स्वामी जितेंन्द्रानंद VS स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद
अंजना ओम कश्यप: मैं शंकराचार्य जी आपके पास पहले आ रही हूँ। अभी तो शंकराचार्य पर ही सवाल खड़े हो गए हैं, टाइटल पर ही सवाल खड़े हो गए कि आप शंकराचार्य हैं या नहीं है। अब मेला अथॉरिटी ने आपको इस टाइटल पर नोटिस भेज दिया है कि सुप्रीम कोर्ट ने जब 2022 में कहा था कि आपके पट्टाभिषेक पर रोक लगा दी थी। अगर पट्टाभिषेक नहीं हुआ तो आप शंकराचार्य कैसे हो सकते हैं? एक सवाल। दूसरा वो कह रहे हैं यह ‘कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट’ है, यानी अदालत की अवहेलना है। आठ पन्नों की आपने चिट्ठी जरूर की है, लेकिन हमारे दर्शकों को बताइए कि कोर्ट के रोक लगाने के बावजूद आज आप अपने आप को शंकराचार्य कैसे कह रहे हैं? यहीं से शुरू करते हैं।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद: ऐसा है अंजना जी कि सुप्रीम कोर्ट का नाम लेकर के अगर जिम्मेदार प्रशासन को बात करनी थी, तो साफ-साफ सत्य शब्दों में जो तथ्य है उसको सामने रखना चाहिए था। इन्होंने क्या किया है कि तथ्यों को छुपाते हुए कुछ बात को आगे रख के उसको भी दूसरे ढंग से प्रस्तुत किया है, जिससे जनता में यह संदेश जाए, यह भ्रम उत्पन्न हो कि संभवत इनके शंकराचार्य होने में कोई समस्या है।
सच्चाई यह है कि जिस दिन का यह आदेश सुप्रीम कोर्ट का दिखा रहे हैं, उस दिन के एक महीना से ज्यादा पहले ही हमारा ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य के रूप में अभिषेक हो चुका था और एक महीना पहले ही सुप्रीम कोर्ट को भी यह बात बता दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट में ऑन रिकॉर्ड यह बात है। जब हमारे प्रतिपक्षी स्वामी वासुदेवानंद जी महाराज, जिनसे परंपरागत मुकदमा ज्योतिष पीठ का हमारे गुरु जी महाराज के साथ चल रहा था… हम तो पार्टी ही नहीं थे, हमारे गुरु जी पार्टी थे लेकिन उनका शरीर पूरा हो गया तो उनकी जगह हमको आना था। तो उन्होंने जब हमारा अभिषेक हो गया और हम ज्योतिष पीठाधीश्वर के रूप में काम करने लगे, तो उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में आवेदन किया कि इनको रोक दिया जाए। यह योग्य नहीं है और इनको ज्योतिष पीठाधीश्वर के रूप में अपने आप को उद्घोषित करने से और तदनुसार कार्य करने से रोक दिया जाए।
21 सितंबर 2022 में यह सुनवाई हुई और सुप्रीम कोर्ट ने उनके आवेदन को निरस्त कर दिया और कहा कि यह नहीं हो सकता है। तब जाकर के 14 अक्टूबर को… 12 अक्टूबर को फिर से उन्होंने एक छद्म हलफनामा, पुरी के शंकराचार्य जी महाराज का झूठा हलफनामा बना के दाखिल किया और कहा कि इन्होंने कहा है कि इनका अभिषेक हो गया और शंकराचार्यों ने इनको समर्थन कर दिया है, लेकिन पुरी के शंकराचार्य जी का यह हलफनामा देखिए… उन्होंने कहा है कि नहीं हमने इनको मान्यता नहीं दी है।
तो कोर्ट ने देखा… उनके पास तो पटल पर पहले से ही यह जानकारी थी कि हमारा अभिषेक हो गया है और हम इस रूप में कार्य कर रहे हैं। तो उन्होंने सोचा… और इसके साथ इन्होंने प्रेयर यह भी किया केवल हमको रोकने के लिए नहीं, अबकी बार इन्होंने कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद या कोई और, कोई भी संस्था या कोई भी व्यक्ति अपने आप का पट्टाभिषेक ज्योतिष पीठ पर ना कराए इसके लिए आदेश कर दीजिए। तो सुप्रीम कोर्ट ने वह आदेश इनको दे दिया, यह कहते हुए कि जो इन्होंने मांगा था जिन शब्दों में दे दिया। ठीक है, अब क्या हुआ कि हम लोगों को पता चला, हम लोग तो थे नहीं वहां पर, एक्स-पार्टी आर्डर हो गया। हमने देखा कि ऑर्डर तो हुआ ना…
