उमर खालिद
राजस्थान के कई मुस्लिम संगठनों ने कांग्रेस आलाकमान से मांग की है कि जेल में बंद पूर्व जेएनयू छात्र नेता और एक्टिविस्ट उमर खालिद को राज्य से खाली हो रही राज्यसभा सीट पर भेजा जाए। संगठनों का कहना है कि इससे राजनीतिक संदेश जाएगा।
सोमवार को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी को लिखे गए पत्र में कहा गया कि ऐसा फैसला संवैधानिक मूल्यों और समावेशी राजनीति के प्रति पार्टी की प्रतिबद्धता को दिखाएगा। राजस्थान मुस्लिम एलायंस के अध्यक्ष मोहसिन राशिद टोंक ने इस मांग को औपचारिक रूप दिया।
मुस्लिम वोट बैंक और प्रतिनिधित्व का तर्क
मोहसिन राशिद टोंक ने 2023 के राजस्थान विधानसभा चुनाव के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि मुस्लिम मतदाताओं ने कांग्रेस के वोट बैंक में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। इसलिए पार्टी को प्रतिनिधित्व के जरिए इस हिस्सेदारी को स्वीकार करना चाहिए।
मुस्लिम प्रोग्रेसिव फोरम के अध्यक्ष अब्दुल सलाम जोहर ने भी इसी मांग का समर्थन किया। उनका कहना है कि पार्टी को मुस्लिम मतदाताओं की चुनावी भूमिका को केवल समर्थन के रूप में नहीं, बल्कि प्रतिनिधित्व देकर सार्वजनिक तौर पर मान्यता देनी चाहिए।
राजनीतिक गणित और उमर खालिद की मौजूदा स्थिति
जून में राजस्थान से राज्यसभा की तीन सीटें खाली हो जाएंगी। मौजूदा विधानसभा स्थिति के हिसाब से भारतीय जनता पार्टी को दो सीटें और कांग्रेस को एक सीट मिलने की संभावना है। संगठनों ने कहा कि इसी सीट पर उमर खालिद पर विचार होना चाहिए।
उमर खालिद जेएनयू छात्र नेता हैं। वह सीएए एनआरसी विरोधी आंदोलन का चेहरा रहे। दिल्ली पुलिस ने उन्हें 2020 दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में यूएपीए के तहत गिरफ्तार किया था। फिलहाल वह जेल में बंद हैं और उनकी जमानत याचिका खारिज हो चुकी है।

