रेलवे में बढ़ता भ्रष्टाचार-पिछले कुछ वर्षों में हर स्टेशन के नवनिर्माण की योजना अधिकारियों पर धन की अमृत वर्षा कर रही है, अतः इसका नाम अमृत भारत योजना रखा गया है।
रेलवे में अच्छा भोजन मिलना हुआ दुर्लभ
२०-२५ वर्ष पूर्व ट्रेन में सामान्य कम मसाला का भोजन मिल जाता था। उसके अतिरिक्त हर बड़े स्टेशन पर कई प्रकार का भोजन या नाश्ता मिल जाता था। पर रेल कैटरिंग निगम ने सबको भगा कर स्टेशन तथा ट्रेन दोनों की भोजन सप्लाई अपने हाथ में ले ली है। अब अच्छे भोजन के नाम पर नकली पनीर, कम सब्जी किन्तु अत्यधिक मसाला मिलता है।
राजधानी एक्सप्रेस के भोजन से बीमार होने की इतनी घटनायें हुई कि भोजन लेने की बाध्यता बन्द करनी पड़ी। एक घटना में भुवनेश्वर राजधानी एक्सप्रेस के मेरे पूरे कोच के यात्रियों को खड़गपुर में खाना फेंकना पड़ा तथा सभी ने प्लेट फार्म पर बन रही पूड़ी सब्जी खायी जो अच्छी नहीं थी पर जान बच सकती थी।
अतः रेलवे ने सभी स्टेशनों के ठेले वालों को भगा कर अपने हाथ में व्यवसाय लिया तथा तीन गुने दाम पर अधिक खराब भोजन देना आरम्भ किया।
टिकट ब्लैक से टिकट मिलना हुआ दुर्लभ
पहले टीटीई ५० या १०० रुपए लेकर यात्री को खाली सीट दे देते थे। इस घूस पर रेलवे की दृष्टि पड़ी तो तत्काल टिकट के नाम पर घूस दर ५ गुणा बढ़ाया। तत्काल टिकट दलालों के अतिरिक्त किसी अन्य के लिए लेना प्रायः असम्भव है। १० बजते है रेलवे का वेबसाइट काम करना तब तक बन्द रखता है, जब तक सभी सीट भर न जाए। कभी कभी यात्री नहीं मिलते तो एक सीट मिल जाती है।
पहले टीटीई ईमानदारी से घूस लेते थे। खाली सीट उपलब्ध रहने पर ही पैसा लेकर देते थे। अब खाली नहीं रहने पर भी अतिरिक्त पैसा लेकर रिजर्व सीट पर ही वैध यात्री के साथ बैठा कर कहते हैं कि थोड़ी देर के लिए बैठने दें।
ट्रेन यात्रा का बुरा अनुभव
कल पटना एर्नाकुलम एक्सप्रेस में पटना से भुवनेश्वर आ रहा था। ३-टियर बर्थ के ६ बर्थ पर ४ अतिरिक्त लोगों को बैठा दिया। शिकायत करने पर एक टीटीई आये, बिना टिकट वालों से कुछ नहीं पूछा। केवल मेरे बारे में विस्तार से पूछताछ की।
बिना टिकट वालों से १-१ हजार लेकर बैठा दिया। उसके बाद उसी कोच में ७२ वैध यात्रियों के साथ ५० से अधिक बिना टिकट वालों को रख दिया। आधे बर्थ पर २-२ व्यक्ति सोये, तथा बाकी फर्श पर चादर बिछा कर सोये।
दो बार शिकायत करने पर धमका कर और अधिक बिना टिकट वालों को भर दिया जिससे बाथरूम जाना या गन्तव्य पर उतरना भी कठिन हो गया।
आरपीएफ में कितनी भी कमी हो वे अतिरिक्त यात्रियों को निकालते थे तथा सुरक्षा की पूरी व्यवस्था करते थे। रेल मंत्रालय को भी शिकायत करने पर ५ मिनट के भीतर धमका कर रिपोर्ट देते हैं कि समाधान हो गया।
– पूर्व IPS श्री अरुण कुमार उपाध्याय का अनुभव

