ट्रम्प का राजनीतिक खेल: नोबेल प्राइज को लेकर अब एक नया विवाद शुरू हो गया है। वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो ने व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात कर उन्हें अपना नोबेल शांति पुरस्कार भेंटस्वरुप दिया है।
सेकेंडहैंड नोबलप्राइज मिला उपहार
ट्रम्प का राजनीतिक खेल: ट्रम्प को यह मैडल मिलते ही राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज़ हो गयी,और नोबल प्राइज का मुद्दा गरमा गया।
क्योकि डोनाल्ड को यह नोबल पुरुस्कार किसी नोबेल कमेटी की तरफ से नहीं, बल्कि वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो ने गिफ्ट किया है, जो उन्होंने जीता था।
बता दें की , पिछले साल शांति पुरस्कारों की घोषणा से पहले ट्रंप ने कई बार सात युद्ध रुकवाने का दावा किया था।
उनका कहना था कि एक ‘पीसमेकर’ होने के नाते उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार दिया जाना चाहिए, लेकिन जब यह पुरस्कार उनके बजाए वेनेजुएला की विपक्षी नेता को मिल दिया गया तो ट्रम्प इसे बर्दाश्त नहीं कर पाए।
उन्होंने व्हाइट हाउस से आरोप लगाया था कि नोबेल समिति ने शांति के बजाए राजनीति को तवज्जो दी है।
ट्रम्प का राजनीतिक खेल: मैडल के लिए किया मारिया का धन्यवाद
वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना से मिले नोबल पुरुस्कार के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने उनका धन्यवाद करते हुए कहा कि यह आपसी सम्मान का अनूठा अनोखा अद्वितीय असाधारण अलौकिक भाव है।
उन्होंने आगे कहा कि ” मारिया कोरिना मचाडो से मिलना बहुत सम्मान की बात है, वह एक अद्भुत महिला हैं, जिन्होंने बहुत कुछ सहा है।”
मचाडो का नोबेल,ट्रम्प का नाम क्यों ?
ट्रम्प का राजनीतिक खेल: आपको बता दें कि ट्रंप पहले भी कई बार सार्वजनिक रूप से नोबेल शांति पुरस्कार पाने की अपनी इच्छा जता चुके हैं।
इसी इच्छा के चलते मचाडो ने वॉशिंगटन में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि उन्होंने यह नोबेल शांति पुरस्कार राष्ट्रपति ट्रंप को सौंपा है।
वहीँ व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि ट्रंप भी इस नोबेल शांति पुरस्कार के मेडल को अपने पास रखने का इरादा रखते हैं।
समर्थन कि चाह में नोबल का उपहार ?
बता दें कि, वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो लंबे समय से राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की सरकार के दमन का सामना करती रही हैं।
कई बार तो उन्हें मादुरो की कार्रवाइयों से बचने के लिए महीनों तक छिपकर रहना पड़ा था।
इसके बाद साल की शुरुआत में जैसे ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने निकोलस मादुरो को उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस के साथ गिरफ्तार किया तो मचाडो को भरोसा हो गया कि ट्रंप वेनेजुएला की सत्ता उन्हें सौंपेंगे। मगर ऐसा हुआ नहीं और वेनेजुएला की सत्ता उनकी जगह उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज को सौंप दी गयी।
जिसके बाद ऐसे अनुमान लगाए जा रहे है कि मचाडो ट्रंप को अपना यह नोबेल मेडल सौंपकर उनका समर्थन हासिल करना चाहती हैं।
नोबेल मेडल और राजनीति: क्या मचाडो इसे दे सकती हैं?
ट्रम्प का राजनीतिक खेल: नोबेल संस्थान का साफ कहना है कि मारिया कोरिना अपना नोबेल पुरस्कार डोनाल्ड ट्रंप को नहीं दे सकतीं है। भले ही ट्रंप लंबे समय से इस सम्मान को पाने की इच्छा जताते रहे हों, पर कानूनी तौर पर ऐसा करना संभव नहीं है।
अगर मचाडो यह कदम केवल प्रतीकात्मक रूप में भी उठाती हैं, तो भी यह असाधारण माना जाएगा। इसकी वजह यह है कि ट्रंप ने हाल के घटनाक्रमों में मचाडो को लगभग हाशिये पर डाल दिया है, जबकि वे लंबे समय से वेनेजुएला में लोकतांत्रिक बदलाव की सबसे प्रमुख आवाज़ मानी जाती रही हैं।
ऐसे में नोबेल मेडल सौंपना महज़ एक औपचारिक इशारा नहीं होगा, बल्कि एक गहरा राजनीतिक संदेश भी होगा।
नोबेल प्राइज कमिटी के नियम
द नोबेल पीस प्राइज की वेबसाइट में दी गई जानकारी के मुताबिक नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी नोबेल को लेकर फैसले लेती है।
नोबेल फाउंडेशन के नियमों की धारा 10 के अनुसार, ‘किसी पुरस्कार को दिए जाने के संबंध में पुरस्कार देने वाली संस्था के फैसले के खिलाफ कोई अपील नहीं की जा सकती।
नियमों में साफ बताया गया है कि कमेटी इस पर कोई टिप्पणी नहीं करेगी कि शांति पुरस्कार विजेता, पुरस्कार मिलने के बाद उसका क्या करते हैं या उसके बारे में क्या कहते हैं।
हालाँकि इन पुरुस्कारों को लेकर संस्था ने कुछ नियम जरूर बनाए गए हैं, जिनके अनुसार :
एक बार नोबेल पुरस्कार देने के बाद उसे वापस नहीं लिया जा सकता
नोबेल पुरस्कार किसी के भी साथ साझा नहीं किया जा सकता है, और न ही इसे किसी दूसरे को ट्रांसफर किया जा सकता हैं
एक बार नोबेल प्राइज ऐलान होने के बाद इसे अंतिम माना जायेगा

