एक पॉडकास्ट के दौरान तेज प्रताप यादव ने अपनी राजनीतिक और व्यक्तिगत जिंदगी के बारे में खुलकर बात की।
उन्होंने पार्टी की हार, परिवार के भीतर की राजनीति, भाजपा और कांग्रेस पर अपने विचार, और भविष्य की रणनीति तक सब कुछ साझा किया।
बातचीत में परिवार की बातें हल्की पर असरदार तरीके से शामिल रहीं, जिससे यह पता चलता है कि तेज प्रताप सिर्फ नेता नहीं, बल्कि परिवार और राजनीति के बीच संतुलन बनाने वाले इंसान भी हैं।
चुनावी हार और आरजेडी में फूट
तेज प्रताप यादव ने स्पष्ट किया कि आरजेडी के हालिया चुनाव में केवल 25 सीटों पर सीमित रहने के पीछे पार्टी में भीतर की फूट और विरोधी “जयचंदों” का हाथ रहा। उन्होंने कहा, “दुश्मन बाहर नहीं, घर में ही है।
पांच-छह लोग हमारी हार की वजह बने।” तेज प्रताप ने यह भी माना कि यदि पार्टी के भीतर मतभेद और व्यक्तिगत संघर्ष न होते तो परिणाम भिन्न हो सकते थे।
उन्होंने यह साफ किया कि उनकी अलग लाइन खींचने की वजह यही है कि उन्होंने अपने परिवार और राजनीतिक समझ के आधार पर अलग राह चुनी।
उनके अनुसार, जब तक सम्मान और मान मिलता है, व्यक्ति उसी ढांचे में रहता है, और जब यह नहीं मिलता, तो अपने रास्ते पर जाना ही बेहतर होता है।
परिवार और व्यक्तिगत जीवन
तेज प्रताप यादव ने अपने परिवार और व्यक्तिगत जीवन के अनुभव भी साझा किए। उन्होंने बताया कि चुनाव के बाद उन्होंने दही-चूड़ा के कार्यक्रमों में हिस्सा लिया और अपने माता-पिता से आशीर्वाद लिया।
उन्होंने बताया कि उनके लिए परिवार का महत्व सर्वोपरि है। उनकी बहन रोहिणी आचार्य की कहानी का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि परिवार के भीतर संघर्ष और बाहरी हस्तक्षेप के बावजूद रिश्तों का महत्व हमेशा बना रहता है।
उन्होंने यह भी साझा किया कि परिवार में उनके छोटे भाई तेजस्वी यादव और अन्य सदस्यों के साथ संबंधों में भावनात्मक जुड़ाव है। तेज प्रताप ने बताया कि वे परिवार में ईश्वर का दर्जा देते हैं और राजनीतिक पॉलिसी अलग रखते हैं।
सोशल मीडिया और ब्लॉगिंग: युवा से कनेक्शन
तेज प्रताप यादव ने सोशल मीडिया और ब्लॉगिंग को राजनीतिक और व्यक्तिगत प्रभाव बढ़ाने का माध्यम बताया।
उन्होंने अपने टी वाई व्लॉग के जरिए युवाओं से सीधे संवाद करने की रणनीति साझा की।
उनका कहना था कि चुनाव हारने के बावजूद उन्होंने इस माध्यम को अपनाया ताकि युवा उनसे जुड़ सकें और वे अपनी बातें सीधे जनता तक पहुंचा सकें।
वे बताते हैं कि ब्लॉगिंग और व्लॉगिंग में उन्हें मज़ा आता है, और यह उन्हें युवा पीढ़ी के करीब लाता है। उन्होंने कहा, “हम युवा हैं, नौजवान हैं, इसलिए इस माध्यम से लोगों से जुड़ना जरूरी है।”
भाजपा और मोदी एंगल
तेज प्रताप यादव ने भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि वे हार के पीछे ईवीएम या किसी पार्टी के खेल को दोष नहीं मानते।
उनका कहना है कि भाजपा के खिलाफ कोई कट्टर भावना नहीं है, लेकिन बिहार और देश के भविष्य को देखते हुए वे किसी भी फैसले का समर्थन कर सकते हैं जो राज्य और जनता के हित में हो।
मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा की राजनीति को उन्होंने जागरूकता और सत्ता का संतुलन समझने के नजरिए से देखा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में अगर बिहार के हित में कोई रणनीति बनती है, तो वे उसका समर्थन करेंगे, चाहे वह किसी भी पार्टी द्वारा हो।
कांग्रेस और प्रियंका गांधी
तेज प्रताप ने कांग्रेस और राहुल गांधी, प्रियंका गांधी पर भी टिप्पणी की। उन्होंने राहुल गांधी के नेतृत्व और व्यक्तिगत व्यवहार पर अपनी असहमति जताई और प्रियंका गांधी को अधिक प्रभावशाली और सशक्त नेता माना। उनका कहना था कि प्रियंका गांधी में इंदिरा गांधी जैसी छवि और राजनीति की समझ है, जो उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत बनाती है।