अंजना ओम कश्यप: ऑर्डर तो हुआ ना शंकराचार्य जी… अब देखिए एक सेकंड, एक सेकंड… मेरा एक सवाल सुनिए। स्थिति ये हो रही थी, ये तो तमाम तर्क इस पे दिए जा सकते हैं लेकिन आज एक सच्चाई है कि कई जो सन्यासी अखाड़े हैं वो इसके खिलाफ है, आपके खिलाफ। और जैसा आपने खुद ही कहा कि पुरी के शंकराचार्य जी थे, उन्होंने भी इससे इंकार किया। यह एक लीगल मैटर है, इसको अलग रखते हैं।
अब आते हैं असल मुद्दे पर। आपका कहना है कि आपको स्नान नहीं करने दिया गया। ये आपका कंटेंशन है कि भाई ये मेरा अपमान हो गया है, जिसकी वजह से आप यहां पर बैठे हैं। लेकिन शाही स्नान में तो पालकी से जाने की बात होती है, यहां पर तो ये शाही स्नान भी नहीं है, ये तो माघ मेला है। पुलिस कह रही है 50 मीटर की दूरी पर आप पैदल चले जाइए। आप कहते हैं नहीं हम पैदल नहीं जाएंगे, हम तो पालकी में ही जाएंगे। मतलब पुलिस तो पुलिस का काम करेगी ना? वही उसने रिक्वेस्ट किया आपसे। यह अपमान कैसे हो गया? इसके बाद मैं आ रही हूं आपके पास आचार्य जितेंन्द्रानंद जी…
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद: देखिए कहने-कहने में, एक्सेंट में बात होती है। रंजना (अंजना) जी आप तो भाषा की पंडित हैं। आप जानती हैं कि किसी वाक्य को किस ढंग से उच्चारण किया जाए तो उसका क्या अर्थ हो जाता है। उनके कहने में जो तरीका था, वह अपमानजनक तरीका था। इसीलिए हमको लगा कि यह हमारा अपमान करना चाहते हैं और बहाना दूसरी चीजों का ले रहे हैं।
अंजना ओम कश्यप: लेकिन बाकी साधु संत तो पैदल ही चल कर जा रहे थे ना। मैं इसका जवाब आपसे लेती हूं… जितेंन्द्रानंद जी, आचार्य जी आपके पास आ रही हूं। वो कह रहे हैं कि मेरा अपमान किया गया है, जिस तरह से मेरे साथ व्यवहार हुआ है। आचार्य जी, इसमें क्या गलत है? वो कह रहे हैं कि भाई गलत व्यवहार हुआ पुलिस की तरफ से।
स्वामी जितेंन्द्रानंद: दीदी, पालकी पर तो स्नान के लिए आज तक, जब से माघ मेला कुंभ लग रहा है, कोई परंपरा ही नहीं रही है। और माघ मेला में तो कोई शाही स्नान की परंपरा नहीं है। और शाही स्नान भी जो अर्ध कुंभ और कुंभ में होता है, उसमें स्नान के जो ‘डी-एरिया’ का क्षेत्र है उसके बाहर ही सारे अखाड़ों के रथ रोक दिए जाते हैं। तो आपको क्या ऐसी मजबूरी है कि 50 फीट या 50 मीटर भी आप पालकी से उतरना नहीं चाहते? और उस एरिया में जहां भगदड़ की आशंका हो, जहां पे दो नंबर पुल किस लिए था? इमरजेंसी एग्जिट है। वो इमरजेंसी एग्जिट का बैरिकेडिंग तोड़ा जाना यह किस श्रेणी का अपराध है? योगी की पुलिस नहीं, उत्तर प्रदेश सरकार की पुलिस है। योगी उत्तर प्रदेश सरकार के मुखिया हैं वर्तमान में। तो कोई भी सरकार रहती, क्या अखिलेश की पुलिस ने इनको नहीं तोड़ा था क्या? तो जब आप कानून तोड़ेंगे तो आपको सरकार तोड़ेगी।
अंजना ओम कश्यप: इसी पर जल्दी से जवाब दीजिए अविमुक्तेश्वरानंद जी। बाकी साधु संत पैदल जाकर स्नान करते हैं और माघ मेले में शाही स्नान में तो भाई परंपरा है पालकी से जाने की। यहां पर आपको क्या ऐसी दिक्कत आ गई कि आप मतलब पैदल चलकर जाने को जो पुलिस कह रही थी आप तैयार नहीं हुए? पैदल जाके स्नान करने में क्या दिक्कत है?
