उदित नारायण बायोग्राफी: डिजिटल ऑटो-ट्यून और मशीनी शोर से कोसों दूर, एक वो दौर था जब बॉलीवुड फिल्मों की रूह पर्दे के पीछे गा रहे गायक की आवाज़ में बसती थी।
बिहार के सुपौल जिले के एक छोटे से गांव बैसी की धूल भरी गलियों से निकला एक लड़का, घंटों ट्रांजिस्टर के पास बैठकर पुरानी किंवदंतियों के साथ सुर मिलाया करता था।
उसका सपना महज़ मशहूर होना नहीं था, बल्कि अपनी आवाज़ को करोड़ों भारतीयों की धड़कन बनाना था।
मगर मायानगरी मुंबई की राह आसान नहीं थी। करीब एक दशक तक उदित नारायण रिकॉर्डिंग स्टूडियो के गलियारों में एक ‘गुमनाम मुसाफ़िर’ की तरह भटकते रहे।
उन्हें यह कहकर कई बार नकारा गया कि उनकी आवाज़ 70 के दशक के ‘एंग्री यंग मैन’ वाले दौर के हिसाब से “बहुत पतली” या “ज़्यादा ही मीठी” है,
लेकिन मिथिला की लोक-धुनों में रचे-बसे इस कलाकार ने अपनी अटूट मुस्कान और कड़ी मेहनत से संघर्ष के हर बंद दरवाज़े को खोलकर ही दम लिया।
साल 1988 में ‘कयामत से कयामत तक’ की अपार सफलता ने उदित को रातों-रात बुलंदियों पर पहुँचा दिया।
वे भारतीय संगीत जगत के इकलौते ऐसे पुरुष गायक बने जिन्होंने लगातार तीन दशकों तक फिल्मफेयर अवार्ड्स जीतकर इतिहास रचा।
34 भाषाओं में 25,000 से अधिक गीतों के साथ, उन्होंने शाहरुख, आमिर और सलमान को पर्दे पर रोमांटिक पहचान दी।
आज उदित नारायण महज़ एक नाम नहीं, बल्कि भारतीय पार्श्व गायन की वो रेशमी विरासत हैं जिसने संगीत को एक नई परिभाषा दी।
व्यक्तिगत जानकारी
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| पूरा नाम | उदित नारायण झा |
| जन्म तिथि | 1 दिसंबर, 1955 |
| जन्म स्थान | बैसी गांव, सुपौल, बिहार, भारत |
| आयु | 70 वर्ष |
| पहचान | दिग्गज पार्श्व गायक |
| सक्रिय वर्ष | 1970 का दशक – वर्तमान |
| कुल संपत्ति (2026) | लगभग ₹150 से ₹200 करोड़ |
| मुख्य सम्मान | पद्म भूषण, पद्म श्री, 5 राष्ट्रीय पुरस्कार |
| पिता | हरे कृष्ण झा |
| माता | भुवनेश्वरी देवी |
| वैवाहिक स्थिति | विवाहित |
| बच्चे | आदित्य नारायण |
| राष्ट्रीयता | नेपाली-भारतीय |
| धर्म | हिन्दू धर्म |
पारिवारिक पृष्ठभूमि और जड़ें
उदित नारायण का जन्म 1 दिसंबर, 1955 को एक मध्यमवर्गीय मैथिल ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनकी कहानी भारत और नेपाल की सीमाओं के बीच बुनी गई है।
दो देशों का संगम
पिता (हरे कृष्ण झा): उनके पिता नेपाल के सप्तरी जिले के मूल निवासी थे। वे चाहते थे कि उदित पढ़-लिखकर कोई “स्थिर” सरकारी नौकरी या चिकित्सा (Medicine) के क्षेत्र में जाएं,
क्योंकि उस दौर में संगीत को करियर के रूप में देखना एक जोखिम भरा सपना माना जाता था।
माता (भुवनेश्वरी देवी): उदित की माँ भारत के बिहार राज्य के सुपौल जिले की रहने वाली थीं। उदित का जन्म असल में अपने ननिहाल (बैसी गांव, बिहार) में हुआ था।
