Thursday, February 5, 2026

डॉ आनंद रंगनाथन बायोग्राफी: विज्ञान, राष्ट्र और अभिव्यक्ति की आज़ादी की निर्भीक आवाज़

डॉ आनंद रंगनाथन बायोग्राफी: विज्ञान की प्रयोगशालाओं में वर्षों तक तथ्यों से जूझने वाला एक वैज्ञानिक, जब अचानक टीवी स्टूडियो और वैचारिक बहसों के केंद्र में आ खड़ा होता है, तो वह सिर्फ पेशा नहीं बदलता वह विमर्श की दिशा बदल देता है।

जिसने अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में काम किया, लेकिन देश के इतिहास, संस्कृति और बौद्धिक स्वतंत्रता पर हो रही चुप्पी को स्वीकार नहीं किया।

जिसने सत्ता में रहते हुए नहीं, बल्कि सत्ता से बाहर रहकर विचारों की राजनीति की।

जिसने बिना चुनाव लड़े, बिना किसी पद के, टीवी बहसों और लेखनी के ज़रिए लाखों लोगों की सोच को झकझोर दिया।

जिसे उसकी तीखी ज़ुबान, बेबाक सवालों और तथ्यों से लैस तर्कों के कारण कोई समर्थन करता है, तो कोई विरोध लेकिन नज़रअंदाज़ कोई नहीं कर पाता।

जिसे समर्थक राष्ट्रवादी विचारों की मज़बूत आवाज़ मानते हैं और आलोचक असहज करने वाला प्रश्नकर्ता।

जी हाँ, हम बात कर रहे हैं डॉ. आनंद रंगनाथन की जिसने प्रयोगशाला से निकलकर वैचारिक रणभूमि में अपनी अलग पहचान बनाई।

व्यक्तिगत विवरण

विवरणजानकारी
पूरा नामआनंद रंगनाथन
जन्म तिथि4 दिसंबर 1972
आयु53 वर्ष
जन्म स्थानतमिलनाडु, भारत
पेशावैज्ञानिक, लेखक, स्तंभकार, सार्वजनिक बुद्धिजीवी, राजनीतिक टिप्पणीकार
मातादर्शन रंगनाथन
पिताडॉ. सुब्रमनिआ रंगनाथन
धर्म / राष्ट्रीयताहिन्दू / भारतीय

प्रारंभिक जीवन और पारिवारिक पृष्ठभूमि

डॉ. आनंद रंगनाथन का जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ जहाँ शिक्षा, अनुशासन और वैज्ञानिक सोच जीवन का अभिन्न हिस्सा थे।

उनके पिता, स्वर्गीय प्रोफेसर सुब्रमणिया रंगनाथन, आईआईटी कानपुर में एक प्रख्यात जैव-कार्बनिक रसायनज्ञ थे, जबकि उनकी माता, स्वर्गीय डॉ. दर्शन रंगनाथन, स्वयं एक अग्रणी कार्बनिक रसायन वैज्ञानिक थीं।

ऐसे वातावरण में पले-बढ़े आनंद रंगनाथन में बचपन से ही विज्ञान, तर्क और विश्लेषणात्मक सोच के प्रति गहरा झुकाव दिखाई देता है। उनके शुरुआती वर्ष किसी वैचारिक सक्रियता से अधिक अकादमिक कठोरता और बौद्धिक अनुशासन से प्रभावित रहे।

उनका विवाह शीतल रंगनाथन से हुआ है, जिनका स्वास्थ्य और विज्ञान संचार के क्षेत्र में अनुभव रहा है।

शिक्षा की मज़बूत नींव

डॉ आनंद रंगनाथन बायोग्राफी: आनंद रंगनाथन की शैक्षणिक योग्यता ही उनके तर्कों की रीढ़ है।

  • भारत से केमिकल इंजीनियरिंग में स्नातक।
  • रसायन विज्ञान (Chemistry) में पोस्ट-ग्रेजुएशन।
  • कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय (UK) से मॉलिक्यूलर बायोलॉजी में पीएचडी।
  • कैम्ब्रिज और अन्य वैश्विक संस्थानों में उनके अनुभव ने उन्हें पश्चिमी और भारतीय विचारधाराओं को गहराई से समझने और उनका विश्लेषण करने की क्षमता दी।

