Somnath Temple: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपनी गुजरात यात्रा के पहले दिन का सार साझा करते हुए सोमनाथ मंदिर की आध्यात्मिक और ऐतिहासिक महत्ता पर प्रकाश डाला।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि सोमनाथ मंदिर सदियों से पवित्रता और अटूट आस्था का प्रतीक रहा है, जिसकी प्रेरणा पीढ़ियों तक लोगों को मार्गदर्शन देती रही है।
अपनी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री ने मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की, ओंकार मंत्र का जाप किया और भव्य ड्रोन शो का आनंद लिया।
यह पूरा आयोजन सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य मंदिर की गौरवशाली विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।
Somnath Temple: शौर्य यात्रा: वीरों को श्रद्धांजलि
प्रधानमंत्री आज सुबह 9:45 बजे शौर्य यात्रा में भाग लेंगे। यह यात्रा उन अनगिनत वीरों को समर्पित है, जिन्होंने सोमनाथ मंदिर की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।
इस यात्रा में 108 घोड़ों की प्रतीकात्मक सवारी भी शामिल होगी, जो साहस, वीरता और बलिदान का प्रतीक मानी जाती है।
यह दृश्य न केवल ऐतिहासिक स्मृतियों को जीवंत करेगा, बल्कि युवाओं में देशभक्ति और गौरव की भावना भी जागृत करेगा। यात्रा के पश्चात प्रधानमंत्री पुनः मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना करेंगे।
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का ऐतिहासिक महत्व
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व 8 जनवरी से 11 जनवरी तक मनाया जा रहा है। यह पर्व 1026 ईस्वी में महमूद गजनवी द्वारा सोमनाथ मंदिर पर किए गए पहले आक्रमण की 1,000वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित किया गया है।
इतिहास साक्षी है कि इस हमले के बाद मंदिर को कई बार नष्ट किया गया, लेकिन हर बार इसे और भी अधिक भव्य रूप में पुनर्निर्मित किया गया।
यह मंदिर केवल पत्थरों की संरचना नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान, आस्था और सभ्यता के गौरव का जीवंत प्रतीक है।
सरदार पटेल का संकल्प और पुनर्निर्माण
सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने 12 नवंबर 1947 को लिया था।
उन्होंने मंदिर के ध्वस्त अवशेषों का निरीक्षण कर इसे पुनः भव्य रूप में खड़ा करने का निश्चय किया।
इस ऐतिहासिक कार्य में जनता की व्यापक भागीदारी रही। अंततः 11 मई 1951 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति में मंदिर का भव्य उद्घाटन हुआ।
वर्ष 2026 में इस ऐतिहासिक उद्घाटन की 75वीं वर्षगांठ मनाई जाएगी, जो राष्ट्र के लिए गर्व का विषय है।
आस्था का केंद्र और राष्ट्रीय संकल्प
आज सोमनाथ मंदिर, जिसे 12 आदि ज्योतिर्लिंगों में प्रथम माना जाता है, अरब सागर के तट पर अपनी दिव्य आभा बिखेरता है।
इसका लगभग 150 फीट ऊंचा शिखर दूर से ही श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। यह शिखर सदियों से आस्था, आत्मसम्मान और राष्ट्रीय संकल्प का प्रतीक बना हुआ है।
मंदिर की भव्यता और ऐतिहासिक महत्ता देशवासियों के भीतर गौरव और सभ्यता के प्रति आत्मसम्मान की भावना को मजबूत करती है।
नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व जैसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी विरासत से जोड़ने का कार्य करते हैं। यह पर्व न केवल इतिहास की स्मृतियों को जीवंत करता है,
बल्कि यह भी संदेश देता है कि भारत की संस्कृति और आस्था कितनी अडिग और शक्तिशाली रही है।
प्रधानमंत्री की यह यात्रा उसी परंपरा को आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण कदम है, जो आने वाली पीढ़ियों को आत्मगौरव और देशप्रेम से भरने का कार्य करेगी।

