Sunday, February 15, 2026

अफगानिस्तान पाकिस्तान सीमा पर युद्ध, नए गठबंधनों की छाया में धधकती कहानी आज किस मोड़ पर फिर मुड़ेगी

अफगानिस्तान पाकिस्तान युद्ध

डूरंड रेखा पर तालिबान की ताबड़तोड़ फायरिंग

आज़ रात अफ़ग़ानिस्तान–पाकिस्तान की विवादित डूरंड रेखा पर भारी गोलीबारी हुई। तालिबान की ओर से हेलमंद और मध्य अफ़ग़ानिस्तान के कुनार प्रांतों से एक साथ फायरिंग की गई। सरहद के कई सेक्टरों में गोलाबारी की आवाज़ें लंबे समय तक गूंजती रहीं।

टोलो न्यूज़ के हवाले से तालिबान का दावा

अफ़ग़ानिस्तान के प्रमुख अख़बार टोलो न्यूज़ को दिए बयान में तालिबान प्रवक्ता ने कहा कि उनके अभियान में पाकिस्तान सेना के 11 जवान मारे गए।

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प्रवक्ता के मुताबिक़ कई पाकिस्तानी चौकियों पर क़ब्ज़ा बनाया गया है, हालांकि स्रोतों से इन दावों की पुष्टि नहीं हुई।

09 तारीख का पाकिस्तानी एयर स्ट्राइक पृष्ठभूमि में

इस उग्रता के मूल में पाकिस्तान द्वारा 09 तारीख को अफ़ग़ानिस्तान में किया गया एयर स्ट्राइक बताया जा रहा है। लक्ष्य तहरीके तालिबान पाकिस्तान के प्रमुख मौलाना नूर वली महसूद थे।

ऑपरेशन उसी समय अंजाम दिया गया, जब क्षेत्रीय तनाव पहले से बढ़ा हुआ था।

नूर वली महसूद का पलायन और ऑडियो चेतावनी

लेकिन पाक दावे से पहले ही महसूद को कार्रवाई का संकेत मिल गया। वह काबुल छोड़कर पाकिस्तान के नार्थ वेस्ट फ़्रंटियर, यानी ख़ैबर पख्तूनख्वा जा पहुँचे।

बाद में वहीं से जारी ऑडियो संदेश में उन्होंने को सुरक्षित बताया और हमले बदला लेने की चेतावनी दी।

मुत्तक़ी की भारत यात्रा के बीच सीमा पर उबाल

सीमा पर यह श्रृंखला ऐसे समय घट रही है, जब तालिबानी विदेश मंत्री आमिर ख़ान मुत्तक़ी भारत यात्रा पर हैं।

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कूटनीतिक हलकों में इस संयोग पर चर्चा तेज़ है, क्योंकि सुरक्षा समीकरणों के बीच कोई भी घटना संदेश और दबाव की राजनीति बदल सकती है।

भारत–इज़राइल पर पाक विश्लेषकों के आरोप और सुरक्षा पैक्ट

पाकिस्तान के कई विश्लेषक मानते हैं कि अफ़ग़ानिस्तान की ये कार्रवाइयाँ भारत के इशारे पर, और भारत इज़राइल के संकेत पर करवा रहा है।

अटकल है कि इज़राइल पाकिस्तान–सऊदी सुरक्षा पैक्ट की वास्तविकता परखना चाहता है, जिसमें एक पर हमला दोनों पर माना जाएगा।

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Samudra
Samudra
लेखक 'भारतीय ज्ञान परंपरा' के अध्येता हैं। वे पिछले एक दशक से सार्वजनिक विमर्श पर विश्लेषणात्मक लेखन कर रहे हैं। सांस्कृतिक सन्दर्भ में समाज, राजनीति, विचारधारा, शिक्षा, धर्म और इतिहास के प्रमुख प्रश्नों के रिसर्च बेस्ड प्रस्तुतिकरण और समाधान में वे पारंगत हैं। वे 'द पैम्फलेट' में दो वर्ष कार्य कर चुके हैं। वे विषयों को उनके ऐतिहासिक आधार, वैचारिक पृष्ठभूमि और दीर्घकालीन प्रभाव के स्तर पर परखते हैं। इसी कारण उनके राष्ट्रवादी लेख पाठक को नई दृष्टि और वैचारिक स्पष्टता भी देते हैं। उनके शोधपरक लेख अनेक मौकों पर राष्ट्रीय विमर्श की दिशा में परिवर्तनकारी सिद्ध हुए हैं।
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