वैज्ञानिक के रूप में करियर

सार्वजनिक जीवन में आने से पहले डॉ. आनंद रंगनाथन ने कई वर्षों तक एक पेशेवर वैज्ञानिक के रूप में कार्य किया।

  • उन्होंने फार्मास्युटिकल रिसर्च और ड्रग डिस्कवरी के क्षेत्र में काम किया
  • उनका शोध आणविक औषध विज्ञान, जीवविज्ञान और रासायनिक विश्लेषण पर केंद्रित रहा
  • अंतरराष्ट्रीय स्तर की पीयर-रिव्यू जर्नल्स में उनके शोध प्रकाशित हुए
  • आँकड़ों पर आधारित निर्णय, साक्ष्यों की प्रधानता और वैचारिक हठधर्मिता के प्रति स्वाभाविक संदेह।

आज भी वे सार्वजनिक बहसों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तर्क और अनुभवजन्य प्रमाणों पर विशेष ज़ोर देते हैं।

विज्ञान से सार्वजनिक विमर्श की ओर

डॉ आनंद रंगनाथन बायोग्राफी: एक सफल वैज्ञानिक करियर के बावजूद, समय के साथ डॉ. आनंद रंगनाथन का झुकाव लेखन और सार्वजनिक विमर्श की ओर बढ़ता गया।

इसके पीछे उनकी कुछ गहरी चिंताएँ थीं, जिनमें प्रमुख थीं:

  • भारतीय इतिहास का विकृतिकरण
  • शिक्षा और अकादमिक संस्थानों में वामपंथी वैचारिक वर्चस्व
  • धर्मनिरपेक्षता की चयनात्मक और असंतुलित व्याख्या
  • असहमत विचारों को दबाने की प्रवृत्ति

उन्होंने पहले कॉलम और निबंध लिखने शुरू किए, और बाद में टेलीविजन बहसों में सक्रिय भागीदारी की। जटिल मुद्दों को सरल, सीधे और प्रभावशाली शब्दों में रखने की उनकी क्षमता ने उन्हें बहुत जल्दी राष्ट्रीय पहचान दिलाई।

राजनीतिक और वैचारिक दृष्टिकोण

डॉ. रंगनाथन ने कभी चुनाव नहीं लड़ा, लेकिन वे भारतीय राजनीति के ‘बौद्धिक ध्रुवीकरण’ का केंद्र हैं।

उनकी विचारधारा के मुख्य स्तंभ हैं:

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद: वे भारत की प्राचीन सभ्यता को गर्व के साथ प्रस्तुत करने के पक्षधर हैं।

समान नागरिक संहिता (UCC): वे धर्म के आधार पर अलग कानूनों के सख्त खिलाफ हैं और कानून के समक्ष सबकी समानता की वकालत करते हैं।

तुष्टीकरण का विरोध: वे राजनीतिक दलों द्वारा किए जाने वाले वोट बैंक के खेल और चयनात्मक न्याय की कड़ी आलोचना करते हैं।

प्रमुख वैचारिक दृष्टिकोण

  1. वक्फ एक्ट (Waqf Act)

उनका सबसे कड़ा प्रहार इसी पर रहता है। वे इसे “संविधान के भीतर एक काला कानून” कहते हैं।

उनका तर्क है कि यह बोर्ड को असीमित शक्तियाँ देता है कि वे किसी भी ज़मीन पर दावा कर सकें और पीड़ित व्यक्ति सामान्य कोर्ट नहीं जा सकता।

  1. प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट, 1991

वे इस कानून को “अन्यायपूर्ण” मानते हैं। उनका कहना है कि यह कानून हिंदुओं को उनके उन मंदिरों को वापस पाने के कानूनी अधिकार से रोकता है जिन्हें ऐतिहासिक रूप से नष्ट किया गया था।

वे इसे “सत्य पर पर्दा डालने” जैसा मानते हैं।

  1. ‘सेलेक्टिव’ सेक्युलरिज्म

उनका कहना है कि भारत में सेक्युलरिज्म का मतलब “सिर्फ हिंदुओं पर कानून थोपना” बनकर रह गया है। वे सवाल करते हैं कि अगर देश धर्मनिरपेक्ष है, तो सरकार सिर्फ मंदिरों का पैसा क्यों लेती है? चर्च या मस्जिद का क्यों नहीं?