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद: पैदल ही जाते, हम भी पैदल ही जाते। हम तो अपने पालकी, घोड़े गंगा जी में लेके (नहीं) जाते। हम भाई पालकी से जहां तक जाना था वहां तक जाते, उसके बाद हम भी पैदल ही जाते।
अंजना ओम कश्यप: ऐसी क्या बात है? गए क्यों नहीं?
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद: तो फिर आपने इसको हमारे विवेक को… बोलिए बोलिए… क्यों? क्यों स्वीकार नहीं किया गया? क्या हमारा कोई विवेक नहीं है? गंगा जी जाने का हमारा कोई विवेक नहीं है? हमारे विवेक पर शक क्यों किया गया? हम भी तो विवेक संपन्न व्यक्ति हैं।
अंजना ओम कश्यप: अच्छा ठीक है, मान लीजिए आपके विवेक पर हम लोग भरोसा कर लिया। अगर मैं गलत हूं तो सही कीजिएगा, आपके साथ 200 समर्थक भी थे, तस्वीरें भी हम दिखा रहे हैं। पुलिस को लगा कि पैदल जाना चाहिए। पुलिस के विवेक पर भरोसा होगा या नहीं होगा? एडमिनिस्ट्रेशन और यह सब तो पुलिस और प्रशासन ही करेगा ना? वो कोई आप बार-बार कहते हैं कि पुलिस वाले थोड़ी तय करेंगे… ना कोर्ट तय करेगा, शंकराचार्य तय करेंगे… अब पुलिस प्रशासन का काम भी तो पुलिस ही करेगी ना कि आप और वो करने लगेंगे?
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद: ऐसा है कि आपको बिल्कुल जानकारी होगी, आप बहुत अनुभवी पत्रकार हैं और आपने स्वयं भी यहां पर आकर के कवर किया है। घटनाओं को देखा है। स्नान के समय यहां पर आप आकर के खड़े होकर के देखें ना, तो यहां पर झुंड के झुंड लोग आते हैं। एक गांव के लोग एक साथ रहना चाहते हैं, एक बड़े परिवार के लोग एक साथ रहना चाहते हैं, एक संस्था के जितने सारे पदाधिकारी होते हैं सब एक साथ रहना चाहते हैं। तो यहां झुंड के झुंड ही लोग आते हैं और वो झुंड में आराम से स्नान करते हैं और चले जाते हैं। दिन में सैकड़ों झुंड, आप जो करोड़ों की संख्या बता रहे हैं उसमें हजारों झुंड होंगे। जो झुंड ही जाएंगे और झुंड ही स्नान करके गए होंगे लेकिन किसी को कोई तकलीफ नहीं होती है। तो हमारे साथ अगर 10-20-50 लोग थे तो उससे कौन सी समस्या उत्पन्न हो जा रही थी? सब झुंड में ही जाते हैं, सब अपनी-अपनी पहचान कायम करके जाते हैं लोग। लोटा, डंडे में लोटा ऊपर उठा लेते हैं, उसी को देखते-देखते पूरा झुंड चला जाता है।
अंजना ओम कश्यप: हम्म, हम्म ये इसी का जवाब दीजिए ना जो वो कह रहे हैं कि झुंड के झुंड जाते हैं। इसीलिए आचार्य जितेंन्द्रानंद जी आप बोलिए। वो कह रहे हैं कि भाई मुझे ही टारगेट किया जाता है, मुझे जानबूझकर टारगेट किया है और यही मुद्दा विपक्ष उठा रहा है। अखिलेश यादव से लेकर कांग्रेस पार्टी सब कह रहे हैं कि जानबूझकर इनका अपमान किया जाता है।