यही कारण है कि वे जन्म से भारतीय नागरिक हैं, लेकिन उनकी जड़ें नेपाल से भी उतनी ही मजबूती से जुड़ी हैं।
संगीत की पहली गुरु: माँ
उदित नारायण को संगीत विरासत में मिला था। उनकी माँ, भुवनेश्वरी देवी, एक बेहद प्रभावशाली लोक गायिका थीं।
बचपन में उदित ने संगीत की कोई औपचारिक शिक्षा किसी बड़े संस्थान से नहीं, बल्कि अपनी माँ को गाते हुए सुनकर ली।
मिथिलांचल के पारंपरिक मैथिली गीत, सोहर और भजन उनकी रगों में बसे हुए थे। उनकी आवाज़ में जो ‘मिठास’ और शब्दों का साफ ‘उच्चारण’ है, वह उसी मिट्टी और लोक संगीत की देन है।
शुरुआती शिक्षा और नींव
उदित की शुरुआती पढ़ाई और संघर्ष के दिन नेपाल और बिहार के बीच बंटे रहे:
नेपाल में शिक्षा: उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा नेपाल के राजबिराज स्थित पी.बी. स्कूल से पूरी की। वे स्कूल में एक शांत छात्र थे,
लेकिन अक्सर क्लास के बीच में ही गुनगुनाते हुए पाए जाते थे।
काठमांडू का सफर: आगे की पढ़ाई के लिए वे काठमांडू चले गए, जहाँ उन्होंने रत्ना राज्य लक्ष्मी कैंपस से इंटरमीडिएट किया।
यहीं से उन्होंने रेडियो नेपाल में एक स्टाफ कलाकार के रूप में काम करना शुरू किया और लोक गायक के रूप में अपनी पहचान बनाई।
मुंबई की छात्रवृत्ति (Scholarship): उनकी प्रतिभा को देखते हुए काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने उन्हें संगीत की उच्च शिक्षा के लिए स्कॉलरशिप दी, जिससे उनके लिए मुंबई (1978) के रास्ते खुले।
उदित नारायण का करियर किसी मैराथन की तरह है—धीमी शुरुआत, लेकिन एक ऐसी रफ़्तार जिसने तीन दशकों तक सबको पीछे छोड़ दिया।
आइए, उनके 40 साल से ज़्यादा लंबे फिल्मी सफर को पड़ाव दर पड़ाव समझते हैं।
संघर्ष
चॉल की जिंदगी और रिजेक्शन (1978-1988)
उदित मुंबई की एक तंग चॉल में रहते थे। वे मीलों पैदल चलकर स्टूडियो जाते क्योंकि जेब में बस के पैसे नहीं होते थे।
उस दौर के संगीतकारों ने उन्हें यह कहकर बार-बार रिजेक्ट किया कि उनकी आवाज़ “बहुत पतली और मीठी” है और बड़े हीरो पर नहीं जमेगी।
‘कोरस’ से ‘एक्टर’ तक का सफर
काम न मिलने के कारण उन्होंने कई सालों तक गानों के पीछे ‘कोरस’ (भीड़) में गाया। निराश होकर वे नेपाल लौट गए।
वहां की फिल्म ‘कुसुमे रुमाल’ (1985) में बतौर हीरो काम किया और सुपरस्टार बने, लेकिन उनका असली सपना बॉलीवुड में ‘सिंगर’ बनना ही था।
आखिरी मौका और कामयाबी
1988 में ‘कयामत से कयामत तक’ उनके लिए ‘आर या पार’ का मौका था। आमिर खान के लिए गाए गाने “पापा कहते हैं” ने रातों-रात 10 साल के संघर्ष को खत्म कर दिया और उन्हें बॉलीवुड का ‘प्लेबैक किंग’ बना दिया।
करियर टाइमलाईन
1970-1977: ‘रेडियो नेपाल’ का दौर (शुरुआत)
