Thursday, February 5, 2026

सिलीगुड़ी कॉरिडोर: जिस चिकन नेक को अलग करने की थी साजिश, अब वहीं बनेगी अंडरग्राउंड रेल टनल

सिलीगुड़ी कॉरिडोर: सिलीगुड़ी के पास स्थित चिकन नेक यानी सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत के लिए केवल एक भौगोलिक हिस्सा नहीं, बल्कि एक रणनीतिक जीवनरेखा है।

लगभग 22 किलोमीटर चौड़ी और 60 किलोमीटर लंबी यह पतली पट्टी भारत को उसके पूर्वोत्तर के आठ राज्यों से जोड़ती है।

सड़क, रेल, ईंधन पाइपलाइन और सैन्य आपूर्ति जैसी सभी जरूरी सेवाएं इसी रास्ते से गुजरती हैं।

अगर किसी कारणवश यह कॉरिडोर बाधित हो जाए, तो पूरा नॉर्थ-ईस्ट देश के बाकी हिस्से से कट सकता है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रशासन दोनों पर गंभीर असर पड़ेगा।

तीन देशों के बीच सामरिक दबाव

चिकन नेक की संवेदनशीलता इसलिए भी अधिक है क्योंकि यह इलाका तीन देशों से घिरा हुआ है। इसके दक्षिण में बांग्लादेश, पश्चिम में नेपाल और उत्तर में चीन की चुम्बी वैली स्थित है।

चुम्बी वैली में चीन की मजबूत सैन्य मौजूदगी है, जबकि बांग्लादेश की सीमा बेहद नजदीक है। इस कारण यह इलाका केवल एक ट्रांजिट रूट नहीं, बल्कि लगातार निगरानी और सैन्य संतुलन का केंद्र बना हुआ है।

केंद्र सरकार की नई रणनीति

सिलीगुड़ी कॉरिडोर: बदलते भू-राजनीतिक हालात और बढ़ते सुरक्षा खतरों को देखते हुए केंद्र सरकार ने सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा को नए स्तर पर ले जाने का फैसला किया है।

अब सुरक्षा केवल जमीन और हवाई निगरानी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि धरती के नीचे भी मजबूत ढांचा तैयार किया जा रहा है।

इसी सोच के तहत भारतीय रेलवे यहां एक बड़ी अंडरग्राउंड रेलवे परियोजना पर काम कर रहा है, जिससे इस कॉरिडोर की रणनीतिक मजबूती कई गुना बढ़ जाएगी।

अंडरग्राउंड रेलवे परियोजना क्या है

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, नॉर्थ-ईस्ट को देश से जोड़ने वाले इस अहम कॉरिडोर के लिए विशेष योजना बनाई गई है।

पश्चिम बंगाल के टिन माइल हाट से रंगापानी तक लगभग 40 किलोमीटर लंबी अंडरग्राउंड रेल लाइन बिछाई जाएगी, जो 20 से 24 मीटर की गहराई पर होगी।

इसके साथ ही मौजूदा रेलवे ट्रैक को चार लाइनों में बदला जाएगा, जिससे माल और सैन्य ट्रैफिक की क्षमता में बड़ा इजाफा होगा।

टिन माइल हाट की रणनीतिक अहमियत

सिलीगुड़ी कॉरिडोर: टिन माइल हाट बांग्लादेश सीमा के बेहद करीब स्थित है, जबकि बांग्लादेश का पंचगढ़ जिला यहां से लगभग 68 किलोमीटर दूर है।

इस भौगोलिक स्थिति के कारण यह इलाका रणनीतिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है।

अंडरग्राउंड रेलवे लाइन बनने से इस क्षेत्र में भारत की कनेक्टिविटी और सुरक्षा दोनों मजबूत होंगी, जिससे किसी भी बाहरी दबाव या खतरे का असर कम किया जा सकेगा।

अंडरग्राउंड कनेक्टिविटी क्यों जरूरी थी

अब तक सिलीगुड़ी कॉरिडोर का अधिकांश इंफ्रास्ट्रक्चर जमीन के ऊपर था, जो दुश्मन देशों की निगरानी, हवाई हमलों, ड्रोन और आर्टिलरी के लिए आसान लक्ष्य बन सकता था।

