद्धिक’ जयचंद, भारत के विरुद्ध अदृश्य युद्ध

सीआईए युद्ध का बदलता स्वरूप और भारत की संप्रभुता पर प्रहार इतिहास गवाह है कि भारत की पवित्र भूमि पर आक्रमण करने के लिए शत्रुओं...

नेहरू सोमनाथ: नेहरू के सोमनाथ मंदिर पुनर्निर्माण विरोधी रवैये पर भाजपा ने बोला हमला

नेहरू सोमनाथ मंदिर विवाद पर सुधांशु त्रिवेदी की पूरी प्रेस कांफ्रेंस मित्रों हम सभी जानते हैं कि भारत स्वतंत्रता के इस अमृतकाल में 2047 तक...

2026 के लिए 6 कड़े सबक: करियर और अर्थव्यवस्था का कड़वा सच

2026 आज के दौर में जब हर युवा एक अच्छी नौकरी और लाखों के पैकेज का सपना देख रहा है, बाजार की हकीकत कुछ और...

ट्रम्प की मनमानी के विरुद्ध मोदी का अटल संकल्प और अमेरिका की ध्वस्त कूटनीति

ट्रम्प विश्व पटल पर आज जो परिदृश्य उभर रहा है, वह मात्र व्यापारिक समझौतों की रस्साकशी नहीं है, बल्कि यह दो भिन्न सभ्यताओं के...

बांग्लादेश में सुलगती आग और भारतीय कूटनीति का शुतुरमुर्गी रवैया

बांग्लादेश बांग्लादेश का संकट और भारत के समक्ष आसन्न अस्तित्वगत चुनौतियां भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के विमर्श में लंबे समय से 'टू...

सोमनाथ मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के समय राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद का ऐतिहासिक भाषण

सोमनाथ मंदिर सोमनाथ मंदिर में महादेव प्रतिष्ठा के अवसर पर तारीख 11 मई 1951 को राष्ट्रपति देशरत्न डॉ. राजेन्द्र प्रसाद जी द्वारा दिया गया भाषण...

वो 8 नेता: जो अर्श से पहुंचे फर्श पर, ले डूबा राजनीतिक दम्भ

नेता राजनीति की प्रकृति निष्ठुर अवश्य है, किन्तु यह निष्ठुरता अकारण नहीं होती। भारतीय लोकतंत्र का इतिहास साक्षी है कि यह तंत्र भावनाओं के...
- Advertisement -spot_img