स्वामी जितेंन्द्रानंद: यह वह राजनैतिक दल हैं जो मोदी और योगी के विरोध में अंधे होके देशद्रोह की सीमा तक जा सकते हैं। तो अगर इस मुद्दे पर एक मुहरा उन्होंने धर्म क्षेत्र में सेट कर लिया… और वह भी इतिहास की लंबी परंपरा है ये कांग्रेस समर्थित होने का और सारी मीडिया के पास भी इसकी सूचना है आपके यहां पर, कि वो लगातार प्रियंका गांधी से और अखिलेश यादव से वार्ता कर रहे हैं, अपनी एक-एक रणनीति कह लीजिए राजनीति की।
अच्छा बिहार में कौन सी घटना घट गई थी? 243 सीटों पर चुनाव लड़ाने के लिए गए थे कैंडिडेट लेकर के। तो राजनैतिक व्यक्ति धर्म के चोले में अगर उसे कोई राजनीति ही करनी है तो उसका हमारे पास तो इलाज नहीं है।
अंजना ओम कश्यप: अविमुक्तेश्वरानंद जी, वो कह रहे हैं कि लगातार आप संपर्क में हैं पार्टी के नेताओं से। एक पॉलिटिकल सवाल इस पर मैं अलग से भी करना चाहती हूं, लेकिन असल सवाल तो यह है ना कि आपके पास मौका था। आप कहते हैं कि अभी पुलिस ने जानबूझ के मुझे टारगेट किया, योगी की पुलिस मुझे टारगेट कर रही है। आपके पास मौका था, आप एग्जांपल देते, एग्जांपल बनाते कि भाई यह पालकी में ही क्यों जाना है? आप मुझे अगर दिक्कत है मैं पैदल चलके चला जाऊंगा, गंगा जी और आपके बीच में कोई और क्यों आए?
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद: अच्छा सुनिए। पुलिस का काम पुलिस करेगी। क्या पुलिस का यह काम है कि छोटे-छोटे वेद पाठी बटकों को चोटी पकड़ करके उनको घसीट-घसीट करके ले जाए और उनको उठा-उठा करके पटके? क्या 84 साल के बुजुर्गों के ऊपर जूतों से प्रहार करें? क्या दंडी सन्यासियों को मारपीट करें? यह पुलिस का काम है? यह पुलिस का काम किया गया है। यहां पर जो किया गया है यह पुलिस का काम होता है?
अंजना ओम कश्यप: अब देखिए वो तो वो कह रहे हैं कि पुलिस का यह काम नहीं है, पुलिस ने जिस तरह का व्यवहार किया है। स्वामी जितेंन्द्रानंद जी, आज सवाल यह है कि वह अनशन पर बैठे हुए हैं। वह तो वहां पर बैठ गए हैं। वो कह रहे हैं जब तक इज्जत के साथ मुझे स्नान के लिए नहीं ले जाया जाएगा मैं तो यहां से हिलूंगा नहीं।
स्वामी जितेंन्द्रानंद: अब पहली बात दीदी कि वो शंकराचार्य नहीं है। ना किसी अखाड़े ने, ना काशी विद्वत परिषद ने, ना शंकराचार्य परंपरा ने उन्हें स्वीकार किया है। स्वयंभू स्वयं को घोषित करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उनके अभिषेक पर रोक लगा रखी है। अभिषेक जब हुआ नहीं तो उनके वकील कुतर्क देते हैं कि अभिषेक पे रोक लगाई ना, शंकराचार्य लिखने पे नहीं लगाई। अरे भाई विवाह हुआ नहीं, पति लिखने पे रोक लगाने की बात कैसे आ जाएगी? जब आपका अभिषेक ही नहीं हुआ और आपने ही कार्ड बांटे थे… अखबारों में आपके मीडिया ने बयान जारी किया कि 17 अक्टूबर को होगा। तो सुप्रीम कोर्ट ने उसी 17 अक्टूबर को आधार मान के 14 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करके रोक लगा दी और उस रोक की बकायदा व्याख्या… उन्होंने कहा मेरे नाम से नहीं किया, तो हाई कोर्ट ने बकायदा इनका नाम लिखते हुए कि ‘स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती’ और ये शंकराचार्य के किसी रिचुअल… अगर आपको चाहिए तो मैं अभी भी हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के दोनों आर्डर दिखा सकता हूं और मीडिया में नेगेटिव बयानबाजी के चलते अपने नाम के आगे शंकराचार्य लिखने का जो परंपरा है यह सनातन धर्म के लिए बहुत घातक है।