महज़ 15 साल की उम्र: उदित ने अपने करियर की शुरुआत नेपाल में एक ‘स्टाफ आर्टिस्ट’ के रूप में की।
लोकप्रियता: वे काठमांडू के होटलों और रेडियो पर मैथिली और नेपाली लोक गीत गाकर वहां के स्थानीय स्टार बन गए थे। उनकी पहली तनख्वाह सिर्फ 100 रुपये थी।
1978-1987: मुंबई का संघर्ष और ‘चॉल’ के दिन
1978: भारतीय दूतावास की स्कॉलरशिप पाकर मुंबई आए और ‘भारतीय विद्या भवन’ में शास्त्रीय संगीत सीखना शुरू किया।
1980 (पहला ब्रेक): फिल्म ‘उन्नीस-बीस’ में उन्हें अपने आदर्श मोहम्मद रफी के साथ गाने का मौका मिला। गाना था— “मिल गया मिल गया”।
1983-1985: उन्होंने लता मंगेशकर और किशोर कुमार जैसे दिग्गजों के साथ कुछ गाने रिकॉर्ड किए, लेकिन वे अभी भी ‘बैकग्राउंड’ सिंगर ही बने रहे।
1985 (नेपाली सुपरस्टार): जब बॉलीवुड में बात नहीं बनी, तो उन्होंने नेपाली फिल्म ‘कुसुमे रुमाल’ में हीरो के तौर पर काम किया।
फिल्म ब्लॉकबस्टर रही, लेकिन उनका सपना प्लेबैक सिंगर बनना ही था।
1988-1989: ‘द बिग बैंग’ (सफलता का आगाज़)
किस्मत का पल: फिल्म ‘कयामत से कयामत तक’ (QSQT) रिलीज हुई।
पापा कहते हैं: इस एक गाने ने पूरे देश में तहलका मचा दिया। उदित आमिर खान की आधिकारिक आवाज़ बन गए और उन्होंने अपना पहला फिल्मफेयर अवार्ड जीता।
यहीं से बॉलीवुड में “चॉकलेट बॉय” आवाज़ का दौर शुरू हुआ।
1990 – 1999: ‘रोमांस के निर्विवाद बादशाह’ (स्वर्ण युग)
यह दशक पूरी तरह उदित नारायण के नाम रहा। वे तीनों खानों (शाहरुख, सलमान, आमिर) की रूहानी आवाज़ बन गए:
1990-1992: ‘दिल’ (मुझे नींद ना आए) और ‘जो जीता वही सिकंदर’ (पहला नशा) जैसे गानों ने उन्हें हर प्रेमी की पसंद बना दिया।
1995: ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ (मेहंदी लगा के रखना) के लिए दूसरा फिल्मफेयर जीता।
1996: ‘राजा हिंदुस्तानी’ (परदेसी परदेसी) के लिए तीसरा फिल्मफेयर।
ब्लॉकबस्टर फिल्में: ‘दिल तो पागल है’, ‘कुछ कुछ होता है’ और ‘हम दिल दे चुके सनम’ जैसी फिल्मों से वे इंडस्ट्री के सबसे महंगे और व्यस्त गायक बन गए।
2000-2010: ‘राष्ट्रीय सम्मान’ और प्रतिष्ठा
2001: ‘लगान’ (मितवा) और ‘दिल चाहता है’ के लिए उन्हें अपना पहला नेशनल अवार्ड मिला।
लगातार जीत: 2002 में ‘जिंदगी खूबसूरत है’ और 2004 में ‘स्वदेस’ (ये तारा वो तारा) के लिए लगातार नेशनल अवार्ड्स जीते।
नागरिक सम्मान: 2009 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया।
2011-2026: ‘लिविंग लेजेंड’ और मेंटर का दौर
रियलिटी शोज: उदित ‘इंडियन आइडल’ और ‘सा रे गा मा पा’ जैसे शोज में जज बनकर नई पीढ़ी का मार्गदर्शन करने लगे।
पद्म भूषण (2016): उन्हें भारत के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजा गया।
2020-2026: आज भी उदित नारायण सक्रिय हैं। 2021 में ‘टिप टिप बरसा पानी’ के रीमेक ने साबित किया कि उनकी आवाज़ आज भी उतनी ही फ्रेश है।
