Wednesday, January 14, 2026

SIR से मिला 40 साल से लापता बेटा, गांव में उमड़ा जनसैलाब

SIR

एसआईआर अभियान के बीच सामने आया भावुक मिलन

भीलवाड़ा जिले में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के दौरान एक ऐसा मिलन सामने आया जिसने पूरे क्षेत्र को गहराई तक झकझोर दिया।

लगभग चालीस वर्ष से लापता उदय सिंह रावत की अपने परिवार से अप्रत्याशित वापसी ने गांव जोगीधोरा को उत्साह और भावनाओं से भर दिया। ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों के बीच जुलूस निकालकर उनका स्वागत किया।

बचपन में गांव छोड़कर छत्तीसगढ़ पहुंचा था उदय सिंह

करेड़ा तहसील की शिवपुर पंचायत के जोगीधोरा गांव का रहने वाला उदय सिंह वर्ष 1980 में आठवीं कक्षा में पढ़ता था।

आर्थिक तंगी के कारण वह गर्मियों की छुट्टियों में रोजगार की तलाश में छत्तीसगढ़ चला गया और एक निजी कंपनी में गार्ड की नौकरी करने लगा।

उसी दौरान उसने अपने साथी को बताया था कि वह राजस्थान के भीलवाड़ा का निवासी है।

दुर्घटना में खो गई याददाश्त, परिवार की दशकों तक तलाश

छत्तीसगढ़ में हुए एक सड़क हादसे ने उदय सिंह की स्मृति पूरी तरह छीन ली। गांव, परिवार और पहचान सब कुछ धुंधला हो गया।

परिजनों ने वर्षों तक उसकी तलाश जारी रखी, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। गांव वाले भी उसकी वापसी को लगभग असंभव मान चुके थे, जबकि परिवार उम्मीद की आखिरी किरण बचाए हुए था।

एसआईआर अभियान ने जोड़ा परिवार से, धीरे-धीरे लौटी स्मृति

चुनाव आयोग के एसआईआर अभियान से पहले ही उदय सिंह की याददाश्त थोड़ी-थोड़ी लौटने लगी थी। वह सुराज गांव में मतदाता संबंधी जानकारी लेने पहुंचा।

वहीं राजकीय सीनियर उच्च माध्यमिक विद्यालय में बीएलओ द्वारा मतदाता सूची सत्यापन का कार्य चल रहा था। उदय सिंह भी वोटर लिस्ट में अपना नाम ढूंढने के लिए स्कूल आया था।

क्लासमेट ने पहचाना, तुरंत दी परिजनों को सूचना

स्कूल के प्रिंसिपल रामकृष्ण वर्मा के अनुसार, बीएलओ घर-घर जाकर सत्यापन कर रहे थे। उसी दौरान शिक्षक जीवन सिंह, जो उदय का सहपाठी रह चुका था, उसकी शक्ल देखते ही दंग रह गया।

जीवन सिंह ने उदय को तुरंत पहचान लिया और बिना देर किए शिवपुर पंचायत के जोगीधोरा में उसके परिवार को सूचना दी। सूचना मिलते ही परिजन स्कूल पहुंचे और वर्षों पुरानी तलाश अचानक सामने खड़ी दिखी।

मां ने घावों के निशान से की अंतिम पुष्टि

उदय सिंह के भाई हेमसिंह रावत के अनुसार, शुरुआत में विश्वास करना कठिन था। लेकिन उदय ने बचपन की निजी यादें, घरेलू घटनाएँ और परिवार से जुड़े प्रसंग ठीक उसी तरह बताने शुरू किए जैसे कोई अपना कहता है।

अंतिम पुष्टि तब हुई जब मां चुनी देवी रावत ने बेटे के माथे और सीने पर बचपन में बबूल की टहनी से बने पुराने घावों के निशान देखे। निशान बिल्कुल वही थे।

“यो म्हारो उदय ही है…” कहते ही फूट पड़े आंसू

घावों के निशान देखते ही चुनी देवी का दिल भर आया। उन्होंने उदय के माथे को चूमते हुए कहा, “यो म्हारो उदय ही है… मेरो लाल मिल गयो।”

यह दृश्य वहां मौजूद हर व्यक्ति को भीतर तक भावुक कर गया। चार दशक की बेचैनी और प्रतीक्षा एक ही क्षण में पिघलकर आँसू बनकर बह निकली।

गांव में जुलूस, ढोल-नगाड़ों के साथ पारंपरिक स्वागत

उदय सिंह की पहचान होते ही पूरे गांव में खुशियों की लहर दौड़ गई। लोगों ने ढोल-नगाड़ों, डीजे और पारंपरिक रीति से जुलूस निकालकर उनका स्वागत किया।

ग्रामीणों ने वर्षों पुराने रिश्ते को जीवंत होते देखा और उन्हें घर ले जाते हुए उत्सव जैसा माहौल बनाया। घर-आंगन से लेकर पूरे गांव में उल्लास की गूंज सुनाई देती रही।

एक्सीडेंट के बाद भूल गया था सबकुछ, अब मिली जिंदगी की सबसे बड़ी खुशी

उदय सिंह ने बताया कि दुर्घटना के बाद उनकी स्मृति चली गई थी और उन्हें अपने परिवार, गांव और अतीत की कोई बात याद नहीं आती थी।

अब परिवार से मिलना उनके लिए जिंदगी की सबसे बड़ी खुशी है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के एसआईआर अभियान ने उन्हें अपने घर और अपनों से दोबारा जोड़ने का अवसर दिया है।

चुनाव आयोग के अभियान ने बदली एक जिंदगी

यह मामला एसआईआर अभियान की उस मानवीय संवेदना को भी उजागर करता है जो सिर्फ कागजों की जांच भर नहीं, बल्कि खोए हुए लोगों को पहचान दिलाने का माध्यम भी बन सकता है।

उदय सिंह ने भी स्वीकार किया कि अगर यह अभियान नहीं होता, तो शायद वे आज भी अपने परिवार से दूर होते।

प्रशासन और ग्रामीणों में चर्चा, मिसाल बना मानवीय क्षण

उदय सिंह का पुनर्मिलन न केवल परिजनों के लिए, बल्कि पूरे इलाके के लिए एक मिसाल बन गया है। ग्रामीण इसे वर्षों की पीड़ा के बाद आया चमत्कार मान रहे हैं।

प्रशासनिक हलकों में भी यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है कि एक सरकारी अभियान कैसे किसी परिवार के बिछड़े सदस्य को लौटाने की कड़ी बन सकता है।

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Mudit
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लेखक 'भारतीय ज्ञान परंपरा' के अध्येता हैं और 9 वर्षों से भारतीय इतिहास, धर्म, संस्कृति, शिक्षा एवं राजनीति पर गंभीर लेखन कर रहे हैं।
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