यूएन की रिपोर्ट में खुलासा: संयुक्त राष्ट्र के ड्रग्स और अपराध निरोधक कार्यालय (UNODC) और यूएन वीमेन ने मिलकर जो नई रिपोर्ट जारी की है,
वह दुनिया भर में महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2024 में ही 50 हज़ार महिलाएं और लड़कियां अपने ही घर में, अपने ही परिवार या अंतरंग साथी के हाथों मारी गईं।
यह संख्या सिर्फ आंकड़ा नहीं, बल्कि उन लाखों महिलाओं की त्रासदी है, जिनके लिए जीवन का सबसे सुरक्षित ठिकाना माने जाने वाला घर, सबसे खतरनाक जगह बन चुका है।
रिपोर्ट कहती है कि दुनिया में हर 10 मिनट में 1 महिला या लड़की की हत्या कर दी जाती है। सोचिए इतने कम समय में एक पूरी जिंदगी खत्म हो जाती है,
एक परिवार उजड़ जाता है और एक समाज का भविष्य डर के साये में चले जाता है। वैश्विक प्रतिबद्धताओं के बावजूद इतने सालों में हालातों में कोई खास सुधार नहीं दिखता।
यूएन की रिपोर्ट में खुलासा: 83 हज़ार महिलाओं और लड़कियों की हत्या
वर्ष 2024 में कुल 83 हज़ार महिलाओं और लड़कियों की जान जानबूझकर ली गई, जिनमें से 60 प्रतिशत हत्याओं को उनके अंतरंग साथी या परिवार के लोगों ने अंजाम दिया।
दुनिया के कई कोनों में, विशेष रूप से अफ्रीका में, हालात सबसे भयावह हैं। जहां हर एक लाख महिलाओं में से लगभग तीन की हत्या घर के भीतर ही हो जाती है।
यूरोप में यह संख्या कम है, लेकिन खतरा फिर भी बना हुआ है।
दूसरी ओर पुरुषों में घर के भीतर परिवार के सदस्य द्वारा हत्या होने का आंकड़ा सिर्फ 11 प्रतिशत है।
यह तुलना साफ बताती है कि घरेलू हिंसा का सबसे बड़ा निशाना महिलाएं ही हैं और यह हिंसा धीरे-धीरे, चुपचाप, कई बार बिना किसी आवाज़ के शुरू होती है।
बने सख्त कानून
यूएन वीमेन की नीति विभाग की निदेशक सारा हैंड्रिक्स बताती हैं कि महिलाओं की हत्या कोई अचानक होने वाली घटना नहीं होती।
यह एक लंबी हिंसक यात्रा का अंतिम पड़ाव होता है, जिसकी शुरुआत कई बार नियंत्रण करने वाले व्यवहार,
धमकियों, अपमान, पीछा करने, या ऑनलाइन दुर्व्यवहार से होती है। वे कहती हैं कि आज डिजिटल दुनिया ने हिंसा का नया रूप दे दिया है।
ऑनलाइन उत्पीड़न सिर्फ स्क्रीन तक सीमित नहीं रहता, यह असल जिंदगी में उतरकर जानलेवा साबित हो सकता है।
सारा हैंड्रिक्स कहती हैं कि हर लड़की और महिला को सुरक्षित रहने का अधिकार है चाहे वह घर हो, सड़क हो,
कार्यस्थल हो या इंटरनेट, पर यह अधिकार तभी वास्तविकता बनेगा जब देशों के कानून न सिर्फ कड़े हों,
बल्कि उनके लागू होने में भी सख्ती दिखाई दे। ऑनलाइन और ऑफलाइन हिंसा की पूरी तस्वीर को समझकर अपराधियों की जवाबदेही तय करना जरूरी है।
UNODC के कार्यवाहक निदेशक जॉन ब्रांडोलिनो कहते हैं कि दुनिया भर की कई महिलाओं के लिए घर, आज भी एक खौफ की जगह है।
जहां बाहर के खतरों की नहीं, बल्कि अपने ही लोगों की हिंसा का डर रहता है।
उन्होंने यह भी माना कि घर के बाहर होने वाली महिलाओं की हत्याओं के आंकड़े बेहद कम हैं क्योंकि कई देशों में उनका व्यवस्थित रिकॉर्ड ही नहीं रखा जाता।
अपने घर में असुरक्षित
यही वजह है कि यूएन वीमेन और UNODC, 2022 में बनाए गए वैश्विक सांख्यिकीय ढांचे के ज़रिए बेहतर डेटा इकट्ठा करने पर काम कर रहे हैं,
ताकि असली समस्या की गहराई को समझा जा सकें और उसे मिटाने के प्रभावी कदम उठाए जा सकें।
सटीक डेटा ही वह आधार है, जिससे पीड़ितों को न्याय दिलाया जा सकता है और समाज के लिए मजबूत नीतियां बनाई जा सकती हैं।
रिपोर्ट का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि महिलाएं अक्सर वहीं मारी जाती हैं, जहां उन्हें सबसे ज्यादा सुरक्षित होना चाहिए था, अपने घर में।
वहां, जहां प्यार, सम्मान और सुरक्षा की उम्मीद होती है, वहीं कभी-कभी डर, हिंसा और मौत उनका इंतजार कर रहे होते हैं।
यह रिपोर्ट सिर्फ आंकड़े नहीं देती, बल्कि यह संदेश देती है कि दुनिया भर में महिलाओं की सुरक्षा आज भी एक बड़ी चुनौती है।
यह बताती है कि घरेलू हिंसा एक निजी मामला नहीं, बल्कि एक वैश्विक संकट है जिसे समझने और मिटाने के लिए पूरे समाज, सरकारों और कानूनी प्रणालियों को मिलकर काम करना होगा।