2025-26 में भी वे बड़े बजट की फिल्मों और क्षेत्रीय सिनेमा (भोजपुरी, मैथिली) के लिए रिकॉर्डिंग कर रहे हैं।
एवरग्रीन जुगलबंदी
90 के दशक की आवाज़: अगर 90 के दशक में कोई भी रोमांटिक गाना सुपरहिट हुआ, तो 90% चांस है कि उसे इन्हीं दोनों ने गाया था। शाहरुख-काजोल से लेकर आमिर-जूही तक, हर बड़ी जोड़ी की ‘रूह’ इन्हीं की आवाज़ थी।
सुरों के ‘लता-रफी’: संगीत के जानकार इनकी तुलना महान लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी की जोड़ी से करते हैं। इनकी आवाज़ें एक-दूसरे में इस तरह घुल जाती थीं कि लगता था ये एक-दूसरे के लिए ही बने हैं।
मज़ेदार नोकझोंक: उदित जी स्वभाव से बहुत शरारती हैं और रिकॉर्डिंग के दौरान अलका जी को बहुत हंसाते थे।
आज भी रियलिटी शोज (जैसे इंडियन आइडल) में उनकी ‘खट्टी-मीठी’ तकरार और उदित जी का मज़ाक में अलका को “अपना पहला प्यार” बताना दर्शकों को खूब पसंद आता है।
हज़ारों हिट गाने: ‘परदेसी परदेसी’, ‘मेहंदी लगा के रखना’, ‘ताल से ताल मिला’ और ‘कुछ कुछ होता है’ जैसे कालजयी गानों ने इस जोड़ी को अमर बना दिया।
विवाद
दो शादियों का विवाद (रंजना झा मामला)
उदित ने 1984 में बिहार में रंजना झा से पहली शादी की थी, जिसे उन्होंने सालों तक छिपाए रखा। 1985 में उन्होंने दीपा (आदित्य की माँ) से दूसरी शादी कर ली।
2006 में रंजना के सार्वजनिक विरोध के बाद उदित ने उन्हें पत्नी स्वीकार किया, लेकिन हाल ही में (फरवरी 2026) रंजना ने उन पर धोखे से उनका गर्भाशय (Uterus) निकलवाने का गंभीर आरोप लगाकर नया केस दर्ज कराया है।
‘टिप टिप बरसा पानी’ किस विवाद (2025)
जनवरी 2025 में एक लाइव कॉन्सर्ट के दौरान उदित नारायण का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वे एक महिला फैन को होठों पर चूमते नजर आए।
सोशल मीडिया पर उन्हें “सीरियल किसर” कहकर काफी ट्रोल किया गया, हालांकि उदित ने इसे प्रशंसकों के प्रति “शुद्ध प्रेम” बताकर माफी मांगने से इनकार कर दिया।
नागरिकता पर सवाल
चूंकि उनके पिता नेपाली और माता भारतीय थीं, इसलिए अक्सर उनकी नागरिकता पर विवाद हुआ। 2009 में ‘पद्म श्री’ मिलने पर विरोध हुआ कि वे नेपाली हैं,
लेकिन उदित ने साफ किया कि उनका जन्म बिहार (भारत) में हुआ है, इसलिए वे जन्मजात भारतीय हैं।
पुरस्कार और सम्मान
बड़े नागरिक सम्मान
उदित जी को भारत के दो सबसे प्रतिष्ठित नागरिक पुरस्कार मिले हैं।
पद्म भूषण (2016): भारत का तीसरा सबसे बड़ा सम्मान।
पद्म श्री (2009): कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए।
नेपाल का सम्मान: उन्हें नेपाल का भी सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘प्रबल गोरखा दक्षिणा बाहु’ मिला है।
फिल्म अवार्ड्स का रिकॉर्ड
