AI की जंग में अमरीका का भरोसा: अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय मूल के उद्यमी और वाइट हाउस के AI एडवाइजर श्रीराम कृष्णन की खुले तौर पर तारीफ की है।
वाइट हाउस की क्रिस्मस पार्टी के दौरान हुई छोटी-सी बातचीत में ट्रंप ने कहा कि “AI के मामले में उनके बिना चीजें ठीक से काम नहीं करतीं।”
इस बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है।
AI नीति में श्रीराम की बढ़ती अहमियत
इस वीडियो के सामने आने के बाद यह साफ हो गया है कि अमरीका की AI रणनीति में श्रीराम कृष्णन की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है।
ट्रंप का मानना है कि अमरीका को AI के क्षेत्र में चीन जैसी तेजी से बढ़ती तकनीकी ताकतों से आगे रहना चाहिए।
इसी लक्ष्य को पाने के लिए श्रीराम जैसे विशेषज्ञों की जरूरत है, जो तकनीक और नीति दोनों को समझते हों।
AI अब सिर्फ तकनीक नहीं, सुरक्षा का मुद्दा
ट्रंप प्रशासन में AI को अब केवल नई तकनीक नहीं माना जा रहा है। इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है।
AI से जुड़े मुद्दों में अब चिप्स, डेटा सेंटर्स, डेटा सुरक्षा, निर्यात नियंत्रण और औद्योगिक नीति भी शामिल हैं। अमरीका-चीन प्रतिस्पर्धा में AI एक बड़ा हथियार बन चुका है।
वाइट हाउस में समन्वयक की भूमिका
श्रीराम कृष्णन वाइट हाउस और दूसरी सरकारी एजेंसियों के बीच तालमेल बैठाने का काम करते हैं।
वे यह सुनिश्चित करते हैं कि अलग-अलग विभागों की AI से जुड़ी नीतियां एक ही दिशा में आगे बढ़ें। इसी वजह से उन्हें ट्रंप प्रशासन में एक अहम सलाहकार माना जाता है।
H-1B नहीं, L-1 वीजा से अमरीका पहुंचे
श्रीराम 2007 में काम के लिए अमरीका पहुंचे थे। खास बात यह है कि वे H-1B वीजा पर नहीं, बल्कि L-1 वीजा पर गए थे। L-1 वीजा कंपनियों के अंदर एक देश से दूसरे देश में ट्रांसफर के लिए दिया जाता है।
यह उनकी पेशेवर यात्रा का एक अहम पड़ाव रहा।
भारतीय शिक्षा से अमरीकी नागरिकता तक
श्रीराम कृष्णन की पढ़ाई चेन्नई, तमिलनाडु में हुई। भारत में शिक्षा लेने के बाद उन्होंने अमरीका में अपना करियर बनाया।
साल 2016 में वे अमरीका के नागरिक बन गए। इसके बाद उन्हें वाइट हाउस में सीनियर पॉलिसी एडवाइजर ऑन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस नियुक्त किया गया।
भारतीय युवाओं के लिए प्रेरणा
श्रीराम कृष्णन की कहानी भारतीय युवाओं के लिए प्रेरणा है। यह दिखाती है कि मेहनत और ज्ञान के बल पर कोई भी व्यक्ति दुनिया के सबसे ताकतवर देश की नीतियों को तय करने वाली टीम का हिस्सा बन सकता है।
ट्रंप की तारीफ ने यह साबित कर दिया है कि वैश्विक मंच पर भारतीय प्रतिभा की पहचान लगातार बढ़ रही है।

