माघ मेला से अविमुक्तेश्वरानंद का प्रस्थान
प्रयागराज के माघ मेला क्षेत्र में पिछले दस दिनों से चला आ रहा विवाद अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। सेक्टर नंबर चार त्रिवेणी मार्ग स्थित शिविर के बाहर धरने पर बैठे अविमुक्तेश्वरानंद ने मेला क्षेत्र से प्रस्थान करने का निर्णय ले लिया है।
धरने के बाद संगम स्नान न करने का फैसला
माघ मेला क्षेत्र में जारी घटनाक्रम के बाद अविमुक्तेश्वरानंद ने यह स्पष्ट किया कि वह अब संगम स्नान नहीं करेंगे। उनका कहना रहा कि जिस व्यवहार का सामना उन्हें और उनके साथ मौजूद लोगों को करना पड़ा, उसके बाद धार्मिक अनुष्ठान का उद्देश्य ही समाप्त हो गया।
दस दिनों तक शिविर के बाहर रहा विरोध
मौनी अमावस्या के बाद से अविमुक्तेश्वरानंद लगातार अपने शिविर के बाहर बैठे रहे। इस दौरान माघ मेला क्षेत्र में उनका विरोध प्रदर्शन चर्चा का विषय बना रहा। उनके साथ मौजूद अनुयायी और समर्थक लगातार घटनाओं को लेकर असंतोष जताते रहे।
मौनी अमावस्या के दिन हुआ था टकराव
अठारह जनवरी को मौनी अमावस्या के स्नान पर्व के दौरान अविमुक्तेश्वरानंद अपने साथियों के साथ संगम की ओर बढ़ रहे थे। इसी दौरान संगम क्षेत्र से पहले ही उनके काफिले को रोक दिया गया, जिसके बाद स्थिति तेजी से तनावपूर्ण हो गई।
धक्का मुक्की और अव्यवस्था के आरोप
घटनास्थल पर पुलिस और उनके साथ मौजूद लोगों के बीच धक्का मुक्की होने की बात सामने आई। स्थिति बिगड़ने के साथ ही कई लोगों को रोके जाने और मेला क्षेत्र में अव्यवस्था फैलने की चर्चा हुई, जिससे पूरे घटनाक्रम ने गंभीर रूप ले लिया।
शिष्यों और बटुकों के साथ दुर्व्यवहार के आरोप
विवाद के दौरान कुछ शिष्यों और बटुकों के साथ दुर्व्यवहार के आरोप भी सामने आए। कहा गया कि कुछ लोगों को जबरन अलग किया गया और उनके साथ कठोर व्यवहार हुआ, जिससे नाराजगी और गहराती चली गई।
संगम क्षेत्र से बाहर पहुंचाने का घटनाक्रम
इस पूरे प्रकरण के बाद अविमुक्तेश्वरानंद को संगम क्षेत्र से बाहर ले जाया गया। कुछ समय बाद उन्हें सेक्टर नंबर चार स्थित शिविर के बाहर छोड़ा गया, जिसके बाद उन्होंने वहीं बैठकर विरोध जारी रखने का निर्णय लिया।
वैनिटी वैन से दैनिक गतिविधियां संचालित
धरने के दौरान पूजा पाठ और दैनिक आवश्यकताओं के लिए शिविर के बाहर खड़ी वैनिटी वैन का उपयोग किया जाता रहा। मेला क्षेत्र में उनका पूरा दिन इसी व्यवस्था के माध्यम से गुजरता रहा और विरोध प्रदर्शन लगातार जारी रहा।
समर्थन में साधु संतों की उपस्थिति
धरने के दौरान मेला क्षेत्र में साधु संतों की आवाजाही बनी रही। शिविर के बाहर धार्मिक गतिविधियां हुईं और विरोध को समर्थन देने के लिए विभिन्न समूहों की मौजूदगी देखने को मिली, जिससे मामला और अधिक सार्वजनिक होता चला गया।
दसवें दिन मेला छोड़ने की घोषणा
लगातार चले धरने और घटनाक्रम के बाद आखिरकार दसवें दिन अविमुक्तेश्वरानंद ने माघ मेला छोड़ने की घोषणा कर दी। उनके अनुसार मौजूदा परिस्थितियों में मेला क्षेत्र में बने रहना निरर्थक हो गया है और इसी कारण प्रस्थान का निर्णय लिया गया।

