Monday, March 30, 2026

STRIKE: कोर्ट में 30 प्रतिशत मामले केवल विवाह से जुड़े

STRIKE: इलाहाबाद हाई कोर्ट में जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ चल रही वकीलों की हड़ताल के बीच सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अभय एस ओक ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। जस्टिस ओक ने सवाल किया कि वकीलों का यह काम का बहिष्कार क्या वादी के अधिकारों के साथ अन्याय नहीं कर रहा है? उन्होंने यह भी कहा कि हड़ताल के कारण फरियादियों को जो नुकसान हो रहा है, उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

STRIKE: “न्याय तक पहुंच” पर जस्टिस ओक का व्याख्यान

सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में भारतीय संविधान के 75 साल पूरे होने के अवसर पर जस्टिस ओक ने “Access to Justice” (न्याय तक पहुंच) पर एक महत्वपूर्ण व्याख्यान दिया। इस दौरान उन्होंने न्यायालयों में लंबित मामलों और न्याय की प्रक्रिया में आने वाली बाधाओं पर विस्तृत रूप से चर्चा की।

वैवाहिक विवादों का बढ़ता प्रभाव

STRIKE: जस्टिस ओक ने विशेष रूप से वैवाहिक विवादों की बढ़ती संख्या पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि इन विवादों के कारण निचली अदालतों से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक चार से छह मामलों तक अपीलें दाखिल हो रही हैं, जिससे न्यायालयों में लंबित मामलों का 20 से 30 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ वैवाहिक विवादों से संबंधित है

जजों की संख्या और न्यायालयों की स्थिति पर चिंता

STRIKE: जस्टिस ओक ने इस अवसर पर यह भी कहा कि सरकारें निचली अदालतों में जजों की संख्या बढ़ाने और अदालतों के बुनियादी ढांचे में सुधार करने में विफल रही हैं। इसका सीधा असर न्याय की प्रक्रिया पर पड़ रहा है और यह कानून के प्रति विश्वास को भी प्रभावित करता है।

STRIKE: हड़ताल और वादी पर इसका असर

जस्टिस ओक ने वकीलों की हड़ताल के मुद्दे पर विशेष रूप से कहा कि अगर किसी कोर्ट में विरोध के रूप में प्रदर्शन किया जाता है, तो इसका प्रभाव वादी पर पड़ता है। यह वादी के लिए एक पूर्वाग्रह उत्पन्न करता है, जो न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। उन्होंने इस संदर्भ में डॉ. भीमराव अंबेडकर का हवाला देते हुए कहा कि अंबेडकर ने संविधान सभा की अंतिम बैठक में यह स्पष्ट किया था कि भारत में किसी भी प्रकार का असंवैधानिक विरोध नहीं होना चाहिए।

अंबेडकर की चेतावनी का संदर्भ

STRIKE: जस्टिस ओक ने आगे कहा कि डॉ. अंबेडकर ने संविधान सभा की अंतिम बैठक में चेतावनी दी थी कि अगर विरोध प्रदर्शन असंवैधानिक तरीके से किए जाते हैं, तो उन्हें आपराधिक अवमानना ​​मानना चाहिए। जस्टिस ओक ने इस बात पर जोर दिया कि न्यायालयों में इस तरह के प्रदर्शनों से न केवल न्याय की प्रक्रिया प्रभावित होती है, बल्कि यह वादी के लिए भी नुकसानदेह होता है।

STRIKE: न्याय की प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता

अपने व्याख्यान में जस्टिस ओक ने अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी बात की, जिनमें अंडरट्रायल कैदियों की स्थिति, मामलों की सुनवाई में देरी, और न्यायालयों में जजों की कमी शामिल थीं। उन्होंने कहा कि इन मुद्दों को हल करने के लिए न्यायालयों में आवश्यक सुधारों की आवश्यकता है ताकि हर नागरिक को जल्दी और प्रभावी न्याय मिल सके।

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Karnika Pandey
Karnika Pandeyhttps://reportbharathindi.com/
“This is Karnika Pandey, a Senior Journalist with over 3 years of experience in the media industry. She covers politics, lifestyle, entertainment, and compelling life stories with clarity and depth. Known for sharp analysis and impactful storytelling, she brings credibility, balance, and a strong editorial voice to every piece she writes.”
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