होर्मुज स्ट्रेट पर ट्रंप का 48 घंटे का अल्टीमेटम: अमेरिका और ईरान के बीच पिछले 23 दिनों से जारी संघर्ष अब अपने सबसे खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है।
रविवार (22 मार्च) को ट्रुथ सोशल पर जारी अपने बयान में ट्रंप ने ईरान को महज 48 घंटों का समय दिया है।
उन्होंने दो टूक कहा कि यदि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से अपनी घेराबंदी नहीं हटाई, तो अमेरिका ईरान के सबसे बड़े बिजली संयंत्र (Power Plant) से हमले की शुरुआत करेगा और उसके पूरे ऊर्जा ढांचे को मलबे में तब्दील कर देगा।
यह सवाल अब पूरी दुनिया के सामने है, क्या ईरान इस विनाशकारी सैन्य कार्रवाई के डर से पीछे हटेगा या टकराव का रास्ता चुनेगा?
वैश्विक अर्थव्यवस्था की रग पर ईरान का हाथ
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग, होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह ब्लॉक कर दिया है। यह वही रास्ता है जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा गुजरता है।
ईरान इसे एक ढाल की तरह इस्तेमाल कर रहा है, जिससे तेल की कीमतें लगभग 114 डॉलर प्रति बैरल के तक पहुंच गई हैं।
ट्रंप का मानना है कि ईरान की यह ब्लैकमेलिंग वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए खतरा है और इसे सैन्य शक्ति के बिना नहीं सुलझाया जा सकता।
ईरान की जवाबी घेराबंदी
ईरान ने अमेरिका की धमकी के आगे झुकने के बजाय और अधिक आक्रामक रुख अपनाया है।
ईरानी सैन्य प्रवक्ता ने साफ कर दिया है कि यदि उनके पावर प्लांट्स पर एक भी मिसाइल गिरी, तो वे क्षेत्र में मौजूद सभी अमेरिकी और इजरायली ऊर्जा केंद्रों, आईटी हब और पानी साफ करने वाले (Desalination) प्लांट्स को नष्ट कर देंगे।
ईरान की यह सुसाइडल धमकी दर्शाती है कि वह आसानी से सरेंडर करने के मूड में नहीं है, भले ही इसके लिए उसे एक पूर्ण युद्ध (Full-scale War) क्यों न लड़ना पड़े।
खार्ग द्वीप पर अमेरिकी एक्शन
होर्मुज स्ट्रेट पर ट्रंप का 48 घंटे का अल्टीमेटम: अमेरिका ने हाल ही में ईरान के खार्ग द्वीप (Kharg Island) पर स्थित मिसाइल और माइन स्टोरेज सुविधाओं को तबाह कर दिया है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस कार्रवाई से ईरान की जलमार्ग को लंबे समय तक बंद रखने की तकनीकी क्षमता घटी है।
ट्रंप प्रशासन का यह कदम यह दिखाने के लिए था कि अमेरिका केवल जुबानी चेतावनी नहीं दे रहा, बल्कि जमीन पर कार्रवाई शुरू कर चुका है।
तेल बाजार को राहत की कोशिश
तनाव के बीच, अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने ईरानी तेल पर लगे कुछ प्रतिबंधों को अस्थायी रूप से हटाने की घोषणा की है।
इस छूट से बाजार में करीब 14 करोड़ बैरल तेल आने की उम्मीद है। यह ट्रंप प्रशासन की एक सोची-समझी चाल है।
एक तरफ सैन्य दबाव (Hard Power) और दूसरी तरफ आर्थिक लचीलापन (Soft Power), ताकि युद्ध की स्थिति में भी दुनिया को ऊर्जा संकट से बचाया जा सके।
मिडिल ईस्ट युद्ध के चलते भविष्य अंधकार की ओर
होर्मुज स्ट्रेट पर ट्रंप का 48 घंटे का अल्टीमेटम: ईरान के पास अब दो ही रास्ते बचे हैं, या तो वह अंतरराष्ट्रीय दबाव और अमेरिकी सैन्य शक्ति के आगे झुककर होर्मुज स्ट्रेट को खोल दे, या फिर अपने ऊर्जा ढांचे की तबाही का जोखिम उठाकर युद्ध में कूद पड़े।
यदि युद्ध छिड़ता है, तो इसकी आंच केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि यूरोप से लेकर एशिया तक महंगाई और आर्थिक मंदी का एक ऐसा चक्र शुरू होगा जिसे संभालना मुश्किल होगा।
अगले 48 घंटे तय करेंगे कि दुनिया शांति की ओर बढ़ेगी या एक और महाविनाशकारी युद्ध की ओर अग्रसर होगी।
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