5 राष्ट्रीय पुरस्कार (National Awards): ‘मितवा’ (लगान) और ‘ये तारा वो तारा’ (स्वदेस) जैसे गानों के लिए।
5 फिल्मफेयर अवार्ड्स: उन्होंने 80, 90 और 2000, तीनों दशकों में फिल्मफेयर जीतकर इतिहास रचा है।
बीबीसी रिकॉर्ड: उनके 21 गाने बीबीसी की ‘सर्वकालिक सर्वश्रेष्ठ 40 बॉलीवुड गानों’ की सूची में शामिल हैं।
भाषा और गानों का जादू
उन्होंने 34 भाषाओं में 25,000 से अधिक गाने गाए हैं।
उन्होंने एक ही दिन में 21 गाने रिकॉर्ड करने का अद्भुत कारनामा किया है।
साथियों के साथ संबंध
अलका याग्निक (परफेक्ट जोड़ी)
इन्हें 90 के दशक की सबसे सफल जोड़ी माना जाता है। उदित जी रिकॉर्डिंग के दौरान अलका को अपनी शरारतों से बहुत हंसाते थे।
आज भी रियलिटी शोज में इनकी ‘खट्टी-मीठी’ नोकझोंक दर्शकों को खूब पसंद आती है।
कुमार सानू (स्वस्थ प्रतिस्पर्धा)
भले ही फैंस के बीच ‘उदित vs सानू’ की जंग रहती थी, लेकिन असल में दोनों पक्के दोस्त हैं। सानू ने खुद कहा है कि उनके बीच मुकाबला सिर्फ ‘काम’ को लेकर था, मन में कोई कड़वाहट नहीं। आज भी दोनों साथ में वर्ल्ड टूर करते हैं।
तीनों खान (शाहरुख, आमिर, सलमान)
उदित जी इन तीनों सुपरस्टार्स की ‘आधिकारिक आवाज़’ रहे हैं। आमिर को ‘QSQT’, शाहरुख को ‘DDLJ’ और सलमान को ‘तेरे नाम’ जैसे गानों से रोमांटिक पहचान दिलाने में उदित की आवाज़ का सबसे बड़ा हाथ है।
नई पीढ़ी के मेंटर
सोनू निगम, शान और श्रेया घोषाल जैसे कलाकार उन्हें अपना आदर्श मानते हैं। श्रेया घोषाल ने तो उनसे “आवाज़ में मुस्कान” लाने की कला सीखी है। वे इंडस्ट्री के सबसे खुशमिजाज और विनम्र सीनियर माने जाते हैं।
5 अनकहे पहलू
25 पैसे से शुरुआत: बचपन में उदित इतने साधारण थे कि वे अपने गांव के मेलों में गाने के लिए मात्र 25 पैसे लिया करते थे। आज उनकी नेट वर्थ करीब ₹150-200 करोड़ है।
असली ‘हीरो’ डेब्यू: बॉलीवुड में आने से पहले वे नेपाल के सुपरस्टार बन चुके थे। 1985 की ब्लॉकबस्टर नेपाली फिल्म ‘कुसुमे रुमाल’ में वे मुख्य अभिनेता (Hero) थे।
हॉलीवुड का गाना: उदित जी ने केवल भारतीय भाषाओं में ही नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र अंग्रेजी फिल्म ‘व्हेन हैरी ट्राइज टू मैरी’ (2011) के लिए भी गाना गाया है।
21 गानों का रिकॉर्ड: उनके काम करने की रफ़्तार ऐसी थी कि उन्होंने अपने करियर के चरम पर एक ही दिन में 21 गाने रिकॉर्ड किए थे, जो आज की पीढ़ी के लिए एक सपना है।
एक और जानलेवा हादसा (2025): जनवरी 2025 में उदित जी की मुंबई स्थित बिल्डिंग (अंधेरी) में भीषण आग लग गई थी।
11वें फ्लोर पर रहने वाले उदित जी ने लिफ्ट बंद होने के बाद अपनी 108 वर्षीय माँ को धुएं के बीच सीढ़ियों से उतारकर उनकी जान बचाई थी।
By: Snigda
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