तेज प्रताप ने यह भी कहा कि कांग्रेस पार्टी को हिंदू प्रतीकों, जैसे तिलक और चंदन, का सम्मान करना चाहिए ताकि धर्म और संस्कृति के दृष्टिकोण से जनता से जुड़ाव बना रहे।
अखिलेश यादव और अन्य बाहरी राजनीतिक संकेत
साक्षात्कार में तेज प्रताप ने यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का जिक्र करते हुए कहा कि अन्य राज्यों की राजनीति और गठबंधन बनाने की रणनीति बिहार के बाहर भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने संकेत दिया कि वे राष्ट्रीय और बाहरी राज्यों की राजनीति में अपने प्रभाव को बढ़ाने की योजना बना रहे हैं और किसी भी राजनीतिक परिस्थिति में बिहार के हितों को ध्यान में रखेंगे।
वे यह भी मानते हैं कि अन्य राज्यों में गठबंधन और सहयोग की भूमिका महत्वपूर्ण होगी, और उन्होंने अपने अनुभव और रणनीतिक समझ के आधार पर आगे की राजनीति की तैयारी की बात कही।
जीत और हार से सीख
तेज प्रताप ने हार और जीत को जीवन के सामान्य हिस्से के रूप में देखा। उन्होंने कहा कि हार से सीख लेना महत्वपूर्ण है, और इसके आधार पर भविष्य में रणनीति तय करनी चाहिए। उन्होंने यह भी साझा किया कि चुनाव के दौरान पार्टी के भीतर कई कमियां थीं, जिन्हें उन्होंने सुधारने की कोशिश की।
वे बताते हैं कि हार से निराश होना या ईवीएम को दोष देना सही दृष्टिकोण नहीं है। उन्होंने साफ किया कि राजनीतिक सफलता व्यक्तिगत मेहनत, रणनीति और जनता से जुड़ाव पर निर्भर करती है।
युवा कनेक्शन और भविष्य की राजनीति
तेज प्रताप यादव ने अपने युवा कनेक्शन, स्पोर्ट्स बाइक, व्लॉगिंग और सोशल मीडिया के माध्यम से जनता के साथ सीधा संवाद करने की योजना पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि राजनीति केवल सत्ता और पद का खेल नहीं है, बल्कि जनता से जुड़ने और उनके मुद्दों को समझने का माध्यम भी है।
वे युवा और नौजवानों के साथ जुड़े रहने के लिए विभिन्न तरीकों का उपयोग कर रहे हैं, चाहे वह डिजिटल माध्यम हो या व्यक्तिगत मुलाकात। इसका उद्देश्य जनता के बीच अपना सशक्त प्रभाव बनाना और नई राजनीतिक संभावनाओं को तलाशना है।
व्यक्तिगत रुचियां और साधारण जीवन
तेज प्रताप ने अपनी व्यक्तिगत रुचियों के बारे में भी बताया। उन्होंने बताया कि उन्हें ब्लू कलर पसंद है, स्पोर्ट्स बाइक चलाना पसंद है, और अपने व्यवसाय—दूध और मैगी मसाले—में भी सक्रिय हैं। उन्होंने यह भी बताया कि राजनीति और व्यक्तिगत जीवन के बीच संतुलन बनाए रखना उनके लिए महत्वपूर्ण है।
वे मानते हैं कि राजनेता और आम जनता दोनों के लिए पारदर्शिता और व्यक्तिगत पहचान बनाए रखना जरूरी है। ब्लॉगिंग और सोशल मीडिया इसके लिए उपयोगी माध्यम हैं।
तेज प्रताप यादव की बातचीत ने यह स्पष्ट किया कि वे केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि परिवार, संस्कृति, युवा जुड़ाव और डिजिटल माध्यम के जरिए जनता से जुड़ने वाले नेता हैं। उन्होंने हार, पार्टी फूट, परिवारिक राजनीति और राष्ट्रीय दलों के दृष्टिकोण को लेकर अपनी सोच साझा की।
उनकी रणनीति स्पष्ट है: परिवार और मान-सम्मान को महत्व देते हुए अपनी अलग राह चुनना, युवा और सोशल मीडिया के जरिए जनता से जुड़ना, और बिहार के हितों को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय रहना।
तेज प्रताप यादव की यह खुली बातचीत राजनीतिक विश्लेषकों और जनता दोनों के लिए महत्वपूर्ण संकेत देती है कि वे केवल बिहार में नहीं, बल्कि देश की राजनीति में भी अपनी पहचान बनाने की तैयारी कर रहे हैं।