अंजना ओम कश्यप: ठीक है, ठीक है। ये तो खैर वो खुद ही कह रहे हैं कि कोर्ट… शंकराचार्य हैं, ठीक है। कोर्ट ने रोक लगाई थी। वो कह रहे हैं पट्टाभिषेक पर रोक लगाई थी। लेकिन उस दिन वो इसके लिए नहीं जा रहे थे। अच्छा आपको जानबूझकर लग रहा है अविमुक्तेश्वरानंद जी? क्यों टारगेट करेंगे आपको जानबूझकर? ऐसा क्या है? आप मतलब क्यों आप ही को क्यों टारगेट कर रही है योगी की सरकार? योगी की पुलिस क्या है ऐसा? क्या किया आपने?
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद: हां जी बस यही बात है। जानबूझकर के टारगेट किया गया। क्यों? और क्योंकि हम गौ रक्षा की बात उठा रहे हैं। गौ रक्षा के लिए आवाज दृढ़ता से उठाते चले जा रहे हैं। और केंद्र और प्रदेश की सरकारें जो भाजपा शासित हैं वो गौ रक्षा करना नहीं चाहती हैं। इसीलिए उनको हमारी आवाज से समस्या हो रही है और इसीलिए वह हमको लक्ष्य कर रहे हैं। मूल बात यह है।
अंजना ओम कश्यप: अच्छा ठीक है। आचार्य जितेंन्द्रानंद जी वो कह रहे हैं कि उनकी आवाज, वो गौ रक्षा के लिए आवाज उठा रहे हैं इसलिए उनके खिलाफ है। अब आप इस बात का जवाब दीजिए कि भाई एक तबका है ना जो इनके साथ खड़ा है। भाई कांग्रेस हो, समाजवादी पार्टी हो, यह सारे उनका साथ दे रहे हैं और बहुत सारे लोग हैं। अब एक बड़ा बवाल यह खड़ा हो गया है। वो तो वहां पर बैठ गए हैं। यह सब उनका साथ दे रहे हैं।
स्वामी जितेंन्द्रानंद: तो बनना भी चाहिए। वो तो पाकिस्तान के भी आवाज हैं। वो तो देशद्रोहियों के भी आवाज हैं। कश्मीर से धारा 370 जो हटी है वो नहीं हटनी चाहिए, यह भी कहने वाले हैं। वह तो मुख्तार अंसारी और अतीक अहमद जैसे माफिया और गुंडों की भी आवाज है कि उसकी न्यायिक जांच कराई जानी चाहिए। वह तो सारे सेकुलरों की भी आवाज है कि प्रधानमंत्री को राम मंदिर के उद्घाटन में नहीं जाना चाहिए। हां, राम जन्मभूमि के नाम पर उन्होंने सोना इकट्ठा किया, जो सुप्रीम कोर्ट का आदेश क्या है? गवर्नमेंट ऑफ इंडिया को क्या आदेश है राम जन्मभूमि के संदर्भ में संविधान बेंच के सर्वसमत फैसले का? कि भारत सरकार का गृह मंत्रालय एक ट्रस्ट बनाए, वो ट्रस्ट मंदिर का निर्माण करेगा। आपने पहले से अपने ‘रामालय ट्रस्ट’ में सोना इकट्ठा करना शुरू कर दिया। समाज को कभी हिसाब दिया? सार्वजनिक को प्रेस करके बताया कितना सोना लिया था? जब एनएसए लगाने की धमकी सरकारों ने दी तब इन्होंने ये वसूली बंद की। तो ये धर्म को धंधे में बदल करके और एंटी नेशनल गैंग की आवाज बन जाना… वो आवाज के लिए तो सोशल मीडिया पर पाकिस्तान से लेकर के टर्की तक से संचालन किया जा सकता है।
