Monday, January 5, 2026

सुप्रीम कोर्ट का चौंकाने वाला फैसला: घरेलू क्रूरता की बदली परिभाषा, जानें शादीशुदा लोगों के लिए क्यों है बड़ी खबर?

सुप्रीम कोर्ट का चौंकाने वाला फैसला: भारतीय समाज में विवाह केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि दो परिवारों, संस्कारों और जिम्मेदारियों का बंधन माना जाता है।

इस बंधन में आर्थिक पारदर्शिता और आपसी भरोसा महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के एक महत्वपूर्ण आदेश ने इसी संवेदनशील विषय पर स्पष्टता दी है, क्या पति द्वारा पत्नी से घरेलू खर्चों का हिसाब पूछना ‘क्रूरता’ की श्रेणी में आता है?

इस मामले में अदालत का उत्तर साफ है कि केवल खर्च का हिसाब मांगना, अपने आप में, वैवाहिक क्रूरता नहीं माना जा सकता।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मामले की पृष्ठभूमि में पति-पत्नी के बीच लंबे समय से चल रहा वैवाहिक विवाद था। पत्नी का आरोप था कि पति का बार-बार खर्चों का हिसाब मांगना मानसिक उत्पीड़न और अपमान का रूप ले चुका है, जो उसे असहज करता है।

वहीं, पति का तर्क था कि पारिवारिक बजट, भविष्य की योजना और आर्थिक अनुशासन के लिए खर्चों पर चर्चा आवश्यक है।

निचली अदालतों में अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आए, लेकिन अंत में सर्वोच्च न्यायालय ने इस मुद्दे पर संतुलित दृष्टि अपनाई। बता दें कि इस मामले में फैसला सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना और आर. महादेवन ने दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने दिया बड़ा फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वैवाहिक जीवन में पारदर्शिता और संवाद आवश्यक हैं। यदि पति या पत्नी परिवार की आर्थिक स्थिति को समझने के लिए खर्चों का हिसाब मांगते हैं, तो इसे स्वतः ही क्रूरता नहीं कहा जा सकता।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि क्रूरता का निर्धारण संदर्भ, व्यवहार की निरंतरता और उद्देश्य के आधार पर किया जाना चाहिए न कि किसी एक घटना से। अदालत ने यह अंतर भी रेखांकित किया कि उत्पीड़न और जवाबदेह संवाद में फर्क होता है।

यदि हिसाब मांगने का तरीका अपमानजनक, धमकीपूर्ण या नियंत्रणकारी हो, तो स्थिति अलग हो सकती है। लेकिन सामान्य, शालीन और पारिवारिक हित में किया गया प्रश्न क्रूरता की परिभाषा में नहीं आता।

कानून की दृष्टि से ‘क्रूरता’ क्या है?

सुप्रीम कोर्ट का चौंकाने वाला फैसला: SC का बयान रहा कि हिंदू विवाह अधिनियम और संबंधित कानूनों के तहत क्रूरता का अर्थ केवल शारीरिक हिंसा नहीं है बल्कि मानसिक क्रूरता भी इसमें शामिल है।

कोर्ट ने कहा कि मानसिक क्रूरता सिद्ध करने के लिए यह दिखाना आवश्यक होता है कि व्यवहार इतना गंभीर और लगातार था कि उससे वैवाहिक जीवन असहनीय हो गया।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी दोहराया कि हर असहमति या असुविधा को क्रूरता नहीं कहा जा सकता है।

महंगाई के ज़माने में बचत है जरुरी

सुप्रीम कोर्ट का चौंकाने वाला फैसला: आज के समय में जब महंगाई, भविष्य की सुरक्षा और बच्चों की शिक्षा जैसे मुद्दे परिवार के केंद्र में हैं और इसके लिए आर्थिक योजना अनिवार्य है।

कोर्ट ने पारिवारिक हित में फैसला देते हुए कहा कि पति-पत्नी दोनों की आय, खर्च और बचत पर चर्चा स्वस्थ वैवाहिक जीवन की पहचान हो सकती है।

अदालत का यह फैसला इस सोच पर बल देता है कि जिम्मेदार बातचीत को कानूनी डर के साये में नहीं डाला जाना चाहिए।

SC का फैसला बना सामाजिक संदेश

सुप्रीम कोर्ट का चौंकाने वाला फैसला: यह निर्णय केवल एक कानूनी व्याख्या नहीं, बल्कि सामाजिक संदेश भी है। यह बताता है कि वैवाहिक रिश्तों में संवाद को अपराध के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए।

साथ ही, यह भी चेतावनी देता है कि संवाद की आड़ में किसी भी प्रकार का दमन स्वीकार्य नहीं होगा, क्योंकि परिवार में संतुलन बनाएं रखना ही असली कुंजी है।

क्या महिलाओं के अधिकारों पर होगा असर?

कुछ आलोचकों ने आशंका जताई कि इस फैसले से महिलाओं के अधिकार कमजोर हो सकते हैं। लेकिन अदालत ने साफ किया कि हर मामले का मूल्यांकन उसके तथ्यों के आधार पर होगा।

यदि खर्च का हिसाब मांगना उत्पीड़न का माध्यम बनता है, तो कानून संरक्षण देगा। यह फैसला अधिकारों को सीमित नहीं करता, बल्कि विवेकपूर्ण प्रयोग पर जोर देता है।

सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश विवाह को युद्धभूमि नहीं बल्कि सहयोग का मंच मानने की दिशा में एक कदम है। खर्च का हिसाब पूछना यदि सम्मान और समझदारी के साथ हो, तो वह रिश्ते को मजबूत कर सकता है।

कानून का उद्देश्य रिश्तों को तोड़ना नहीं, बल्कि उन्हें न्यायपूर्ण ढंग से संतुलित रखना है। इस फैसले ने स्पष्ट कर दिया है कि हर सवाल क्रूरता नहीं होता, कभी-कभी वह जिम्मेदारी की अभिव्यक्ति भी हो सकता है।

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Channel Join Now
Muskaan Gupta
Muskaan Guptahttps://reportbharathindi.com/
मुस्कान डिजिटल जर्नलिस्ट / कंटेंट क्रिएटर मुस्कान एक डिजिटल जर्नलिस्ट और कंटेंट क्रिएटर हैं, जो न्यूज़ और करंट अफेयर्स की रिपोर्टिंग में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 2 साल का अनुभव है। इस दौरान उन्होंने राजनीति, सामाजिक मुद्दे, प्रशासन, क्राइम, धर्म, फैक्ट चेक और रिसर्च बेस्ड स्टोरीज़ पर लगातार काम किया है। मुस्कान ने जमीनी रिपोर्टिंग के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए प्रभावशाली कंटेंट तैयार किया है। उन्होंने दिल्ली विधानसभा चुनाव और अन्य राजनीतिक घटनाक्रमों की कवरेज की है और जनता की राय को प्राथमिकता देते हुए रिपोर्टिंग की है। वर्तमान में वह डिजिटल मीडिया के लिए न्यूज़ स्टोरीज़, वीडियो स्क्रिप्ट्स और विश्लेषणात्मक कंटेंट पर काम कर रही हैं। इसके साथ ही वे इंटरव्यू, फील्ड रिपोर्टिंग और सोशल मीडिया जर्नलिज़्म में भी दक्ष हैं। मुस्कान का फोकस तथ्यात्मक, प्रभावशाली और जनहित से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने लाने पर रहता है।
- Advertisement -
- Advertisement -

Latest article