  1. अभिव्यक्ति की आज़ादी (Free Speech)

उनका सीधा मंत्र है: “सब कुछ बोलने की आज़ादी होनी चाहिए।” चाहे वह किसी को बुरा लगे या नहीं। वे ‘ईशनिंदा’ (Blasphemy) कानूनों को खत्म करने के सबसे बड़े पैरोकार हैं।

  1. वैज्ञानिक दृष्टिकोण

वे कहते हैं कि भारत तभी विश्वगुरु बनेगा जब वह ‘डेटा और रिसर्च’ पर ध्यान देगा। वे अक्सर सरकार से विज्ञान के बजट को बढ़ाने और शिक्षा में तार्किकता लाने की मांग करते हैं।

उपलब्धियां और सम्मान

उनकी प्रतिभा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है:

  • युवा वैज्ञानिक पदक (2007): भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (INSA) द्वारा।
  • युवा वैज्ञानिक (2012): वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (World Economic Forum) द्वारा।
  • कैम्ब्रिज नेहरू शताब्दी फैलोशिप: उनकी उच्च शिक्षा के दौरान।

प्रमुख पुस्तकें

आनंद रंगनाथन एक कुशल लेखक भी हैं। उन्होंने फिक्शन और नॉन-फिक्शन दोनों क्षेत्रों में प्रभावशाली काम किया है:

  • Land of the Wilted Rose (2012)
  • The Rat Eater (2019)
  • Soufflé (2023)
  • Hindus in Hindu Rashtra (2023): यह पुस्तक हाल के वर्षों में काफी चर्चा में रही है।

भारत के विस्मृत वैज्ञानिक (आगामी): इसमें वे उन वैज्ञानिकों की कहानी लाएंगे जिन्हें इतिहास ने भुला दिया।

डॉ. आनंद रंगनाथन के कुछ प्रभावशाली विचार

  • “इतिहास के साथ किए गए अन्याय को सुधारना ही एक जीवंत सभ्यता की पहचान है।”
  • “समानता का मतलब है सबके लिए एक कानून, बिना किसी धार्मिक रियायत के।”
  • वैज्ञानिक सोच का मतलब केवल लैब में काम करना नहीं, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में सच को स्वीकार करने का साहस रखना है।”

https://reportbharathindi.com/maithili-thakur-biography/ये भी पढ़ें: मैथिली ठाकुर बायोग्राफी: Gen-Z की नई ताक़त, लोक गायिका से विधायक तक का सफर

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Muskaan Gupta
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मुस्कान डिजिटल जर्नलिस्ट / कंटेंट क्रिएटर मुस्कान एक डिजिटल जर्नलिस्ट और कंटेंट क्रिएटर हैं, जो न्यूज़ और करंट अफेयर्स की रिपोर्टिंग में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 2 साल का अनुभव है। इस दौरान उन्होंने राजनीति, सामाजिक मुद्दे, प्रशासन, क्राइम, धर्म, फैक्ट चेक और रिसर्च बेस्ड स्टोरीज़ पर लगातार काम किया है। मुस्कान ने जमीनी रिपोर्टिंग के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए प्रभावशाली कंटेंट तैयार किया है। उन्होंने दिल्ली विधानसभा चुनाव और अन्य राजनीतिक घटनाक्रमों की कवरेज की है और जनता की राय को प्राथमिकता देते हुए रिपोर्टिंग की है। वर्तमान में वह डिजिटल मीडिया के लिए न्यूज़ स्टोरीज़, वीडियो स्क्रिप्ट्स और विश्लेषणात्मक कंटेंट पर काम कर रही हैं। इसके साथ ही वे इंटरव्यू, फील्ड रिपोर्टिंग और सोशल मीडिया जर्नलिज़्म में भी दक्ष हैं। मुस्कान का फोकस तथ्यात्मक, प्रभावशाली और जनहित से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने लाने पर रहता है।
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