अंजना ओम कश्यप: लेकिन आचार्य जितेंन्द्रानंद जी वो एंटी बीजेपी आवास के तौर पर अगर आप उनको देखिए… और वह तो कह रहे हैं कि हमको बीजेपी साथ तो दे। बीजेपी वाले कहे कि हां भाई गलत हुआ। एक वहां पर जा रहे थे अगर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी तो जाने देते उनको स्नान करने पालकी में। तो वो कह रहे बीजेपी साथ दे।
स्वामी जितेंन्द्रानंद: क्या? अच्छा एक बात बताइए… अच्छा अब किस बात का अपमान हुआ? आप दो नंबर पुल को तोड़ रहे हैं। आपके बटुक पुलिस की कॉलर पे हाथ डाल रहे हैं, मारपीट झगड़ा कर रहे हैं। और आप रथ पर बैठकर के कह रहे हो कि आगे बढ़ो आगे बढ़ो। और कह रहे हो कि अपमान हुआ है। कौन? यहां पुरी के शंकराचार्य जी भी हैं। सुमेरू पीठ के शंकराचार्य नरेंद्रानंद जी भी हैं। सभी अखाड़, कई जगदगुरु यहां पे हैं। सभी चुपचाप नहाने गए, पैदल गए, नहा करके चले आए। किसी ने किसी को रोका टोका? शाही स्नान अर्ध कुंभ और कुंभ में होता है। माघ मेले में आज तक कोई रथ और हाथी घोड़ा पालकी लेकर के नहीं गया नहाने। तुम्हें ही चुल्ल ऐसी क्यों मची है भाई? मेला खराब करने की? यहां पे भगदड़ मचने की चुल्ल क्यों मची है?
सीधी-सीधी सी बात है, आप राजनीतिक दलों के हथियार हो। एंटी मोदी, एंटी योगी… सुबह से शाम तक आप कहते हो कि योगी सन्यासी नहीं है। यह भी सर्टिफिकेट बांटने का काम अपने हाथ में ले रखा है। जिस प्रदेश में जाओ जिसके बारे में मन हो जो मन हो वही बोलते रहो और विशेषकर हिंदू समाज के बारे में, विश्व हिंदू परिषद इनकी नजर में संगठन नहीं है। आरएसएस के बारे में सुबह से शाम तक मोहन राव भागवत से लेकर के अशोक सिंघल तक को गालियां देना इनका धंधा बना हुआ है। तो इस धंधे के बदले इनके पीछे मुसलमान सपोर्ट में तो खड़ा रहेगा ना।
अंजना ओम कश्यप: चलिए इसका जवाब दीजिए अविमुक्तेश्वरानंद जी। वो कह रहे हैं कि आपका एजेंडा है बीजेपी के खिलाफ है और धर्म के नजरिए से ही देखिए ना। क्या आपने इसको अपनी अहम की लड़ाई बना लिया है? धर्म के नजरिए से देखिए। भाई गंगा जी में स्नान करने गए थे, जाइए स्नान कीजिए। पालकी में ही क्यों जाना है? तमाम ऐसी बातें उठ रही है। पुलिस क्यों आ रही है? भाई आप जाइए गंगा जी में स्नान कीजिए।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद: ऐसा है कि आप इसको अहम कह रही हैं ना, यह स्वाभिमान की बात है। यह निज सम्मान की बात है और स्वाभिमान और निज सम्मान से बढ़कर के इस संसार में कुछ नहीं होता है। जब आत्मा पर चोट की जाती है तो आदमी तिलमिला जाता है। हम इसलिए अपने स्वाभिमान की रक्षा को आप अहम से मत जोड़िए। ये ठीक नहीं होगा, न्याय नहीं होगा।
अंजना ओम कश्यप: स्वामी जितेंन्द्रानंद जी कुछ कहना चाहेंगे आप उनसे सीधा?