इसके अलावा बाढ़ और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाएं भी इस क्षेत्र में अक्सर नुकसान पहुंचाती हैं।

अंडरग्राउंड टनल इन सभी खतरों से कहीं अधिक सुरक्षित होती है और युद्ध या आपदा की स्थिति में भी सप्लाई लाइन को लगातार चालू रखती है।

सैन्य लॉजिस्टिक्स की मजबूत रीढ़

रेल परिवहन को सैन्य लॉजिस्टिक्स का सबसे प्रभावी माध्यम माना जाता है, क्योंकि एक मालगाड़ी लगभग 300 ट्रकों के बराबर सामान एक साथ ले जा सकती है।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अंडरग्राउंड रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को पहचानना और निशाना बनाना दुश्मन के लिए बेहद मुश्किल होता है।

इससे भारत को युद्ध के समय रणनीतिक बढ़त मिलती है और सैन्य सप्लाई सुरक्षित रहती है।

नॉर्थ-ईस्ट की पुरानी रणनीतिक कमजोरी का समाधान

सिलीगुड़ी कॉरिडोर: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस परियोजना को नॉर्थ-ईस्ट की एक लंबे समय से चली आ रही रणनीतिक कमजोरी का समाधान बताया है।

उनके अनुसार, यह काम 1971 के युद्ध के बाद ही हो जाना चाहिए था। प्रस्तावित अंडरग्राउंड रेल लिंक नॉर्थ-ईस्ट और शेष भारत के बीच एक सुरक्षित, स्थायी और भरोसेमंद ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर तैयार करेगा।

चीन और बांग्लादेश फैक्टर

चीन ने डोकलाम और अरुणाचल प्रदेश के पास बड़े पैमाने पर सैन्य और इंफ्रास्ट्रक्चर नेटवर्क खड़ा किया है, जिसकी पुष्टि सैटेलाइट तस्वीरों से होती है।

दूसरी ओर, बांग्लादेश में कुछ कट्टरपंथी तत्वों द्वारा सिलीगुड़ी कॉरिडोर को लेकर दिए गए बयान और रंगपुर के लालमोनिरहाट एयरबेस का पुनर्विकास भारत की सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ाता है।

रेलवे से आगे की व्यापक सैन्य तैयारी

भारत ने सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा को लेकर सिर्फ रेलवे परियोजना पर ही ध्यान नहीं दिया है। पश्चिम बंगाल, असम और त्रिपुरा में पुराने एयरस्ट्रिप्स को दोबारा सक्रिय किया जा रहा है,

जबकि चोपड़ा, किशनगंज और लचित बोरफुकन में नए आर्मी बेस बनाए गए हैं। इसके साथ ही हल्दिया में नए नेवी बेस का प्रस्ताव भी है, जो मिलकर पूर्वी सीमा पर बहुस्तरीय सुरक्षा कवच तैयार करते हैं।

चिकन नेक पर धमकियों का सख्त जवाब

अतीत में कुछ तत्वों द्वारा सिलीगुड़ी कॉरिडोर को काटने जैसी धमकियां दी गई थीं, जिन पर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया।

गृहमंत्री अमित शाह ने साफ कहा कि सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत का था, है और रहेगा, और देश की एकता से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

अंडरग्राउंड रेलवे टनल परियोजना केवल एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि यह भारत की दीर्घकालिक रणनीतिक सोच का प्रतीक है।

यह न केवल नॉर्थ-ईस्ट को सुरक्षित करता है, बल्कि यह भी संदेश देता है कि भारत अब अपनी कमजोरियों को ताकत में बदलने के लिए भविष्य की चुनौतियों का सामना आज ही करने के लिए तैयार है।

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Madhuri
Madhurihttps://reportbharathindi.com/
पत्रकारिता में 6 वर्षों का अनुभव है। पिछले 3 वर्षों से Report Bharat से जुड़ी हुई हैं। इससे पहले Raftaar Media में कंटेंट राइटर और वॉइस ओवर आर्टिस्ट के रूप में कार्य किया। Daily Hunt के साथ रिपोर्टर रहीं और ETV Bharat में एक वर्ष तक कंटेंट एडिटर के तौर पर काम किया। लाइफस्टाइल, इंटरनेशनल और एंटरटेनमेंट न्यूज पर मजबूत पकड़ है।
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