स्वामी जितेंन्द्रानंद: क्या, अच्छा एक बात बताइए… अच्छा अब किस बात का अपमान हुआ? आप दो नंबर पुल को तोड़ रहे हैं… (वही बातें दोहराते हुए)… माघ मेले में आज तक कोई रथ और हाथी, घोड़ा पालकी लेकर के नहीं गया नहाने। तुम्हें ही चुल्ल ऐसी क्यों मची है भाई? मेला खराब करने की? हम यहां पे भगदड़ मचवाने की चुल क्यों मची है? सीधी-सीधी सी बात है। आप राजनीतिक दलों के हथियार हो। एंटी मोदी, एंटी योगी सुबह से शाम तक आप कहते हो कि योगी सन्यासी नहीं है। यह भी सर्टिफिकेट बांटने का काम अपने हाथ में ले रखा है। जिस प्रदेश में जाओ, जिसके बारे में मन हो, जो मन हो, वही बोलते रहो। और विशेषकर हिंदू समाज के बारे में, विश्व हिंदू परिषद इनकी नजर…
अंजना ओम कश्यप: ठीक है। अविमुक्तेश्वरानंद जी जल्दी से इसका एक जवाब आप दे दीजिए। क्या आप विपक्ष के हाथ में हथियार हैं बीजेपी के खिलाफ?
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद: बात यह है कि यही तो मजे की बात है कि शंकराचार्य का अपमान हो रहा है। दंडी सन्यासी, बटुक, ब्रह्मचारी मारे पीटे जा रहे हैं और भाजपा के लोगों को सबसे आगे कतार में खड़े होकर के उसका विरोध करना चाहिए था। लेकिन भाजपा का कोई व्यक्ति नहीं बोल रहा है। दूसरी पार्टियों के लोग बोल रहे हैं। कितना गजब की बात है और जहां तक हमारे संबंध संपर्क की भी बात है तो हम पहले भी स्पष्ट कर चुके हैं, आज भी मौका है स्पष्ट कर देते हैं कि जो गौ माता का नहीं है वह हमारा नहीं है। चाहे वह कांग्रेस हो, चाहे समाजवादी हो, चाहे भाजपा हो।
अंजना ओम कश्यप: नरम रहते हैं ना आप, नरम रहते हैं… सुनिए ना, सुनिए ना स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी, आरोप यह लगता है कि विपक्ष के नेताओं पर आप नरम रहते हैं। अखिलेश यादव हो, कांग्रेस पार्टी हो… वरना एक वक्त पर लाठी चार्ज हुआ था ना?
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद: ऐसा है प्रयागराज में नहीं काशी में चली थी और साधु संतों पे नहीं हमी पे चली थी और हम नरम नहीं थे, हमने सरकार उनकी बदलवा दी थी आप रिकॉर्ड उठा करके देखिए। हमने प्रतिकार यात्रा निकाली थी। उसका प्रभाव पूरे प्रदेश में गया था। हम नरम किसी के ऊपर नहीं रहते हैं और गर्म भी किसी के ऊपर नहीं रहते हैं। लेकिन हृदय का संबंध उसी से स्थापित करते हैं जो सनातन मान बिंदुओं के प्रति समर्पित हमको दिखाई देता है। आज के समय में गाय माता की रक्षा करने के लिए हमने हर पार्टी के दरवाजे जाकर के दस्तक दी है। कोई भी पार्टी अभी तक आगे आकर के गौ माता की रक्षा के लिए अपने आप को प्रस्तुत नहीं कर पाई है।
अंजना ओम कश्यप: हम उनका सीधा आरोप है बीजेपी का, जिस पर मैं एक स्पेसिफिक आपसे जवाब चाहती हूं। 2027 में चुनाव है और सोशल मीडिया पर भी लोग यही लिख रहे हैं कि 2027 में यूपी में चुनाव है। उसी चुनाव को टारगेट करने के लिए, बीजेपी को नुकसान पहुंचाने के लिए, विपक्ष को फायदा पहुंचाने के लिए आप इस मुद्दे को इतना हवा दे रहे हैं।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद: ऐसा है कि चुनाव केंद्र में रख के राजनीतिक लोग सोचते हैं। हम धार्मिक व्यक्ति हैं। हम चुनाव को केंद्र में रख के चिंतन नहीं करते हैं। इसलिए वो लोग राजनीतिक हैं। राजनीति को ही दृष्टि में रख के जो कुछ सोचना होगा सोचेंगे। लेकिन इसको छोटा प्रश्न कहना हमको और पीड़ा दे रहा है कि आप इतनी बड़ी घटना को छोटी बात कह रही हैं। भारतीय जनता पार्टी के शासन में, योगी आदित्यनाथ के शासन में जब संगम पर मौनी अमावस्या के पावन दिन में सन्यासियों को, बटुकों को और सन्यासियों को और सन्यासिनियों को पीटा जाता है, उनको अपमान…
अंजना ओम कश्यप: योगी जी आपको अभी सुन रहे हो। योगी जी अभी आपको सुन रहे हो, क्या कहना चाहेंगे आप उनसे? क्या कहिएगा?
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद: उनको कहना चाहेंगे कि या तो आपने इनको कहा है कि यह सब करो, और या तो आपको खुश करने के लिए सब लोग कर रहे हैं। ऐसे में घाटा किसका हो रहा है? घाटा आप ही का हो रहा है। अगर आपने कहा है तो गलत लोगों को कहा है। ये लोग सही ढंग से आपका ये बात को क्रियान्वित नहीं कर पा रहे हैं। और अगर यह आपको खुश करने के लिए कर रहे हैं और इनके इन सब किए से आप खुश हो रहे हैं तो इससे आपको भविष्य में घाटा होगा। ऐसा मत करवाइए। आप सही काम करिए। यह हम उनसे कहना चाहेंगे।
अंजना ओम कश्यप: हम्म, पर योगी जी कह रहे हैं कि आप योगी जी के खिलाफ आपका एजेंडा है। योगी जी भी तो संत ही थे ना?
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद: खबरदार! वो इस समय नेता हैं और मुख्यमंत्री हैं उत्तर प्रदेश के। संत जो है वह धर्म की शपथ लेता है और जो मुख्यमंत्री और दूसरे मंत्री होते हैं, राजनेता होते हैं वह धर्मनिरपेक्षता की शपथ लेते हैं। तो जो धर्मनिरपेक्षता की शपथ ले चुका है वो इस समय संत नहीं, वो इस समय मुख्यमंत्री ही है।
अंजना ओम कश्यप: चलिए वो कह रहे हैं कि संत नहीं है वो, अब नेता हैं वो। ये रूठना मनाना जो चल रहा है उनके साथ… मतलब यह लग रहा है कि हमेशा होता है कुछ-कुछ दिनों पर। स्वामी जितेंन्द्रानंद जी कुछ सजेशन दीजिए।
स्वामी जितेंन्द्रानंद: मैं इतना ही कहूंगा कि संतों की मर्यादा तो कलयुग के कारण अपने आप बड़ी मात्रा में नष्ट हुई है। धर्म धंधे के तरफ बदल गया है। लेकिन कुछ संत ऐसे बचे हैं। हालांकि भगवान राम के समय से ही काल नेमी से… काल नेम जिम रावण राहु… तभी से ये सारी चीजें चलती रही हैं, छद्म वेश में इस तरीके की हरकतों का। लेकिन कुछ संत ऐसे हैं जो तीर्थराज प्रयाग की पवित्र भूमि पर तप करने आते हैं, कल्पवास करते हैं। दो समय नहाते हैं, एक समय खाते हैं। भगवान का कीर्तन करते हैं। यहां तो इस धरती पर तो राजनीति ना करो। नहीं तो मैं इतना ही कहूंगा आपके चैनल के माध्यम से हाथ जोड़ के कि तीर्थराज की धरती पर जो तपा… जो इस तरीके की अधार्मिक गतिविधियां किया… कभी नरेंद्र गिरी भी इसी तरीके से यहां तपे हुए थे, उनके चेले आनंद गिरी भी तपे हुए थे। एक दुनिया से गए, एक जेल में है। तो ऐसा पाप तीर्थराज की पवित्र भूमि पर ना करें लोग। यही हम सलाह देना चाहेंगे।

